Who is Priyank Kharge: पिछले दिनों कट्टरवादी राष्ट्रवादी हिंदू संगठन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की कार्यशैली और विचारधारा पर तीखे सवाल उठा कर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे काफी विवादों में घिर गए थे। यहां तक कि खरगे के खिलाफ आरएसएस मानहानि का मामला दर्ज करा दिया औऱ स्थानीय अदालत ने खरगे के खिलाफ अपराधिक मानहानि मामले में नोटिस भेज दिया, जिसके बाद खरगे को 21 जुलाई को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। वहीं बीजेपी भी लगातार प्रियांक खरगे को निशाना बना रही है। अब सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या कह दिया प्रियांक खरगे ने .. जिसके कारण वो बीजेपी औऱ आरएसएस के निशाने पर आ गए है।
आरएसएस के मामले में सरकार पारदर्शी क्यों नहीं
दरअसल प्रियांक खरगे ने अभी हाल ही में आरएसएस के पंजीकरण पर सवाल खड़े कर दिये है, उन्होनें कहा कि जो संगठन समाज को हिंदूत्व औऱ नियमो का पालन करने की सीख देती है असल में वो खुद की संविधान के अनुसार पंजीकृत नहीं है.. यहां तक कि आरएसएस को होने वाली फंडिग, उनकी आय व्यय, उसकी संपत्तियों के बारे में भी कोई ब्यौरा इतने सालों में कभी भी जनका के बीच सार्वजनिक नहीं किया गया है। उसे कहां से पैसा मिलता है, और इतना बड़ी संस्था कैसे कार्य कर रही है क्या इसका ब्यौरा सरकार के पास नहीं होना चाहिए। आरएसएस के मामले में सरकार पारदर्शी क्यों नहीं है। आरएसएस बाकि के संस्थानो की तरह न तो टैक्स की जानकारी देता है और न ही संविधान के दायरे में जवाबदेह होकर काम करती है।
आरएसएस सरकार से कोई फंड क्यों नहीं लेती?
प्रियांक खरगे ने कहा कि आरएसएस के हर राज्यों में सभी संस्थानों को सरकारी सुरक्षा देने की बात सामने आई है, तो बतौर गृहमंत्री ये जानना उनका अधिकार है कि आरएसएस के पास कितना पैसा है, कितना जनसमर्थन है। और जो सुरक्षा सरकार मुहैया करा रही है आखिर वो किसे करा रही है। वहीं प्रियांक खरगे के सवालो के जवाब में प्रमुख मोहन भागवत ने सीझा जवाब दिया कि हिंदू धर्म कौन सा पंजीकृत है, फिर भी लोगो का विश्वास है, वैसे भी आरएसएस हिंदू धर्म कर सिमित नहीं है.. इसे पंजीकरण की जरूरत नहीं है क्योंकि आरएसएस सरकार से कोई फंड नहीं लेती है। मोहन भागवत के इस बयान के बाद आरएसएस को लेकर दो धड़ा बंट गया है.. वहीं प्रियांग खरगे के कांग्रेस से होने को लेकर भी ये विवाद काफी बढ़ गया है।
कौन है प्रियांक खरगे – Who is Priyank Kharge?
कांग्रेस पार्टी के एक दलित कद्दावर नेता और वर्तमान में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे है प्रियांक खरगे। जन्म 22 नवंबर 1978 को कर्नाटक के कलबुर्गी, जो कि उनके पिता का पैतृक गांव है, वहीं जन्मे थे प्रियांक खरगे। उनकी माता का नाम राधाबाई खरगे है। प्रियांग खरगे ने बचपन से घर में राजनीति वाला माहौल देखा था औऱ उनकी भी रूचि राजनीति में आने की थी, लेकिन 1998 में मल्लेश्वरम के एमईएस कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई करने तक वो पिता की इच्छा के अनुसार राजनीति गतिविधियों से दूर रहा करते थे।
जिसके बाद ही उन्होंने उसी साल 1998 में उन्होंने एनएसयूआई कॉलेज में नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) को जॉइन कर एक कार्यकर्ता के रूप मे काम शुरु कर दिया। एक कद्दावर नेता के बेटे होने के कारण राजनीति की एबीसी से वो पहले ही वाकिफ थे, जल्द ही वो लोकप्रिय होने लगे औऱ 1999 में वे एनएसयूआई कॉलेज के महासचिव बने।
एनएसयूआई के राज्य महासचिव के रूप में चुना गया
