Top 5 Dalit news: हापुड़ में युवक की मौत, जमीन कब्जाने का आरोप और सांसद को धमकी तक

Caste Discrimination, Top 5 Dalit news in Hindi
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Top 5 Dalit news: इस देश का कानून सबके लिए समान है, हर अपराधी को सजा होगी, तो फिर ऐसा क्यों है कि जब अपराधी सवर्ण जाति से होता हैं तो उन्हें सरेआम दलितों को धमकी देने के अधिकार मिल जाता है और दलितों के लिए हक की आवाज उठाना भी बगावत हो जाती है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं की बात बतायेंगे, जो सवाल उठाते है कि जैसे कोई मामूली सा जातिवादी एक संवैधानिक पद पर बैठे दलित व्यक्तियों का आराम धमकी देता है लेकिन प्रशासन मूक बन कर बैठी है।

हापुड़ में तो समुदाय की दुश्मनी में 25 साल के युवक की मौत

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के हापुड़ से है, जहां तीन महीने पुरानी रंजिश के दौरान हुई मारपीट और उसके बाद दलित समाज द्वारा किए गए केस को लेकर जातिवादियों ने फिर से न केवल जाटव समाज पर हमला किया बल्कि एक 25साल के युवक की मौत भी हो गई। ये मामला हापुड़ के बदनौली गांव का है। पुलिस के मुताबित 4 सितंबर 2026 को गांव के चौधरी समुदाय और जाटव समाज के कुछ लड़कों के बीच सोशल मीडिया पर विवादित टिप्पणी करने और तीन महीने पुराने मामले को रफा दफा करने के लिए सुबह 9 बजे के करीब बहस शुरू हुई थी। ये बहस पहले जुबानी थी, लेकिन फिर मारपीट शुरू हो गई और उसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी भी हुई। जिसमें दीपक नाम का युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था, लेकिन मेरठ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जिससे जाटव समाज का गुस्सा और भड़क गया। इस हमले के लिए जाटव समाज की तरफ से 33 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया है, जिसें पुलिस ने मुख्य आरोपी पूर्व प्रधान संदीप सिंह समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और बाकियों की तलाश जारी है। वहीं इस मामले की सटीक जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। वहीं इस मामले में लापरवाही को लेकर सीओ सिटी अनिता चौहान और थाना हापुड़ नगर (कोतवाली) प्रभारी निरीक्षक मनीष चौहान को निलंबित कर दिया गया है। अब देखना ये होगा कि क्या लोगो का गुस्सा इतने से शांत हो जाएगा। और क्या निकलेगा जांच में।

नालंदा में दलितों को जमीन को जबरन हड़पने को साजिश

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के नालंदा से है जहां दलित परिवार की जबरन पुश्तैनी जमीन को हथिया कर उस पर सरकारी स्कूल बनाने की चल चली जा रही है, और जब दलित परिवार ने विरोध किया तो उन्हें गाँव से बाहर करने की धमकी दी है। मामला नालन्दा के दीपनगर थाना क्षेत्र के नेपुरा पंचायत के बेरौटी गांव का है। पीड़ित परिवार के मुखिया विजय पासवान ने अपनी जमीन बचाने के लिए नालंदा डीएम, एसडीओ और अंचलाधिकारी तक को याचिका अर्जी भेजी है। विजय पासवान ने बताया है कि हमारे पास जमीन के पूरे कागजात मौजूद है , लेकिन फिर भी दबंगों ने जबरन लगभग आधी जमीन पर कब्जा कर स्कूल बनाने की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें गाँव से निकालने और जान से मारने की धमकी दे रहे है। पीड़ित परिवार ने बताया कि गांव के सरपंच भी आरोपियों का साथ दे रहे है, उनके घर में दबंगों ने घुस कर तोड़फोड़ की, उनके मवेशियों को खोल दिया। साथ ही अगर जमीन नहीं दी तो वो हमारे घर से भी हमें बेदखल कर देंगे। इस मामले के सामने आने के बाद अभी तक प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली है। अब देखना ये होगा कि कहीं गांव के बहुसंख्यक ऊंची जाति के लोगों के दवाब ने प्रशासन भी मूक तो नहीं हो जाएगी।

