Tamil Nādu:हाल ही में तमिलनाडु के विल्लुपुरम से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक दलित महिला पंचायत अध्यक्ष ने जातिगत भेदभाव से तंग आकर खुद को आग लगा ली। इतना ही नहीं, उसे चार साल तक बेइज्जती झेलनी पड़ी। वही मौके पर मिली सुचना के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
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दलित ग्राम प्रधान ने आत्मदाह का प्रयास किया
ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां ऊंचे पद पर बैठे दलित अधिकारी को परेशान किया गया, जातिसूचक गालियां दी जाती है जिसके कारण वो आत्महत्या की कोशिश करता है। ऐसा ही एक मामला तमिलनाडु के विल्लुपुरम से आया है। जाति के आधार पर होने वाले अत्याचार से तंग आकर कोडुंगल ग्राम पंचायत की प्रेसिडेंट ने इंसाफ के लिए खुद को आग लगा ली।
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जातिगत भेदभाव से तंग आ चुकी दलित महिला
यह दिल दहला देने वाली घटना विल्लुपुरम (Villupuram Panchayat) के कोडुंगल (Kodungal) में हुई। पुलिस के मुताबिक, कोडुंगल ग्राम पंचायत (Kodungal Gram Panchayat) की प्रेसिडेंट जी. मलारविझी काफी समय से पंचायत वाइस प्रेसिडेंट, उनके कुछ रिश्तेदारों और लोकल अधिकारियों द्वारा किए जा रहे जातिगत भेदभाव से तंग आ चुकी थीं। उन्हें अपने ही ऑफिस में सीट नहीं दी जाती थी, उनके काम में लगातार रुकावट डाली जाती थी, और 15 अगस्त को उन्हें झंडा फहराने से भी रोका जाता था। इतना ही नहीं कई बार तो उन्हें जातिसूचक शब्द कहकर भी अपमानित किया जाता था।
चार साल से झेल रही उत्पीड़न
वह लगभग चार साल से यह सब झेल रही थीं। उन्होंने बार-बार शिकायत की, लेकिन एडमिनिस्ट्रेशन ने अनसुना कर दिया। इसी वजह से उन्हें यह बड़ा कदम उठाना पड़ा। वही मामले की सुचना मिलते ही पुलिस ने समय रहते पीड़ित को बचा लिया। लेकिन अब यह मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है: अगर दलितों को अधिकार नहीं मिला है, तो फिर उन्हें रिज़र्व सीटों के नाम पर धोखा देने की क्या ज़रूरत है? क्या आपको लगता है कि चार साल से न्याय का इंतज़ार कर रही पीड़िता को अब भी न्याय मिलेगा? वही पुलिस ने पीड़िता को आश्वासन दिया है, कि जल्द ही मामले की जाँच करके आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।



