समस्तीपुर से लगातार सांसद रहने वाले Ram Chandra Paswan, जानिए उनका पूरा जीवन परिचय

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Ram Chandra Paswan: यूपी के अयोध्या के श्रीराम और लक्ष्मण की कथायें तो आपने बहुत सुनी होगी लेकिन एक राम लक्ष्मण बिहार की धरती पर भी हुए.. जहां लक्ष्मण के जाने से राम को ऐसा झटका लगा कि वो एक साल भी नहीं जी सकें.. एक पिता की तरह अपने छोटे भाई को ट्रीट करना सबके बस की बात नहीं होती, लेकिन भारतीय राजनीति के मौसम वैज्ञानिक बिहार में दलित राजनीति को  नए आयाम तक पहुंचाने वाले रामविलास पासवान ने अपने करीब 15 साल छोटे भाई राम चंद्र पासवान को न केवल एक पिता की तरह पाला, बल्कि राजनीति में लाने औऱ सामाजिक सेवा से भी जोड़ा.. दलितों और पिछड़ो के लिए अपनी लड़ाई में ये दोनो भाई राम लक्ष्मण की ही तरह थे, जिन्हों जातिवाद नाम के राक्षक से अपने लोगो की रक्षा करने की कसम खाई और ताउम्र उनके लिए लड़ते हुए दुनिया चले गए। अपने इस वीडियो में हम बात करेंगे इस जोड़ी के लक्ष्मण की.. जिन्होंने हमेशा अपने भाई की ढाल बनकर उनका राजनैतिक ओहदा बढ़ाया।

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जानें कौन है राम चंद्र पासवान – Ram Chandra Paswan

1 जनवरी 1962 को खगड़िया जिले के शहरबन्नी गांव में एक दलित परिवार में श्री जामुन पासवान और सिया पासवान के यहां चौथे बेटे का जन्म हुआ। परिवार में खुशियों का माहौल था, एक गरीब और किसान परिवार होने के कारण घर में सारी सुख सुविधायें नहीं थी, लेकिन राम चंद्र पासवान अपने दूसरे भाई जो कि उनसे 15 साल बड़े थे, उनके बहुत लाडले थे। पूरा परिवार के कच्चे घर मे रहता था.. राम चंद्र अपने परिवार को बचपन से अभावों में जीते हुए देख रहे थे। लेकिन उसी के साथ उन्होंने अपने भाईयो का हौसला भी देखा.. उन्होंने धीरे धीरे समझा कि जबतक वो साथ है सब संभव है। रामचंद्र पासवान ने साल 1978 में खगड़िया के ही पी. डब्ल्यू. हाई स्कूल (P.W. High School से अपनी मैट्रिक (10वीं) परिक्षा पास की, लेकिन जब तक उन्होनें मैट्रिक दी तब तक उनके भाई राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत बनाने लगे। उन्हें लगा कि अगर अपने समाज की स्थिति सुंधारनी है तो भाई के रास्ते पर चलना बेहतर होगा। हालांकि बावजूद इसके उनके भाई चाहते थे कि वो आगे कि पढ़ाई जारी रखें, लेकिन राम चंद्र अपना फैसला कर चुके थे।

जमीन से जुड़े नेता थे रामचंद्र पासवान

छोटी सी उम्र से ही उन्होंने बिहार की दलित जनता के लिए सामाजिक न्याय और बराबरी की लड़ाई शुरु कर दी थी। उनके य़े काम उनके भाई के लिए काफी फायदेमंद साबित होते औऱ राम चंद्र पासवान की भी राजनितिक जमीन मजबूत होने लगी थी। वो सामाजिक कार्यो के साथ साथ अपनी पारीवारिक जिम्मेदारियां भी निभा रहे थे। सुनीता देवी से उनकी शादी हुई थी और उनके तीन बच्चे भी है जिसमें उनके एक बेटे प्रिंस राज पासवान भी राजनीति में सक्रिय है। अपने चुनावी हलफनामें में उन्होंने बताया कि वो सामाजिक कार्यो के साथ साथ अपने पैतृक कार्य किसानी करते थे। लेकिन जब जनता दल कमजोर होनी शुरु हुई तो रामविलास पासवान को अहसास हुआ कि अब जनता दल की परछाई से निकल जाना चाहिए.. लेकिन उससे पहले उन्हें अपनी सैना और सेनापति तैयार करना था। उन्होंने राम चंद्र पासवान को राजनीति में आने का न्यौता दिया। भाई का आदेश सिर आंखो पर.. उतर गए चुनावी मैदान में और साल 1998 में  खगड़िया को-ऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष के चुनाव में विजयी हुए.. ये उनकी जीत की शुरुआत थी, और उद्घोषणा भी कि बिहार की राजनीति में नए धुंरधर की एंट्री हो रही है।

समस्तीपुर से पहली बार लड़ा चुनाव

खासकर 1999 में पूर्व समस्तीपुर जिला के रोसड़ा सुरक्षित सीट से पहली बार चुनाव लड़ने उतरे रामचंद्र ने अपने प्रतिद्वंदियों को पटखनी दी थी। लेकिन साल 2000 में रामविलास पासवान ने जनता दल से अलग होकर लोकजनशक्ति पार्टी का गठन किया। उस दौरान राम चंद्र पासवान ने बिना कुछ सोचे भाई का ही हाथ पकड़ कर चलना शुरु कर दिया.. उनकी इस डेडीकेशन ने उन्हें और लोकप्रिय बना दिया..वहीं उनके भाई ने उनपर पर बिहार के दलित युवाओं को साधने की जिम्मेदारी देते हुए उन्हें लोजपा के यूथ विंग दलित सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। वहीं जब 2004 में फिर से लोकसभा चुनाव हुए तो भी उनकी जीत हुई.. हालांकि 2009 में उनकी हार हुई थी, लेकिन 2014 और 2019 में उन्होंने फिर से अपनी दावेदारी पक्की करते हुए जीत हासिल की थी।

हार्ट अटैक से रामचंद्र पासवान मौत

उनके रहते हुए लोजपा बेहद ताकतवर और एकजुट थी, लेकिन 21 जुलाई 2019 को अचानक उन्हें हार्ट अटैक आया और दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उनकी मौत गई.. राम चंद्र की मौत ने केवल के लिए लोजपा के लिए बल्कि उनके बड़े भाई रामविलास पासवान को भी बड़ा सदमा पहुंचाया था। वो ज्यादा बीमार हो गए थे.. 2020 में जिसके कारण उनकी हार्ट की सर्जरी कराई गई थी, और वो कई हफ्तो तक अस्पताल में भर्ती भी थे, लेकिन 8 अक्टूबर 2020 को उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई.. जिसके बाद लोजपा पूरी तरह से बिखर गई.. रामचंद्र भले ही रामविलास पासवान से उम्र में काफी छोटे थे, लकिन रामविलास पासवान जानते थे कि उनकी पार्टी के लिए उनका भाई सबसे मजबूत स्तंभ है। जिसके गिरने से बहुत कुछ खत्म हो गया।

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