Top 5 Dalit news: कानूनी बराबरी और सामाजिक समानता की बातें तो बहुत की जाती है, लेकिन जब इन मुद्दों पर ग्राउंड लेवल पर इंप्लीमेंट करने का समय आता है तो फिर यही आपसी सौहार्द का राग अलापने वाले सबसे पहले दुम दबा कर बिल में छुपते है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो सही मायने में दलित समाज के लिए आईना है कि पहले तोलों, मोलो और फिर कुछ भी तय करो।
जबलपुर में मंदिरों में ब्राह्मण पुजारी नीति के खिलाफ याचिका
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर से है। जहां मंदिर मस्जिद के नाम पर बांटते वाली बीजेपी सरकार से ही इस बार हाई कोर्ट ने तीखे सवाल पूछ लिए है। जी हां, प्राइवेट तो छोड़िए सरकारी मंदिरों में भी एससीएसटी और ओबीसी कैटीगरी के पुजारियों की नियुक्ति न किए जाने पर हाईकोर्ट ने सरकार से ही तीखे सवाल दाग़े है। दरअसल 13 मई 2025 को अजाक्स भोपाल के सचिव एम.सी. अहिरवार की ओर से दायर याचिका में उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसके मुताबिक धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के प्रमुख सचिव ने 4 फरवरी 2019 को एक नीति जारी की थी जिसके मुताबित सभी गवर्मेंट नियंत्रण वाले मंदिरों में ब्राह्मण पुजारी नियुक्त किए जाएंगे। याचिकाकर्ता ने याचिका में पूछा है कि आखिर ये जाति आधारित भेदभाव नहीं है तो क्या है। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के योग्य लोगों को भी पुजारी बनने का मौका मिलना चाहिए, ये नीति सरासर संविधान में सभी भारतीय को मिले समानता के अधिकार का उल्लंघन है। जिसपर सरकार को विचार करना चाहिए। इस याचिका पर हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है जिसके लिए एक महीने का समय दिया गया है। कोर्ट के रुख ने बता दिया है कि जाति का आधार पर भेदभाव नहीं सहा जायेगा, जो काबिल होगा उसे ही हक मिलेगा। वैसे आपको क्या लगता है, क्या इससे मंदिरों में दलित पुजारियों को एंट्री मिल जाएगी।
रामपुर में पुलिस दरोगा की दादागिरी
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के रामपुर से है, जहां एक दरोगा को अपनी वर्दी का रौब दिखा कर दलित को प्रताड़ित करना और उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी देना बेहद भारी पड़ा है। दरोगा बाबू को न केवल लाइन हाजिर किया गया है बल्कि अब तो इनका एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। ये मामला रामपुर के मिलक थाना क्षेत्र के भैसोड़ी का है। जहां पीड़ित युवक अजय सिंह ने बताया कि 2 अगस्त को किसी मामले के निपटारे के लिए 2 हजार रुपए लेकर आपसी समझौता करा दिया गया था, लेकिन अगले दिन दरोगा शिवकुमार भदौरिया ने उसे फोन किया और उसे काफी गन्दी गन्दी गालियां देनी शुरू कर दी। पीड़ित ने अपना पक्ष रखने की बहुत कोशिश की लेकिन दरोगा लगातार उसे गालियां दिए जा रहा था। जब पीड़ित ने कहा कि वो उसकी बातें रिकॉर्ड कर रहा है तो दरोगा ने उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी। जिसे लेकर अब मुद्दा काफी गरमा गया है। पीड़ित ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में याचिका देकर न्याय की गुहार लगाई। वहीं ऑडियो वायरल होने के बाद एसपी सोमेंद्र मीना ने दो दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया है। इस मामले में पुलिस की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है। अब देखना ये होगा कि दरोगा की तरफ से अपनी सफ़ाई में क्या कहा जाता है।
तेलंगाना में दलित इंफ्लूएंसर को प्रताड़ित किया गया
