नीट विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफ़ा, पीएम मोदी को सौंपा त्यागपत्र – Dharmendra Pradhan Resignation

Dharmendra Pardhan, Dharmendra Pardhan Resignation
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Dharmendra Pradhan Resignation: NEET पेपर लीक के ख़िलाफ़ जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन आज एक अहम मोड़ पर पहुँच गया है। छात्रों के भारी दबाव के आगे झुकते हुए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई, 2026 को अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। जिसे उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। इसके बाद, जंतर-मंतर पर उमड़े लाखों छात्रों का हुजूम खुशी मनाता हुआ दिखाई दिया।

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धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया

झुकती है दुनिया…झुकाने वाला चाहिए, NEET पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर (Jantar Mantar) पर पिछले 36 दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शन के आगे आखिरकार सरकार को झुकना ही पड़ा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल बन गया, CJP नेता अभिजीत दिपके ने दहाड़ते हुए कहा— “लोग कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन हमने साबित कर दिया, कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं।

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एक्शन में मोड आई सरकार

वही धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा करते हुए लिखा अपने 2 पेज और 575 शब्दों के इस्तीफे में लिखा कि उन्हें प्रजातंत्र पर पूरा भरोसा है, इधर, एक्शन में आई सरकार ने NTA के 47 अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त कर दिया है और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में बड़े तकनीकी सुधार लागू करने का ऐलान किया है। लेकिन क्या आंदोलन खत्म हो गया? जवाब है— बिलकुल नहीं, CJP ने मांग रखी है कि सुसाइड करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा मिले और 20 जुलाई को लाठीचार्ज कराने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।

धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा में पेपर लीक के खिलाफ किया था प्रोटेस्ट

दिलचस्प बात यह है कि 29 साल पहले खुद धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने ओडिशा में पेपर लीक के खिलाफ लाठियां खाई थीं, फिलहाल CBI जांच में 13 आरोपी पकड़े जा चुके हैं और नए सख्त कानून के तहत दोषियों को 10 साल की जेल और 1 करोड़ जुर्माने की तैयारी है, क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से छात्रों को न्याय मिलेगा? वही कई दिनों से अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा (Union Minister JP Nadda) और 65 सांसदों के समर्थन के बाद अनशन समाप्त कर दिया, वांगचुक ने साफ किया कि हिंसा रोकने, FIR न करने और संसद में चर्चा के आश्वासन पर उन्होंने यह फैसला लिया है।

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोषियों को सख्त सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का ऐलान किया, जिस पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने इसे ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया, कंगना ने कहा—‘नकल और पेपर लीक से हम सब प्रभावित रहे हैं, लेकिन इतना कड़ा फैसला आज तक किसी सरकार ने नहीं लिया।

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