Agra: हाल ही में उत्तर प्रदेश के आगरा से विवादित मामला सामने आया है। जहां दलित समुदाय (Dalit community) की गांव के दूसरे पारंपरिक रास्ते से बारात निकालने को लेकर गांव के जातिवादियों ने जमकर हंगामा किया.. विरोध के कारण बाराती काफी नाराज हो गए.. हालांकि इससे पहले ही हालात हिंसक होते, लड़कीवालो ने सूझबूझ से पुलिस को बुलाया औऱ करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद शांति से बारात निकाली गई।
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बारात निकले पर जातिवादियो का विरोध
दरअसल, यह मामला आगरा के फतेहाबाद (Fatehabad) में थाना निबोहरा (Nibohra Police Station) क्षेत्र के गांव रामपुर (Rampur) का है, जहां गुरचरण सिंह वाल्मीकि की बेटी जसोदा की शादी थी, बारात तय समय पर गांव में आने वाली थी लेकिन तभी खबर मिली की जिस रास्ते से बारात आनी थी, वहां किसी की मौत हो गई है तो रास्ते को बदल दिया जाये, लेकिन जब बारात दूसरे रास्ते से निकलने लगी तो कुछ जातिवादियों ने इसका विरोध शुरु कर दिया।
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पुलिस की मदद से शादी हुई संपन्न
इससे पहले की मामला और बिगड़ता, पुलिस ने आकर संभाल लिया.. और किसी तरह से शांति स्थापित कर बारात को निकाला.. जब तक शादी संपन्न नही हुई तक पुलिस बल वहीं तैनात रही। पुलिस की सतर्कता को लेकर दुल्हन के परिवारवालों ने उनका शुक्रिया अदा किया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर जो सड़क सबके लिए है, उस पर दलितों के लिए इतनी पाबंदियां क्यों है, अब देखना ये होगा कि शादी तो हो गई लेकिन अब दलित परिवार के साथ किसी तरह का अन्नाय न हो। वही पुलिस ने इस मामले को पीड़ित परिवार हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
इसके अलवा आपको बता दें, ये कोई पहला मामला नहीं है, जब दलित की बारात पर जातिवादी दबंगों ने हमला किया है। जिसमे कई दुल्हे को अपमानित कर उसे घोड़ी से उतरा गया है। उसके साथ मारपीट की गयी है, इतना ही नहीं बारात में अन्य बरातियो भी हमला किया गया है। इन सबके बाद भी यही सवाल है कि आखिर कब सरकार नींद से जागेगी और कब दलितों के साथ न्याय होगा?