राजनीति में उनकी जगह पक्की हो गई थी, और उनके प्रभाव के कारण उन्हें 2001 में एनएसयूआई के राज्य महासचिव के रूप में चुना गया। ये पद उनके कॉलेज की बाहर की राजनीति के लिए मील का पत्थर थी, इस पद को उन्होंने बखूबी 2005 तक संभाला। जिसके बाद उनका औहदा बढ़ता ही गया औऱ 2005 से 2007 तक कर्नाटक प्रदेश युवा कांग्रेस के सचिव चुने गए और 2007 से 2011 तक महासचिव चुने गए। हालांकि छात्र राजनीति में अपना इतना नाम कमाने वाले प्रियांग खरगे जब असली राजनीति में उतरे तो उन्हें समझ आया कि यहां आगे बढ़ना आसान नहीं है। कांटो के डगर पर चलना ही होगा, केवल पिता का नाम रियल राजनीति का बादशाह नहीं बना सकता।
2011 में कर्नाटक प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष चुना गया
प्रियांक को पहली बार हार का स्वाद मिला साल 2009 में, जब कर्नाटक विधानसभा उपचुनाव में चित्तपुर से पहली बार वो चुनावी राजनीति में खड़े हुए थे, लेकिन बीजेपी के वाल्मीकि नायक से हार गए थे। लेकिन फिर भी कांग्रेस ने अपना भरोसा प्रियांगॉक पर बनायें रखा, और उन्हें 2011 में कर्नाटक प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष चुना गया था। लेकिन 2013 में उन्हें फिर से चित्तपुर सीट से लड़ने का मौका मिला और इस बार उन्होंने जीत का स्वाद चखा और कर्नाटक के विधानसभा के सदस्य चुने गए।
जिसके बाद 2016 में प्रियांक को बड़ा मौका मिला और तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंत्रिमंडल में सूचना प्रौद्योगिकी, संचार प्रौद्योगिकी और पर्यटन मंत्री बनने का मौका मिला। आपको जानकर हैरानी होगी कि वो अपने कैबिनेट में सबसे कम उम्र के मंत्री थे। मंत्री बनने के तुरंत बाद खरगे ने एक स्टार्टअप बूस्टर किट की शुरूआत की, जिसमें मेंटर, क्लाउड क्रेडिट और इनक्यूबेटर जैसी तमाम सुविधाये आसानी से मिल सकें। साथ ही कर्नाटक में छोटे टेक उदयोगो को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने बेंगलुरु टेक समिट की शुरुआत की थी।
सरकार से मिला कल्याण मंत्री का पद
2016 के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा, 2018 में उन्हें फिर से चित्तपुर विधानसभा से जीत हासिल हुई औऱ इस बार उन्हें एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व वाली कांग्रेस-जेडी(एस) के गठबंधन वाली सरकार में भी सामाजिक कल्याण मंत्री का पद दिया गया। उनके किये गए कामो के कारणं ही वो जनता में काफी लोकप्रिय हुए औऱ 2023 के विधानसभा चुनावों में एक बार फिर से चितपुर सीट पर हैट्रिक लगाई और बीजेपी के मणिकांत राठौड़ के खिलाफ जीत हासिल की।
इस बार बाकि के विभागो के साथ साथ उन्हें ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग भी दे दिया गया, लेकिन 2026 में जब सरकार बदली तो उन्हें कैबिनेट में गृह मंत्रालय मिला, लेकिन हैरानी की बात है कि खुफिया विभाग की शक्ति उनके हाथों में नहीं दी गई। मगर पुराने विभाग अब भी उनके पास है।
कर्नाटक की राजनीति में काफी लोकप्रिय चेहरा
खरगे कर्नाटक की राजनीति में काफी लोकप्रिय और ताकतवर चेहरा है। जो पूरी तरह से अंबेडकरवादी है औऱ बौद्ध धर्म को मानते है। उन्होंने कर्नाटक के ग्रामी इलाकों में सामाजिक समता और सबको समान अधिकार देने के लिए कई कदम उठाये है। धर्म और जाति के नाम पर बांटने वाली आरएसएस के खिलाफ आवाज उठाना उनकी इसी विचारधारा का हिस्सा है। उन्होंने बिना डरे कहा कि वो अपने सवालो पर अडिग रहेंगे, आरएसएस बिना पंजीकृत एक संस्था है, जो करोड़ो लोगो को काबू कर रही है जबकि उनकी उनकी नीतियां पूरी तरह से गलत और गैरकानूनी है। खरगे ने सीधा कहा है कि वो इसके लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ेगें। अब देखना ये होगा कि प्रियंका खरगे के सवाल उठाने के बाद क्या आरएसएस के पंजीकरण को लेकर कोई कदम उठाया जायेगा।



