Top 5 Dalit news: किसी भी कानून का निर्माण लोगो की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन यहाँ तो विडंबना ये है कि जब भी कोई नया कानून आता है तो उसका स्वागत करने के बजाय उसके लूपहोल खोजकर कानून को ही कमजोर कर दिया जाता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो सवाल खड़े करते है सरकारी व्यवस्था पर, जहां बाहरी तौर पर तो सब सामान ओर सामान्य है लेकिन जमीनी हकीकत से दूर है।
लखनऊ में दलित बीजेपी पार्षद ने बीजेपी को घेरा
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से है, जहां आगामी विधानसभा चुनावों से पहले चल रही उठापटक के बीच सत्तारूढ़ बीजेपी का दलित हितैषी होने का मुखौटा उतरने लगा है। ताजा मामला लखनऊ के सरोजनी नगर के दुसरे वार्ड से है, जहां के बीजेपी दलित पार्षद राम नरेश रावत ने पार्टी पर नगर निगम में पार्षद दल के अगम पदों पर एससीएसटी वर्ग के कैंडिडेट को इग्नोर करने का आरोप लगाया है। बीजेपी पार्षद ने खुद सोशल मीडिया पर बीजेपी की मिट्टी पालित करते हुए लिखा ही दलित पिछड़े हितैषी होने का दावा करते है, लेकिन जब उपनेता के पद का चुनाव होता है तो केवल सामान्य या अति पिछड़ी जाति से चुना जाता है और एससीएसटी वर्ग को treasurer या whip बना दिया जाता है। उन्होंने बीजेपी के हाईकमान से तीखे प्रश्न दागते हुए पूछा कि आखिर आजतक Municipal Corporation House में sc St वर्ग का कोई नेता क्यों नहीं चुना गया है। क्या बीजेपी हमें इस काबिल ही नहीं समझती कि हम उपनेता के पद को संभाल पाएंगे। बीजेपी पार्षद का इस तरह के नाजुक वक्त में सवाल उठना, जब बीजेपी समेत पूरा विपक्ष दलितों को मना रहा है, ऐसे में बीजेपी अपनी छवि सुधारने के लिए क्या कदम उठाती है ये देखने वाली बात होगी।
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में रेप पीड़िता की शादी
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला छत्तीसगढ़ के बस्तर का है। जहां प्यार का झांसा देखकर एक दलित युवती का यौन उत्पीड़न करना एक जातिवादी को काफी भारी पड़ा। ये मामला बस्तर के जगदलपुर का है। पीड़िता के साथ कई साल रिश्ते में रहने के बाद आरोपी शादी से मुकर गया था, बस फिर क्या था पीड़िता ने एससीएसटी कैस लगा दिया। पिछले सात महीनों से आरोपी जगदलपुर सेंट्रल जेल में था, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली इस वीडियो में आरोपी सुरेश सेठिया ने कोर्ट की अनुमति से पीड़िता मनमती कश्यप से जेल परिसर में ही हिंदू रीति-रिवाज से शादी कराई जा रही है। पुलिस के मुताबिक लड़की ने खुद समझौते की पेशकश रखी कि वो इसी शर्त पर केस वापिस लेगी जब आरोपी उससे शादी करेगा। जिसके बाद आरोपी ने सालों जेल की हवा खाने के बजाय शादी की शर्त मान ली। विडियो में दोनों को शादी के आउटफिट में देखा जा सकता है। जेल के कांस्टेबल ने ही लड़की का कन्यादान किया। शादी करने के बाद आगे का प्रोसेस करने के लिये आरोपी को फिर से जेल भेज दिया गया। इस घटना से ये तो साफ हो गया है कि अपराध करने के पहले भले ही आरोपी न सोचे, लेकिन उसके आउटकम से वो जरूर घबराते है।
चैन्नई में नीट पेपर को हमेशा के लिए कैंसिल करने के लिए आंदोलन
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के चेन्नई से है, जहां नीट पेपर लीक मामले में होने वाली देशव्यापी आंदोलन की लहर ने एक अलग रूप ले लिया है। नीट पेपर में पास न होने के कारण मेडिकल में दाखिला न मिलने से साल 2017 में खुदकुशी करने वाली छात्रा एस अनीता के भाई एस मणिरथिनम ने चैन्नई में इस आंदोलन का आगाज किया था..जो कि कोयंबेडु के थिरुवलियूर इल्लम में हो रहा है, लेकिन जहां शिक्षा मंत्री धमेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने और कड़े कानून बनने के बाद भी एस मणिरथिनम ने आंदोलन को रोका नही है। उन्होंने अब मांग की है कि नीट जैसी परिक्षाएं लाखों बच्चो का सपना तोड़ देती है.. जिसकी कीमत मेधावी छात्रो और उनके परिवार वालों को चुकानी पड़ती है.. इसलिए नीट की परिक्षाओं को बैन कर देना चाहिए..