Madhya Pradesh में नहीं थम रहे दलितों पर अत्याचार, रिपोर्ट ने खोली सागर और ग्वालियर की हकीकत

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Madhya Pradesh: दलितों की हालत दिन-ब-दिन और भी खराब होती जा रही है; शायद ही कोई ऐसा दिन बीतता हो जब उनके खिलाफ कोई अप्रिय घटना न हो, और मारपीट के मामले तो लगभग रोज़ ही सामने आते रहते हैं। वहीं दूसरी ओर, मध्य प्रदेश मनो दलित उत्पीड़न का गढ़ बन गया है। दरअसल, मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2023 में अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराधों के मामले में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा। तो चलिए इस लेख में उनके बारे में जानते है।

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दलितों और आदिवासियों की स्थिति दयनीय

मध्य प्रदेश के किसी न किसी कोने से दलितों के उत्पीड़न की खबर आए बिना एक भी दिन नहीं बीतता। हालिया मामला भी मामला मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) से है, जहां बीते 3 सालो में दलितो के साथ होने वाले अपराधों में आये तेजी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जी, जहां सरकार दलितो के लिए न्याय और विकास की बात करती है वहीं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Empowerment) ने लोकसभा में एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें ये सनसनीखेज खुलासा किया गया है कि 2023 में मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) जहां दलित उत्पीड़न के मामले में टॉप 3 राज्यों में से एक था वहीं वहां आदिवासियों की स्थिति भी बेहद खराब है।

सागर और ग्वालियर जिले से आये सबसे ज्यादा मामले

खासकर राज्य के सागर और ग्वालियर जिले (Gwalior district) में सबसे ज्यादा दलित औऱ आदिवासियों के उत्पीड़न के मामले आये। इस रिपोर्ट में 2021 से लेकर 2023 के आकड़े पेश किये गए है। जिसमें सबसे बुरी स्थिति सागर जिले की है। जहां  2021 में 509 मामले दर्ज किये गए थे वहीं 2023 में ये बढ़ 666 हो गया है। इसके बाद ग्वालियर में 569 मामले दर्ज किए गए. शिवपुरी में 404, विदिशा में 345 और छतरपुर में 315 मामले सामने आए. खास बात यह है कि बुंदेलखंड और चंबल अंचल के कई जिले लगातार इस सूची में बने हुए हैं, जिससे इन क्षेत्रों में सामाजिक तनाव और उत्पीड़न की गंभीर स्थिति सामने आती है। वहीं आदिवासियों के खिलाफ छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा मामले सामने आये है। साल 2023 में राज्य में 2,858 मामले आदिवासियों के उत्पीड़न के दर्ज हुए थे।

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जहां 2021 में 82 मामले थे वहीं 2023 में 149 हो गए। ये आकड़े बताते है कि सरकार दलितों और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने में पूरी तरह से असफल साबित हुई है। वहीं पुलिस भी अपना काम काफी धीमी गति से कर रही है, जिसने वहां की कानून व्यवस्था को सवालो के घेरे में पहुंचा दिया है। ऐसे में देखना ये होगा कि मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन पर उठ रहे लगातार सवालों के बाद क्या जवाब आता है सरकार का.. क्या अब भी कोई नया बहाना बाकी है।

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