Top 5 Dalit news: वैसे तो जब भी किसी के साथ कोई घटना होती है तो वहां जाति धर्म की दीवार आ ही जाती है, लेकिन अगर वो अपराध किसी दलित के साथ होता है तो आखिर क्यों उसे प्रशासन भी अनदेखी करने से पीछे नहीं हटती है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो बार-बार एक ही सवाल कर रहे है कि क्या दलितों का जीवन इतना सस्ता है, जिनकी परवाह मनुवादी तो छोड़िए कानून भी नहीं करता।
कर्नाटक में शौच के लिए हुए दलित लड़की की हत्या
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला कर्नाटक के रायचूर जिले है, जहां शाम के वक्त शौच के लिए गई एक दलित महिला को न केवल अपनी हवश का शिकार बनाया गया, बल्कि वो किसी के आगे मुंह न खोले, इसलिए उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। ये घटना रायचूर के सिरवार तालुका के होकरानी गांव का है। 21 साल की अश्विनी तिम्मारेड्डी 19 अगस्त की शाम के समय शौच के लिए निकली थी लेकिन जब वो काफी देर तक नहीं लौटी तो परिजनों को उसकी चिंता हुई। इन लोगों ने तुरंत उसे खोजना शुरू किया। कई घंटों की खोजबीन के बाद 20 अगस्त की सुबह अश्विनी का शव एक कुएं से बरामद किया गया। जहां उसे निकाल कर तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक उसने दम तोड़ दिया था। लड़की की हालत देख कर अंदाजा लगाया गया कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ है और उसकी हत्या के दी गई। इस घटना से पूरे गांव में सनसनी फैली हुई है। वहीं पुलिस ने कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया है और पूछताछ जारी है, साथ ही मृतका की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पुष्टि होगी कि उसका दुष्कर्म हुआ है या गैंगरेप। फिलहाल पुलिस जांच कर रही है।
लखनऊ में दलित विधायक के साथ भेदभाव
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से है जहां जिस दलित विधायक ने अपने पैसे खर्च कर मंदिर बनवाया, उसे ही जातिवादी आतंकियों ने मंदिर में प्रवेश ही नहीं करने दिया। हैरान कर देने वाली ये घटना लखनऊ के काकोरी सीट से विधायक जय देवी कौशल के साथ हुई है। दरअसल काकोरी की विधायक ने लोगों के आग्रह पर करीब 78 लाख रुपए खर्च करके वहां शीतला देवी मंदिर का भव्य निर्माण कराया था। मंदिर बनने के बाद उसके उद्घाटन समारोह में वो खुद कई बीजेपी के पदाधिकारियों के साथ पहुंची थी, लेकिन हैरानी की बात है वहां सारे काम पण्डित ने खुद किए, उन्हें न तो पूजा करने के लिए कहा गया और न ही आरती के लिए, जो साफ जाहिर है कि उनके साथ जातिगत भेदभाव के कारण ही किया गया है। इस घटना से विधायक के पति और पूर्व सेंट्रल मिनिस्टर कौशल किशोर के भी अपनी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि जय देवी ने दो मंदिरों को बनवाने के लिए 70 और 78 लाख रुपए की मंजूरी दिलवाई , लेकिन उनके साथ ही केवल दलित होने पर ऐसा व्यवहार किया गया, जो कि बिल्कुल भी स्वीकार योग्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मंदिरों पर एकाधिकार रखना चाहते है, इसलिए भेदभाव को आज भी बढ़ावा दे रहे है। उन्होंने इस मामले में हाई कमान तक ले जाने की बात की है। अब देखना ये होगा कि मामले के तूल पकड़ने के बाद सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आती है।
रोहिणी घावरी ने आजाद समाज पार्टी को खत्म करने की खाई कसम
