Top 5 Dalit news: न तो कभी भेदभाव मिटेगा और न ही कभी उत्पीड़न कम होगा.. जी हां, दलितो की स्थिति में शायद कभी सुधार होगा ही नहीं, क्योंकि दलितो को तो हमेशा पैर की जूती समझने की मानसिकता का अंत जब तक नहीं होगा तब तक समाज का कुछ नही हो सकता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो ये दिखाती है कि कैसे दलित हमेशा दलित ही रहेंगे,., चाहे वो कितना भी शिक्षित हो, सभ्य हो, लेकिन जातिगत भेदभाव से कभी नहीं बच सकते है।
जातिगत रंजिश के शिकार मेवालाल पासी के परिवार से मिले
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जो 28 जून को जातिवादी आतंकियों की मानसिकता का शिकार हुए मेवालाल पासी के घर उनके परिवार से मिलने पहुंचे है। जहां जाने की खबर सुनकर ही पूरा जन सैलाब उन्हें सपोर्ट करने पहुंच गया। इस दौरान आजाद ने पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद करने के साथ साथ घर की बेटी की शादी की जिम्मेदारी भी ले ली है। बता दें कि ये मामला उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले की सलोन के खेमराई गांव का है, 28 जून 2026 को गांव के जातिवादियों ने पुरानी रंजिश के चलते मेवालाल पासी पर कई बार गाड़ी चढ़ा कर निर्मम हत्या कर दी थी। लेकिन हैरानी की बात थी कि पुलिस इसे सड़क हादसा बता कर मामले को कमजोर करने की कोशिश में लगी थी।
यहां तक कि पीड़ित परिवार के बार बार अर्जी करने पर भी एफआईआर दर्ज नहीं की गई और न कोई कार्रवाई की गई..इस दौरान वहां भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी पहुंच गए और पासी समाज के साथ प्रशासन की लापरवाही के खिलाफ धरने पर बैठ गए..जिसके बाद पुलिस ने उल्टा उनके खिलाफ ही शांति भंग करने का मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी। जिसके बाद 3 जुलाई को आजाद ने पीड़ित परिवार से बात कर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया था और अपने वादे के मुताबिक वो 7 जुलाई को रायबरेली पहुंचे मेवालाल पासी के परिजनों से मिलने।
वहीं इस मामले में बढ़ती राजनीति को देखते हुए सरकार की तरफ से भी मेवालाल पासी के परिवार को 1 लाख रूपय की आर्थिक सहायता के साथ साथ 1 बीघा खेती भूमि का पट्टा, और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 2 बच्चों को हर महीने 2500 रूपय की राशी से मदद की गई है। साथ ही भविष्य में 5 लाख रूपय की और सहायता राशी दी जायेगी। केवल आजाद के जाने मात्र से न केवल प्रशासन जाग गई बल्कि सरकार भी चौकन्नी हो गई है। जरा सोचिये अगर वो सत्ता में हो तो क्या बदलाव आयेंगे।
मध्य प्रदेश में दलितों और आदिवासियों की स्थिति दयनीय
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश से है, जहां बीते 3 सालो में दलितो के साथ होने वाले अपराधों में आये तेजी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जी, जहां सरकार दलितो के लिए न्याय और विकास की बात करती है वहीं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने लोकसभा में एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें ये सनसनीखेज खुलासा किया गया है कि 2023 में मध्य प्रदेश जहां दलित उत्पीड़न के मामले में टॉप 3 राज्यों में से एक था वहीं वहां आदिवासियों की स्थिति भी बेहद खराब है। खासकर राज्य के सागर और ग्वालियर जिले में सबसे ज्यादा दलित औऱ आदिवासियों के उत्पीड़न के मामले आये। इस रिपोर्ट में 2021 से लेकर 2023 के आकड़े पेश किये गए है।
जिसमें सबसे बुरी स्थिति सागर जिले की है। जहां 2021 में 509 मामले दर्ज किये गए थे वहीं 2023 में ये बढ़ 666 हो गया है। वहीं आदिवासियों के खिलाफ छिंदवाड़ा में सबसे ज्यादा मामले सामने आये है। साल 2023 में राज्य में 2,858 मामले आदिवासियों के उत्पीड़न के दर्ज हुए थे। जहां 2021 में 82 मामले थे वहीं 2023 में 149 हो गए। ये आकड़े बताते है कि सरकार दलितों और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने में पूरी तरह से असफल साबित हुई है। वहीं पुलिस भी अपना काम काफी धीमी गति से कर रही है, जिसने वहां की कानून व्यवस्था को सवालो के घेरे में पहुंचा दिया है। ऐसे में देखना ये होगा कि मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन पर उठ रहे लगातार सवालों के बाद क्या जवाब आता है सरकार का.. क्या अब भी कोई नया बहाना बाकी है।
तमिलनाडु में एक दलित पत्रकार के साथ मारपीट
