Allahabad high court: हाल ही में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से है, जहां इलाहाबाद हाई कोर्ट ने SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट के तहत आर्थिक मदद और मुआवज़ा देने में हुई गड़बड़ियों और बार-बार किए जा रहे दावों के मामलों पर सख़्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह पूरे राज्य में इस बात की व्यापक जांच करे कि SC/ST एक्ट के तहत आर्थिक मदद के दावों का सत्यापन और भुगतान किस तरह से किया जा रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें दलितों के अधिकारों से उन्हें वंचित किया जाता है और उन्हें मिलने वाला मुआवज़ा हड़प लिया जाता है। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से है, जहां दलित उत्पीड़न के मामलों में मिलने वाले मुआवजे को भी सरकारी अधिकारियों के खा जाने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सीधे जिला प्रशासन को फटकार लगाते हुए आर्थिक मदद के दुरुपयोग के मामले में 3 महीने का समय देते हुए कहा कि उन्हें 3 महीने के अंदर जांच की रिपोर्ट देनी होगी। दरअसल जुलाई 2024 में झांसी की विशेष न्यायाधीश (SC/ST Act) अदालत ने एससी एसटी एक्ट के तहत बकाया राशि के भुगतान की अपील को खारिज कर दिया था, जिसके बाद पीड़ितों ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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SC/ST Act मामले में मिलने वाले मुआवजे की जांच हो
जिसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस संतोष राय की सिंगल बेंच ने पूरे उत्तर प्रदेश में आर्थिक मदद के दुरुपयोग की जांच के आदेश दे दिये है। बता दें कि ये याचिका दो मामलो से जुड़ी है पहली अरविंद कुमार और दूसरी संतोष कुमार दोहरे की.. याचिका के अनुसार हर पीड़ित को 2 लाख रूपए देने का प्रावधान है, और चार्जशीट दायर होने तक 75 प्रतिशत राशि मिल भी जानी चाहिए लेकिन इतना समय बीतने के बाद भी अभी तक केवल 75 हजार रूपए का ही भुगतान हुआ है और बाकि की रकम देने से इंकार कर दिया गया।
सभी मामलों की निष्पक्ष जांच करें
वहीं राज्य सरकार की तरफ से दिये गए जवाब में उल्टा पीड़ितों को ही दोषी करार देते हुए कहा गया कि वो कई मामले में मुआवजा ले चुके है। लेकिन कोर्ट ने सीधे तौर पर कहा कि यहां मामला एक दो केस का नहीं बल्कि एक दर्जन से ज्यादा का है.. इसलिए डीएम और एसएसपी दोनो मिलकर याचिकाकर्ता संतोष कुमार धोहरे औऱ उसके परिवार से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष जांच करें, जिसके बाद ही कोर्ट आगे तय करेगी कि किस पर और क्या क्या कार्यवाई होगी। वहीं यूपी सरकार को ऐसे मामलों में जांच एवं निगरानी तंत्र बनाने के लिए कहा है। अब देखना ये होगा कि पीड़ित की याचिका के बाद जांच में क्या आता है। वैसे आपको क्या लगता है क्या जानबूझ कर मामले का रूख बदलने के लिए पीड़ित को ही अरोपी बनाया गया है।