साथ ही 12वीं के नंबरो को देखकर ही मेडिकल कॉलेज एंट्रेंस इग्जाम का Evaluation करने की परमिशन मिलनी चाहिए। आपको बता दें कि एस अनिता ने साल 2017 में 12वी की परिक्षा में 98% मार्क्स लाने वाली अनिता अलियाल जिले के कुझमुर गांव की रहने वाली थी।12वी में इतने अच्छे नंबर लाने के बाद भी वो नीट परिक्षा पास नही कर सकी थी, जिससे उनका डॉक्टर बनने का सपना टूट गया था। अनिता ने नीट परिक्षा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी डाली थी.. लेकिन कोर्ट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली तो उन्होंने 1 सितंबर 2017 को सुसाइड कर लिया था। नीट पेपर लीक मामले में चल रहे इस आंदोलन में अमिता के भाई ने पेपर को हमेशा के लिए रद्द करने की बात की है.. क्या आपको भी लगता है नीट परिक्षा हमेशा के लिए रद्द हो।
दिल्ली के जंतर मंतर पर फिर प्रदर्शन शुरु
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली से है, जहां दिल्ली के जंतर मंतर पर फिर से सैकड़ो लोग जमा हो कर प्रदर्शन कर रहे है, लेकिन इस बार ये प्रदर्शन उन पीड़ित परिवारों ने शुरु किया है जिनके अपने सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दम तोड़ चुके है, लेकिन सरकार न तो मृतक के खबर लेती है और न ही पीड़ित परिवार की। आकड़ो की माने तो जनवरी 2021 से अब तक सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 593 मजदूरों की मौत हो चुकी है, लेकिन सरकारी आकड़ो में ये अब केवल 332 मौतों ही रिकॉर्ड की गई है। सफाई कर्मियों को बिना किसी सुरक्षा के टैंक में उतार कर सफाई करने पर मजबूर करने के खिलाफ सफाई कर्मचारी आंदोलन और उसके मुखिया बेजवाड़ा विल्सन पीड़ित परिवार समेत खुद सड़को पर उतर आये है। इस विरोध प्रदर्शन में करीब 10 राज्यों से लोगो ने हिस्सा लिया। ये लोग सरकार से अपील कर रहे है कि उनके अपनो की जान को इस तरह से खतरे में डालना बंद करें.. वो साथ ही जय भीम के नारे लगा रहे है। ये बेहद हैरानी की बात है कि आये दिन सफाई कर्मचारियों के टैंक में सफाई के दौरान मौत होने की खबरें आती है लेकिन बावजूद उसके उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किये जाते.. अब देखना ये होगा कि राज्य स्तर पर सफाई कर्मचारियों के इस प्रदर्शन के बाद क्या सरकार नींद से जागेगी।
यूपी के स्मार्ट सिटी नोएडा की घिनौनी तस्वीर आई सामने
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के नोएडा से है, जहां एक वाल्मिकी बस्ती की स्थिति देखकर आपको भी महसूस होगा कि हाइटेक नोएडा की अंदरूनी सच्चाई कितनी घिनौनी है, और सरकार के सारे दावे कितने खोखले है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है.. जो कि नोएडा के सेक्टर-78 का है.. जहां मौजूद है एक वाल्मिकी बस्ती.. जिसमें 400 परिवार रहते है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सरकार की अनदेखी के कारण पिछले 20 दिनो से न तो यहां बिजली आई है और न ही पानी की सुविधा पहुंची है। पीड़ित परिवार गंदे नालो के बीच से आने जाने के लिए मजबूर है.. इस पूरी दयनीय़ स्थिति को लेकर पीड़ितो ने अब तक कई बार जिला अधिकारी को भी संज्ञान भेजा है, लेकिन जानकारी होने के बाद भी कोई सुध नहीं ली गई.. कोई उनकी हालात पूछने तक नहीं पहुंचा। वाल्मिकी बस्ती की हालात को देखते हुए अब समाजिक कार्यकर्ताओं ने स्थानीय एमएलए और सीएम योगी आदित्यनाथ से सवाल पूछे है। अब देखना ये होगी कि सामाजिक कार्यकर्ताओं के इस मामले में पड़ने के बाद क्या पीड़ितो के दुखों का कोई तोड़ निकलेगा.. या स्मार्ट सिटी की आड़ में दलितों और वंचितों की स्थिति ऐसी ही दयनीय बनी रहेगी।