मदुरै में जातिगत भेदभाव से तंग आकर खुदकुशी की कोशिश

3 दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के मदुरै से है, जहां एक दलित सफाई कर्मचारी ने जातिगत भेदभाव से तंग आकर आत्महत्या करने की कोशिश की। ये मामला मदुरै के मेलूर के पास कंबूर पंचायत का है, जहां करीब 8 साल से सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रही थी, लेकिन उसे लगातार जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का शिकार होना पड़ रहा है, जिसे लेकर पीड़िता ने मदुरै जिला कलेक्टर निशांत कृष्णा को याचिका भी दी थी, लेकिन जब उसपर कोई सुनवाई नहीं हुई तो उसने कीटनाशक पीकर अपनी जान देने की कोशिश की। हालांकि वक्त रहते उसे बचा लिया गया,लेकिन अभी भी वो खतरे से बाहर नहीं है। पीड़िता के पति टी प्रकाश ने बताया कि उसे उसकी जाति के कारण अलग डिस्पोजेबल ग्लास में चाय पानी पीने के लिए मजबूर किया जाता है, इतना ही नहीं कल्लर समुदाय से आने वाली पंचायत सचिव के जूतों को हाथों से उठा कर ले जाना पड़ता है। लगातार हो रही प्रताड़ना और कोई सुनवाई न होने से दुखी पीड़िता ने ऐसा संगीन कदम उठाया है। वहीं अब पीड़िता को ओर से मामला दर्ज कराया गया तो उसे बार बार वापिस लेने के लिए धमकियां दी जा रही है। हैरानी की बात है कि तमाम कोशिशों के बाद भी सरकारी दफ्तरों ने भेदभाव कम नहीं हो रहा है, ऐसे में प्रशासन को तरफ से क्या कदम उठाया जात है ये देखने वाली बात होगी।

नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद को धमकी

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकिन है। उनके दलितों को लिए चल रही उनकी लड़ाई और दलित और पिछड़ों से मिल रहे उन्हें समर्थन को देख कर बौखलाये एक गुंडे अभिषेक ठाकुर ने सोशल मीडिया पर आजाद को फिर से टारगेट किया है। अभिषेक मिश्र ने सीधा कहा कि बुलंदशहर का ही रहने वाले एक भाई ने आजाद पर गोली चलाई थी, लेकिन गोली सही जगह नहीं लगी थी, बस छू कर निकल है थी अगर सही जगह लगती तो आज इतना तमाशा नहीं होता। अभिषेक ठाकुर के इस बयान से सोशल मीडिया पर बवाल मच गया है। बता दें कि 28 जून 2023 को सहारनपुर में दिल्ली से लौटते वक्त आजाद जब अपने एक साथ कार्यकर्ता से मिलने के लिए रुके थे तब वहां से निकलते वक्त उनकी फॉर्चूनर गाड़ी पर कई लोगों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं जिसमें एक गोली आजाद की कमर को छू कर निकल गई थी। वहीं अभिषेक ठाकुर के खिलाफ अब आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी ने मोर्चा खोल दिया है। वो एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को सीधे धमकी दे रहा है लेकिन पुलिस उसके खिलाफ कार्यवाही करने से क्यों कर डर रही है, इसे लेकर कार्यकर्ताओं में बेहद रोष है। अब देखना ये होगा कि प्रशासन का क्या रवैया होता है। क्या अभिषेक ठाकुर सलाखों के पीछे जाएगा। वैसे आपको क्या लगता है कि आखिर किसकी शय पर ये इस तरह के धमकी भरे शब्दों का इस्तेमाल मीडिया के सामने करते है।

जमानत पर बाहर आए आरोपी ने दलित नाबालिग से किया दुष्कर्म

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के आगरा से है, जहां कानून की कमजोरी किसी मासूम की पूरी जिंदगी कैसे तबाह कर सकती है उसका नमूना देखने को मिला। ये घटना आगरा के जैत थाना क्षेत्र का है, जहां करीब 3 सालों से जेल की हवा खा रहे एक शख्स को कानून ने जमानत दी थी, लेकिन उसका फायदा उठा उसने एक 16साल की दलित नाबालिग बच्ची को अपनी हवश का शिकार बनाया। दरअसल आरोपी ने तीन साल पहले छोटे से विवाद के बाद एक युवक की आंखें निकल ली थी, जिसके बाद वो जेल में था, लेकिन तीन साल के बाद उसे जमानत दी है थी, लेकिन उसने फिर से दुष्कर्म जैसे घिनौने अपराध को अंजाम दिया। पीड़िता की तहरीर पर आरोपी को फिर से गिरफ्तार किया गया है। जिसमें अब उसपर scst एक्ट, पॉक्सो एक्ट के साथ कई धाराओं में मामला चलेगा। हैरानी की बात है कि पहले से हवालात में बंद शख्स को कानून का डर क्यों नहीं था। या उसे ये लगा कि वो कानून को चकमा दे सकता है। वैसे आप कानून के कमजोर होने को लेकर क्या सोचते है।

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