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के विल्लुपुरम से है, जहां एक दलित पत्रकार पर पुरानी रंजिश को लेकर गांव के मनुवादी आतंकियो ने हिंसक झगड़ा किया औऱ उसके परिवार पर बुरी तरह से हमला किया था, जिसमें एक गर्भवति महिला भी थी.. लेकिन हैरानी की बात है कि मामला दर्ज कराने के बाद भी मुख्यआरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहा है। ये मामला विल्लुपुरम के पास वी सीतामुर गांव का है, जहां 22 जून को एक निजी मीडिया चैनल में रिपोर्टर और उसके परिवार पर जातिगत हमला किया गया था, लेकिन पुलिस 15 दिन से भी ज्यादा बीतने के बाद भी मुख्य आरोपी को बचा रही है। पीड़िता ने बताया कि ये रंजिश 2023 में शुरु हुई जब पीड़िता के घर से 2 बाइक चोरी हो गई थी, उसने दो संदिग्ध भाई ई. रघु और ई. अंबु पर शक जताया था।
जिसके बाद पुलिस ने पूछताछ शुरु की तो पता चला कि दोनो बाइक चोरी मामले में काफी सक्रिय है औऱ दोनो के पास से 15 बाइक और दो ट्रैक्टर बरामद किये थे, मगर पीड़िता की बाइक नहीं मिली.. लेकिन करीब 3 साल बीतने के बाद अचानक 22 जून को ई. अंबु और उसके साथ ने पीड़िता के घर के बाहर उसके भाई की एस संजू से कहासुनी शुरु कर दी, लेकिन जब उसने ऐसा न करने को कहा तो वो लोग तब चले गए लेकिन थोड़ी देर बाद फिर से वो अपने कई साथियों के साथ आया और एस संजू को जातिसूचक गालियां देना लगा। जब पीड़ित परिवार ने उनका विरोध किया तो हमलावरो ने सब पर हमला कर दिया। ये पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर् हुई है। 23 जून को अरकंदनल्लूर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी तो पुलिस ने आनन फानन में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया लेकिन अभी तक मुख्य आरोपी रघु, अंबु फरार है, जिसमें पुलिस की मिली भगत भी शामिल है। पीड़ित परिवार के इस खुलासे के बाद ये तो साफ हो गया कि पुलिस लापहवाही कर रही है, ऐसे में उन्हें न्याय मिलने के आसार भी कम नजर आ रहे है। ऐसे में देखना ये होगा कि मामला मीडिया में आने के बाद क्या रंग लेता है।
भदोही में सार्वजनिक बर्तन से पानी पीने पर दलित को किया अपमानित
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के भदोही से है, जहां एक क्लिनिक के बाहर दवा खाने के लिए एक दलित व्यक्ति ने बाहर रखे बर्तन से पानी लेकर क्या पी लिया.. जातिवादियों को ये जरा भी पसंद नहीं आया। उन लोगो ने पीड़ित को न केवल जाचिसूचक गालियां देकर अपमानित किया, बल्कि हमला करके जान से मारने कू धमकी भी दी। ये घटना 23 को घटित हुई थी, जब भोला गौतम अपने सहकर्मी ओम प्रकाश विश्वकर्मा के साथ पैंट का काम खत्म करके लौट रहा था।
उसके सिर में बहुत दर्द था तो उसने एक क्लिनिक के बगल से दवा की दुकान से दवा ली, बाहर रखे बर्तन से ही पानी ले लिया, लेकिन ये देखकर मेडीकल स्टोर का मालिक सुभाष बिंद उसे जातिसूचक गालियां देने लगा, उसके साथ मारपीट की और उसे जान से मारने की धमकी दी। भोला गौतम को काफी गंभीर चोटे आई, और उसे वाराणसी के अस्पताल में 12 दिनों तक भर्ती रहना पड़ा, जिसेक बाद उसने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शुभम अग्रवाल ने बताया कि पीड़ित की तहरीर पर 6 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई और अगले ही दिन सुभाष और उसके एक साथी को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही मामले की आगे की जांच जारी है।
श्रीगंगानगर में छेड़छाड़ का विरोध करने पर हत्या
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के श्रीगंगानगर से है, जहां एक दलित युवक को घर की बेटी के साथ हुई छेड़छाड़ के खिलाफ मामला दर्ज कराना इतना भारी पड़ी कि उसने उसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाई है। ये मामला श्रीगंगानगर जिले के श्रीकरणपुर कस्बे में शनि मंदिर के पास घटित हुई थी, 3 जुलाई को मंदिर के पास दो युवको पर चाकू से हमला कर दिया गया था, जिसमें से एक युवक चरणजीत सिंह की इलाज के दौरान 4 जुलाई को मौत हो गई। इस मौत के बाद परिजनो में काफी रोष है..वहीं एसपी ने मामले में हुई लापरवाही के लिए एसआई माला सिंह को सस्पेंड कर दिया है। पुलिस की कार्यवाई में पता चला कि हमले के दो दिन पहले ही चरणजीत सिंह ने एक युवक के खिलाफ उसके घर की बेटी के साथ छेड़छाड़ करने का मामला दर्ज कराया था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्यवाई नहीं की।
वहीं इस शिकायत से नाराज आरोपी ने चरणजीत सिंह औऱ शिवराज पर चाकू से हमला कर दिया था। पीड़ित परिवार ने थाने का घेराव करते हुए कहा कि अगर पुलिस समय रहते कार्यवाही करती तो उन्हें अपना बच्चा नहीं खोना पड़ता। जिला प्रमुख दुलाराम मेघवाल की अर्जी के बाद बीकानेर रेंज आईजी ने कार्यवाई की है। हालांकि अभी तक आरोपी की गिरफ्तार नहीं किया गया है। अब देखना ये होगा कि पुलिस की लापरवाही कब तक चलती है और कब तक आरोपी गिरफ्त में नहीं आता है।



