Kaushambi news: जब देश का एक सैनिक सरहद और अमरनाथ यात्रियों की सुरक्षा में दिन-रात जुटा था, ठीक उसी वक्त पीछे से उसके पैतृक घर को बुलडोजर से ढहा दिया गया! उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी सेआई इस खबर और एक ITBP जवान के वायरल वीडियो ने पूरे सोशल मीडिया पर हंगामा मचा दिया है।
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ITBP जवान के परिवार पर टूटा मुसीबतों का पहाड़
हाल ही में उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी (Kaushambi) के चायल तहसील (Chayal Tehsil) के अहलादपुर गांव (Ahladpur Village) से हैरान और परेशान करने वाला मामला सामने आया है। जहाँ इन दिनों अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा में तैनात ITBP जवान रामकिशन भारती का एक वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया काफी तेजी से वायरल हो रहा है, हाथ में हथियार और बुलेटप्रूफ जैकेट पहने हुए सवाल पूछ रहे हैं कि वे देश की रक्षा करें या अपने घर को बचाएं? इतना ही नहीं सीमा पर रक्षा कर रहे जवान का आरोप है। कि उनका परिवार पिछले 35 सालों से उस जमीन पर रह रहा था, रामकिशन का दावा है कि गांव के प्रधान ने उनसे 1 लाख 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
एक घटना जिसमें एक सैनिक के परिवार के घर पर प्रशासनिक
कार्रवाई की गई – जबकि सैनिक अमरनाथ यात्रा की ड्यूटी पर तैनात है – कौशम्बी, उत्तर प्रदेश में ❗️सैनिक की अनुपस्थिति में परिवार का घर नष्ट किया जा रहा है। स्थानीय निवासी और राजनीतिक नेता ने मांग की है कि प्रशासन कार्रवाई को रोके… pic.twitter.com/0PKkARCx5p
— MOHIT 🔱 ARJUN🏹 (INC 🇮🇳) (@MohitArjun1) July 7, 2026
प्रधान की दबंगई या सिस्टम की नाकामी?
और घूस न देने के कारण ही उनके निर्माणाधीन मकान को निशाना बनाया गया…वर्दी और सुरक्षा गियर पहने इस सैनिक ने नम आंखों से एसडीएम चायल, लेखपाल और कानूनगो पर सीधा पक्षपात का आरोप लगाया है। जवान का कहना है कि उसी सरकारी जमीन पर गांव के अन्य लोगों के भी मकान बने हैं, लेकिन प्रशासन ने उन्हें छूने तक की जहमत नहीं उठाई।
मुख्यमंत्री से की न्याय की मांग
वही इस पूरी घटना को लेकर रामकिशन ने अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) के नाम पत्र भेजकर इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है। इस पूरे विवाद पर उपजिलाधिकारी अरुण कुमार (Sub-Divisional Magistrate Arun Kumar) के नेतृत्व वाली राजस्व टीम का साफ कहना है कि यह कार्रवाई किसी निजी रंजिश या भेदभाव के तहत नहीं की गई है।
जवान ने बताया उउसके साथ हुआ अन्याय
अधिकारियों के मुताबिक, राजस्व अभिलेखों और भूमि रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद यह पाया गया कि वह जमीन खलिहान की सरकारी भूमि थी। सरकारी जमीन को पूरी तरह कब्जामुक्त कराने के लिए ही यह बुलडोजर कार्रवाई नियमानुसार की गई थी…जहां प्रशासन इसे नियमों के तहत की गई कार्रवाई बता रहा है। वहीं देश की सुरक्षा में तैनात जवान इसे अपने साथ हुआ बड़ा अन्याय कह रहा है। तो अब देखना होगा कब दलित जवान रामकिशन के साथ न्याय होता। हालांकि, इस घटना ने योगी सरकार और प्रशासन पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं: क्या ऐसा सिर्फ़ दलितों के साथ ही होता है? क्या सिर्फ़ उन्हीं के घरों पर ‘बुलडोज़र कार्रवाई’ होती है? असली आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे है…



