Article 16: जहां संविधान निर्माण और उसके लागू होने से पहले तक भारत में पूंजीपतियों का ही शासन चलता था, वहीं जाति के आधार पर नियुक्तियां हुआ करती थी.. जिसके कारण हमेशा से ही शूद्रों और पिछड़े को वो काम दिये जाते थे जो अपशिष्ट कहलाते थे या फिर जिनमें जान का रिस्क होता था, साथ ही उन्हें इतनी कम पगार मिलती थी कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी भी चलाना मुश्किल होता था। ऐसे में बाबा साहब ने जब संविधान का निर्माण किया तब उन्होंने न केवल सभी जातियों को एक समान अधिकार दिये बल्कि जो गरीब, दबे कुचले लोग है उन्हें विशेष अधिकार भी दिये, ताकि उनके अधिकारों को कोई मार न सकें। खासकर लोक नियोजन यानि की सरकारी नौकरियों के मामले में.. बाबा साहब ने संविधान के अनुच्छेद 16 में सरकारी नौकरियों को लेकर सभी जातियों को समानता के अवसर देने का प्रावधान है.. अपने इस लेख में हम अनुच्छेद 16 के बारे में जानेंगे।
अनुच्छेद 16 क्या है? Article 16
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 16 के मुताबित भारत के किसी भी राज्य में सरकारी नौकरियों यानि कि लोक नियोजन के विषयों में हर एक भारतीय को समान अधिकार मिलेंगे। किसी के धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, वंश, जन्मस्थान औऱ निवास को आधार बना कर किसी की पात्रता को खत्म नहीं किया जा सकता है।
अनुच्छेद 16 में 6 अलग अलग उपधारा भी शामिल है। जिसमें उपधारा एक के मुताबिक किसी भी रही में सरकार के अधीन पदों पर सभी पात्र प्रतिभागी को समान अवसर दिया जाएगा।
उपधारा 2 के मुताबिक अगर कोई इस विशेष राज्य से नहीं भी है लेकिन वो भारत का नागरिक है तो भी सरकार उसके साथ भेदभाव नहीं कर सकती है।
उपधारा 3 के मुताबिक संसद के पास ये अधिकार है कि वो इस तरह का कानून बना सकती है जिसके मुताबिक किसी दुसरे राज्य के व्यक्ति को सरकारी नौकरी से पहले कुछ समय तक उस राज्य में रहने के लिए अनिवार्य किया जायें जहां उसने नौकरी के आवेदन किया है।
उपधारा 4 के मुताबिक राज्य सरकार के पास भी ये अधिकार है कि वो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोगो के लिए आरक्षण के प्रावधान ला सकते है। हालांकि वो आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत से ऊपर नहीं जा सकती है। इसमें ये ध्यान रखने की जरूरत है कि scst वर्ग का प्रतिनिधित्व उस राज्य के सरकारी सेवाओं के रिक्त हो, या सरकारी criteria के अनुसार पूरा न हुआ हो।
उपधारा 5 के मुताबिक कोई भी धार्मिक या सांप्रदायिक संस्था के किसी भी पद के लिए चाहे वो सरकारी हो, उस पद के लिए किसी विशेष धर्म या संप्रदाय के प्रतिभागी का होना अनिवार्य किया जा सकता है। इसमें उपधारा 1 और उपधारा 2 की कही बात लागू नहीं होती है, जिसमें समान अवसर औऱ भेदभाव न करने की बात कहीं गई है। धार्मिक संस्थानो के प्रबंधन में राज्य सरकार को हस्तक्षेप नहीं कर सकती है। धर्म के अनुयार ही विशेष संस्थान को अपने पद अधिकारियों को चुनने की आजादी है।
साल 2019 में इसमें संशोधन करके उपधारा 6 जोड़ी गई जिसके मुताबित आर्थिक रूप से कमजोर उच्च जाति के लोगों को भी अब से सरकारी नौकरियों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। जिसे सरकार ने EWS यानि की “Economically Weaker section” कहा है। इस नए कानून के आने के बाद अब से केवल एससी एसटी और ओबीसी वर्ग को ही नहीं बल्कि आर्थिक रूपय से कमजोर सवर्ण लोगो को भी 10 प्रतिशत सरकारी नौकरी में आरक्षण दिया गया है।
अनुच्छेद भारत की अखंडता को प्रदर्शित करता है… औऱ बताता है कि भारत का संविधान सभी के लिए समान है। वो किसी के साथ भेदभाव नहीं करता.. जो योग्य है उसे उसका स्थान और सम्मान जरूर मिलेगा,, औऱ वो भी किसी भी भेदभाव के।