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना के हैदराबाद से है, जहां एक दलित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंस ने हिंदुत्ववादी कंटेंट क्रिएटर टीडी राकेश शर्मा के खिलाफ जातिगत अपमान, मानसिक प्रताड़ना, और अपमानित करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है। पीड़ित अजय कुमार, जो सोशल मीडिया पर”रेडिकल अजय के नाम से फेमस है, उसने पुंजागुट्टा पुलिस स्टेशन में टीडी राकेश के खिलाफ मामला दर्ज कराते हुए कहा कि वो एक आंबेडकरवादी है और पीएम नरेंद्र मोदी और आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण को लेकर उसके अपने पॉलिटिकल व्यूज है, लेकिन उसके विचार टीडी राकेश को नापसंद आए और उसने लगातार पीड़ित को सोशल मीडिया पर ही तंग करना शुरू कर दिया। यहां तक कि उसकी निजी जानकारी, उसके घर का पता, उसका फोन नंबर तक सार्वजनिक कर दिया गया। यहां तक कि राकेश ने उसपर टिप्पणी करते हुए कई आपत्तिजनक वीडियो अपलोड किए है। पीड़ित ने अपील की है इस मामले में जल्द से जल्द एक्शन लें, इस तरह के वीडियो से उसकी इमेज खराब हो रही है। वो मानसिक और शारीरिक रूप से काफी परेशान है। उसके खिलाफ डाले गए वीडियो तुरंत हटाए जाएं और अकाउंट सस्पेंड किया जाएं। हैरान करने वाली बात तक ये है कि टीडी राकेश खुलकर पुलिस को चुनौती दे रहा है कि पुलिस भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकती है। आखिर इस हिम्मत के पीछे कौन है, जो सरेआम किसी की निजता को हनन करने के बाद भी उसके खिलाफ अब तक कोई कार्यवाही भी हुई।
दिल्ली के कृष्णा नगर में दलित युवक की हत्या
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके से है, जहां एक दलित कैब ड्राइवर को लूटने के इरादे से पहले उसे घेरा गया और जब उसने विरोध किया आरोपियों ने उसके गले पर चाकू से वार कर दिया। ये घटना 23 जुलाई को घटित हुई थी, जब कृष्णा नगर में रोड नंबर 57 पर मृतक विजय कुमार घायल अवस्था में अपनी मारुति वैगनआर कार में मिला था। आनन फानन ने उसे डॉ. हेडगेवार अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कृष्ण नगर पुलिस को जब उसकी जानकारी दी गई तो वो सकते में आ गई। तुरंत सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, और चार आरोपियों की पहचान हुई। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है लेकिन एक अब भी फरार है। वहीं इस मामले में भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी है साथ ही अब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी न होने को लेकर सवाल उठाये है।पीड़ित परिवार का हाल जानने के लिए खुद आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के कार्यकर्ता पहुंचे थे। फिलहाल पुलिस जांच कर रही है। हैरानी की बात है इस घटना के बाद दिल्ली सरकार में किसी भी एक व्यक्ति का कोई बयान नहीं आया है। जिसे देखकर लगता है कि दिल्ली में भी जातिवाद ने तेजी से पांव पसारना शुरू कर दिया है।
आजाद ने आगामी विधानसभा चुनाव में दिखाई गठबंधन की उम्मीद
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला आजाद समाज पार्टी की तैयारियों पर आसपा के मुखिया चंद्र शेखर के नए ऐलान हो लेकर है.. एक तरफ जहां उनकी कथित एक्स प्रेमिका रोहिणी घावरी बार बार आजाद पर बीजेपी का एजेंट होने का आरोप लगाती है तो वहीं आजाद ने अपने इरादे साफ करते हुए ऐलान किया है कि आगामी यूपी विधानसभा में सत्ता पर काबिज होने के लिए वो बीजेपी को छोड़ कर किसी भी पार्टी से गठबंधन करने को तैयार है। लेकिन वो बीजेपी को सत्ता से हटा कर ही दम लेंगे। आजाद ने कहा कि वो जानते है कि फिलहाल उनके लिए यूपी में अकेले सरकार बनाना आसान नहीं है इसलिए वो सपा, बसपा, कांग्रेस और किसी भी स्थानीय पार्टी से गठबंधन कर लेंगे.. उनका एक ही मकसद है कि दलित, पिछड़े और मुसलमानों वोटो का बिखराव बंद हो। हालांकि आजाद यूपी की सभी 403 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेंगे, जिसमे 45 क्षेत्रों के प्रभारियों की घोषणा भी की जा चुकी है। आजाद की लोकप्रियता यूपी में काफी बढ़ चुकी है, वहीं उनकी रैलियों में जमा होने वाली भीड़ बताती है कि आसपा यूपी में बहुत बड़ा बदलाव लाने वाली है.. लेकिन अच्छी बात ये है कि आजाद अन्य दलो की तरह हवा में नहीं उछल रहे है.. वो जमीनी हकीकत देखकर फैसला ले रहे है.. जो उनके एक बेहतरीन नेतृत्व की निशानी है। ऐसे में देखना ये होगा कि क्या आजाद के इस प्रस्ताव को विपक्षी दल स्वीकार करते है। आपको क्या लगता है क्या आजाद को गठबंधन की जरूरत पड़ेगी..



