Lucknow Rapido controversy: बीते दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के लखनऊ से एक विवादित घटना सामने आई, जहां रैपिडो ने एक दलित कैब ड्राइवर पर 99 साल का बैन लगा दिया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि, जब मामला बढ़ा तो रैपिडो ने जातिवादी टिप्पणी का विरोध करने वाले ड्राइवर पर से बैन हटा दिया, जिससे बहुजन एकता की ताकत का पता चला।
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दलित कैब ड्राइवर का नया वीडियो
अगर कोई दलितों की मदद करता है, तो मदद करने वाले लोगों हुक्का पानी बंद कर दिया जाता है या गांव से निकाल दिया जाता है। हमने ऐसे कई मामले देखे हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि देश की जानी-मानी कंपनी रैपिडो भी किसी दलित के साथ ऐसा कर सकती है और कैब ड्राइवर को बैन कर सकती है? ऐसा ही मामला rapido द्वारा 99 सालों का बैन झेलने वाले कैब ड्राइवर को लेकर है।
Rapido को झुकना पड़ा और निलंबन भी रद्द करना पड़ा
दरअसल, लखनऊ में कैब चलने के दौरान जब पीड़ित ड्राइवर ने जातिगत टिप्पणी किए जाने के खिलाफ पैसेंजर को आधे रास्ते में उतार दिया तो इस मामले ने बड़ा तूल पकड़ा। Rapido ने एक्शन लिया और 99 साल के लिए ड्राइवर को बैन कर दिया गया लेकिन इस मुद्दे को लेकर इतना ज्यादा बवाल हुआ कि आखिरकार rapido को झुकना पड़ा और निलंबन भी रद्द करना पड़ा।
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कैब ड्राइवर तमाम लोगों का धन्यवाद किया
इसकी जानकारी खुद कैब ड्राइवर अंकित कुमार ने वीडियो जारी कर दी है। अंकित ने उन तमाम लोगों का धन्यवाद किया जो उसकी इस मुसीबत की घड़ी में खड़े थे, और rapido के बॉयकॉट करने की मुहिम चला रहे थे। अंकित ने भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद और उनके सभी कार्यकर्ताओं का तहे दिल से आभार व्यक्त किया है जो इस नाजुक वक्त में शुरू से उसके साथ खड़े थे।
नेहा दास और तमाम मनुवादियों के लिए बुरी खबर है। 😭
रैपिडो ने कैब ड्राइवर अंकित कुमार पर 100 साल का बैन लगा दिया था, लेकिन सोशल मीडिया पर जब कंपनी को जमकर रेला गया तो बैन हटाना ही पड़ा। pic.twitter.com/gEkFwmaTMK
— Lakhan meena (@LakhanmeenaIND) August 20, 2026
Rapido ने जिस तरह से बहुजन एकता के आगे हार मानी, वो सबूत है कि बहुजन भले ही कमजोर हो, लेकिन अगर वो एकजुट हो जाएं तो करोड़ों की कंपनी को भी झुका सकते है तो फिर कोई सरकार और राजनेता भला क्या कर सकते है। इस घटना ने एक बात साफ़ कर दी है: सबके सपोर्ट से, एक अकेला इंसान भी बहुत कुछ कर सकता है, खुद को सही साबित कर सकता है, और अपने हक़ के लिए लड़ सकता है।



