Madurai: हाल ही में, मदुरै जिले के मेलूर तालुक के कंबूर गांव में एक दलित महिला सफाई कर्मचारी ने जातिगत भेदभाव और परेशानी से तंग आकर आत्महत्या करने की कोशिश की। महिला ने कई याचिकाएं दायर कीं, लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उसने यह भयानक कदम उठाया।
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जातिगत भेदभाव से तंग दलित महिला
बीते दो दिन पहले ही कर्नाटक के रायचूर से खबर आई थी, जहां एक दलित महिला मुखिया ने जातिगत उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या करने की कोशिश की। अभी ये मामला पूरी तरह से शांत भी नहीं हुआ था कि ऐसा ही एक मामला तमिलनाडु के मदुरै से है, जहां एक दलित सफाई कर्मचारी ने जातिगत भेदभाव से तंग आकर आत्महत्या करने की कोशिश की।
कीटनाशक पीकर अपनी जान देने की कोशिश
दरअसल, ये मामला मदुरै(Madurai) के मेलूर के पास कंबूर पंचायत (Kambur Panchayat) का है, जहां करीब 8 साल से सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रही थी, लेकिन उसे लगातार जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है, जिसे लेकर पीड़िता शशिकला ने मदुरै जिला कलेक्टर निशांत कृष्णा को याचिका भी दी थी, लेकिन जब उसपर कोई सुनवाई नहीं हुई तो उसने सितंबर 2026 कीटनाशक पीकर अपनी जान देने की कोशिश की। जिसके बाद उन्हें मेलूर के सरकारी अस्पताल (Melur Government Hospital) में गहन चिकित्सा (ICU) में भर्ती कराया गया। हालांकि वक्त रहते उसे बचा लिया गया,लेकिन अभी भी वो खतरे से बाहर नहीं है।
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मामले में कोई सुनवाई नहीं हुई
पीड़िता के पति टी प्रकाश ने बताया कि उसे उसकी जाति के कारण अलग डिस्पोजेबल ग्लास में चाय पानी पीने के लिए मजबूर किया जाता है, इतना ही नहीं कल्लर समुदाय से आने वाली पंचायत सचिव के जूतों को हाथों से उठा कर ले जाना पड़ता है। लगातार हो रही प्रताड़ना और कोई सुनवाई न होने से दुखी पीड़िता ने ऐसा संगीन कदम उठाया है। वहीं अब पीड़िता को ओर से मामला दर्ज कराया गया तो उसे बार बार वापिस लेने के लिए धमकियां दी जा रही है।
इसके अलवा कोट्टमपट्टी पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और(BNS) और SC/ST एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। मेलूर के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (DSP) मामले की जांच कर रहे हैं, और लोकल ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) ने भी कहा है कि ऑफिशियल जांच शुरू की जाएगी। वही इस मामले में दलित और सामाजिक संगठनों ने आरोपियों के खिलाफ तुरंत और सख्त कार्रवाई की मांग की है। हैरानी की बात है कि तमाम कोशिशों के बाद भी सरकारी दफ्तरों ने भेदभाव कम नहीं हो रहा है, ऐसे में प्रशासन को तरफ से क्या कदम उठाया जात है ये देखने वाली बात होगी।



