SC-ST और OBC पुजारियों की नियुक्ति पर हाई कोर्ट का बड़ा सवाल, सरकार से अंतिम जवाब तलब – MP News

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MP News: हाल ही में मध्य प्रदेश (MP) के जबलपुर (Jabalpur) से चौकाने वाली खबर सामने आई है। जहां मंदिर मस्जिद के नाम पर बांटने वाली बीजेपी सरकार (BJP government) से ही इस बार हाई कोर्ट (High Court) ने तीखे सवाल पूछ लिए है। जी हां, प्राइवेट तो छोड़िए सरकारी मंदिरों में भी एससीएसटी (SC/ST) और ओबीसी कैटीगरी (OBC Category) के पुजारियों की नियुक्ति न किए जाने पर हाईकोर्ट ने सरकार से ही तीखे सवाल दाग़े है।

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SC/ST & OBC को भी पुजारी बनने का मौका मिले

हाल ही में देश भर के प्रमुख मंदिरों के बारे में यह खबर आई है कि अब समाज के सभी वर्गों के लोगों को मंदिर का पुजारी बनने का मौका मिलेगा; हालाँकि, सरकारी मंदिरों में इस भूमिका के लिए योग्य होने के लिए उन्हें पहले एक परीक्षा पास करनी होगी। लेकिन यह प्रक्रिया मध्य प्रदेश के मंदिरों में देखने को नहीं मिली…जिसके बाद समानता के अधिकार का हवाला देते हुए याचिका में सवाल उठाया गया है कि अन्य श्रेणियों (एससी, एसटी और ओबीसी) के व्यक्तियों को सरकार द्वारा संचालित मंदिरों में पुजारी बनने का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है।

दरअसल 13 मई 2025 को अजाक्स भोपाल के सचिव एम.सी. अहिरवार की ओर से दायर याचिका में उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसके मुताबिक धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने 4 फरवरी 2019 को एक नीति जारी की थी जिसके मुताबित सभी गवर्मेंट नियंत्रण वाले मंदिरों में ब्राह्मण पुजारी नियुक्त किए जाएंगे। याचिकाकर्ता ने याचिका में पूछा है कि आखिर ये जाति आधारित भेदभाव नहीं है तो क्या है।  याचिकाकर्ता ने इसे समानता और समान अवसर के संवैधानिक अधिकारों के विपरीत बताते हुए नीति की समीक्षा की मांग की है। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के योग्य लोगों को भी पुजारी बनने का मौका मिलना चाहिए।

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हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा सवाल

आपको बता दें, यह सुनवाई चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और एडवोकेट प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच के सामने हुई। सीनियर एडवोकेट रामेश्वर सिंह ठाकुर ने एडवोकेट अभिलाषा लोधी की मदद से मोहम्मद का पक्ष रखा, जबकि सरकारी वकील अनुभव जैन राज्य की ओर से पेश हुए। इस याचिका पर हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है जिसके लिए एक महीने का समय दिया गया है। हालाँकि यह नीति संविधान द्वारा सभी भारतीयों को दिए गए समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन है—एक ऐसा मामला जिस पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। कोर्ट के रुख ने बता दिया है कि जाति का आधार पर भेदभाव नहीं सहा जायेगा, जो काबिल होगा उसे ही हक मिलेगा। वैसे आपको क्या लगता है, क्या इससे मंदिरों में दलित पुजारियों को एंट्री मिल जाएगी।

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