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद की कथित एक्स गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी को लेकर है। जहां आजाद समाज पार्टी में फूट पड़ने और हाथरस प्रभारी और पूर्व ips ऑफिसर आदित्य प्रकाश वर्मा के अचानक इस्तीफा देने की खबर कर चुटकी लेती नजर आ रही है, साथ ही एक और प्रमुख के इस्तीफ़ा देने की भविष्वाणी करती नजर आ रही है। घावरी ने आसपा को अनपढ़ गवारों की पार्टी कहते हुए कहा कि इन गंवारो के बीच पढ़े लिखे और सभ्य लोग रह ही नहीं सकते है। घावरी ने बीजेपी छोड़कर इसी साल जून में आसपा ज्वॉइन करने वाले पूर्व एडीजी और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रेम प्रकाश के भी जल्द इस्तीफा देने की बात कही है। घावरी ने कहा कि वो आसपा को पूरी तरह से बर्बाद कर देगी…घावरी ने ये भी खुलासा किया कि जिन कार्यकर्ताओं के पास दस हजार की नौकरी नहीं है उनके पास लाखों की कार कहां से आ गई। साफ दिख रहा है कि सांसद की छत्रछाया में कितनी घपलेबाजी हुई है। इसी के साथ घावरी ने अपनी पार्टी को लेकर भी इशारो इशारों में बता दिया है। मतलब बात साफ है कि आसपा सुप्रीमो को एक और कंपटीटर का सामना करना पड़ेगा। अब देखन ये होगा कि घावरी इंडिया वापिस कब आती है।
मेरठ में सार्वजनिक बैंच पर बैठने कर प्रताड़ित
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के मेरठ से है, जहां एक सार्वजनिक बैंच पर बैठने को लेकर दलित युवक को न केवल जातिसूचक गालियां दी गई बल्कि विरोध करने पर उसके साथ बुरी तरह से मारपीट भी की गई। ये घटना मेरठ के भावनपुर थाना क्षेत्र के छिलोरा गांव की है। पीड़ित प्रदीप प्रिंसेपुर गांव का रहने वाला है और शाम के समय घूमते घूमते छिलोरा गांव में एक सार्वजनिक पार्क में चला गया, जहां वो एक सार्वजनिक बैंच पर थोड़ी देर सुस्ताने के लिए बैठा था लेकिन तभी कुछ जातिवादी आतंकियों ने वहां आकर प्रदीप को जातिगत गालियां देनी शुरू कर दी। प्रदीप ने इसका विरोध किया और पार्क से जाने की बात की, लेकिन दबंगों ने उसकी बात सुनने के बजाय के उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। जिससे उसे काफी गंभीर चोट आई है। इस घटना की जानकारी जब पीड़ित के गांव में लगी तो ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर चला गया। उन लोगों ने भावनपुर थाने को घेरते हुआ आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द कार्यवाही करने की मांग की है। अगर पुलिस ने जल्द आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो वो उच्च अधिकारियों के कार्यालय के बाहर धरना देंगे। अब देखना ये होगा कि दलित समाज की एकजुटता के बाद ये मामला क्या नया मोड़ लेता है।
उदयपुर में दलित पत्रकार पर हमला
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के उदयपुर से है, जहां दलित जाति से आने वाले गरीब ही जातिगत भेदभाव का शिकार नहीं होते बल्कि उनकी आवाज उठाने वाले दलित पत्रकारों के साथ भी जानवरों की तरह व्यवहार किया जाता है। ये मामला उदयपुर के गोगुंडा के जसवंतगढ़ का है, जहां दलित पत्रकार लखन साल्वी जो कि एक स्वतंत्र पत्रकार है, उन्होंने जसवंतगढ़ के लोगों की आवाज उठाने और उनसे जुड़ी समस्याओं को लेकर लोगों के साथ मिलकर डीएम को ज्ञापन सौंपने गए थे, लेकिन तभी गोपाल लोढ़ा नाम का व्यक्ति वहां आ पहुंचा, उसने लखन को जातिगत अपमानित करना शुरू कर दिया। उसे बार बार नीच बुलाते हुए उपर किसी नुकीली चीज से हमला कर दिया। जिससे वो बुरी तरह से घायल हो गया, लेकिन आरोपी को इतने से भी सुकून नहीं मिला, उसने इलाज के दौरान भी आरोपी पर हमला कर दिया था। इस घटना की जानकारी पुलिस को दी गई है, जिसके बाद आरोपी के खिलाफ मामल दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अब देखना ये होगा कि यहां जाति का रसूख चलता है या संविधान का कानून।



