Top 5 Dalit news: आपने सोशल मीडिया पर दलितों, बहुजनो के उत्पीड़न को लेकर जातिवादियो को टिप्पणी करते सुना होगी कि उत्पीड़न होता ही नहीं है.. बल्कि मुआवजे के लिए झूठे आरोप लगाये जाते है.. लेकिन हैरानी की बात तो ये है कि उस मुआवजे को भी तो उन तक पहुंचने नहीं दिया जाता। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओ के बारे में बतायेंगे…जो उन मनुवादियो के मुंह पर करारा तमाचा जड़ते है जो वंचितों को मौका परस्त कहते है.. लेकिन उन्हें वाकई में कितना मौका दिया जाता है वो सरकारी आकड़े बता ही देते है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से है, जहां दलित उत्पीड़न के मामलों में मिलने वाले मुआवजे को भी सरकारी अधिकारियों के खा जाने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सीधे जिला प्रशासन को फटकार लगाते हुए आर्थिक मदद के दुरुपयोग के मामले में 3 महीने का समय देते हुए कहा कि उन्हें 3 महीने के अंदर जांच की रिपोर्ट देनी होगी। दरअसल जुलाई 2024 में झांसी की विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) अदालत ने एससी एसटी एक्ट के तहत बकाया राशि के भुगतान की अपील को खारिज कर दिया था, जिसके बाद पीड़ितों ने हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जिसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस संतोष राय की सिंगल बेंच ने पूरे उत्तर प्रदेश में आर्थिक मदद के दुरुपयोग की जांच के आदेश दे दिये है। बता दें कि ये याचिका दो मामलो से जुड़ी है पहली अरविंद कुमार और दूसरी संतोष कुमार दोहरे की.. याचिका के अनुसार हर पीड़ित को 2 लाख रूपय देने का प्रावधान है, और चार्जशीट दायर होने तक 75 प्रतिशत राशि मिल भी जानी चाहिए लेकिन इतना समय बीतने के बाद भी अभी तक केवल 75 हजार रूपय का ही भुगतान हुआ है और बाकि की रकम देने से इंकार कर दिया गया। वहीं राज्य सरकार की तरफ से दिये गए जवाब में उल्टा पीड़ितों को ही दोषी करार देते हुए कहा गया कि वो कई मामले में मुआवजा ले चुके है .. लेकिन कोर्ट ने सीधे तौर पर कहा कि यहां मामला एक दो केस का नहीं बल्कि एक दर्जन से ज्यादा का है.. इसलिए डीएम और एसएसपी दोनो मिलकर याचिकाकर्ता संतोष कुमार धोहरे औऱ उसके परिवार से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष जांच करें, जिसके बाद ही कोर्ट आगे तय करेगी कि किस पर और क्या क्या कार्यवाई होगी। वहीं यूपी सरकार को ऐसे मामलों में जांच एवं निगरानी तंत्र बनाने के लिए कहा है। अब देखना ये होगा कि पीड़ित की याचिका के बाद जांच में क्या आता है। वैसे आपको क्या लगता है क्या जानबूझ कर मामले का रूख बदलने के लिए पीड़ित को ही अरोपी बनाया गया है।
अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद का अपमान करने वाले जातिवादी यूट्यूबर अजीत भारती को लेकर है, जिसकी अग्रिम जमानत को दिल्ली पटियाला हाउस कोर्ट के जज सौरभ प्रताप सिंह लालर ने खारिज कर दी है.,. यानि की अब अजीत भारती को जेल की हवा खाने से कोई नहीं बचा सकता। बता दें कि बीते महीने 23 अगस्त को दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद के खिलाफ जातिगत अपमान और उनकी पूरे समुदाय को लेकर की गई जातिगत टिप्पणी के मामले में एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। जिसके बाद से ही अजीत भारती पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है.. वहीं उनके वकील ने दलील दी कि अजीत भारती ने बाबा साहब का अपमान नहीं किया, और न ही किसी जाति विशेष पर कोई टिप्पणी की थी, बल्कि उन्होंने केवल उन्हें की गई टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रिया दी थी.. लेकिन इस मुद्दे को जातिगत भेदभाव औऱ अपमान का बना दिया गया। हालांकि अजीत भारती के वकील की सारी दलितों को सुनने के बाद भी कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अब देखना ये होगा कि ये मामला किस तरफ मुड़ता है.. अगर अजीत भारती आरोपी साबित हुए तो उन्हें 7 सालो के लिए जेल जाना पड़ सकता है.. वैसे आपको क्या लगता है.. क्या आजाद को निशाना बनाना केवल प्रतिक्रिया थी.. या जानबूझ कर किया गया अपमान।
मदुरै में जातिगत उत्पीड़न करने वाली पंचायत सचिव एस रूपा निलंबित
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के मदुरै से है, जहां जातिगत भेदभाव से तंग कर आत्महत्या करने की कोशिश करने वाली दलित सफाईकर्मी डी शशिकला की लड़ाई आखिरकार रंग लाई.. और कोट्टमपत्ती के बीडीओ पी राममूर्ति पंचायत सचिव एस रूपा को पद से निलंबित कर दिया गया। लेकिन दुख की बात है कि करीब 8 सालों से उत्पीड़न सहने वाली पीड़िता के कई बार अर्जी लगाने के बाद भी प्रशासन नींद से नहीं जागी.. जब तक की पीड़िता ने आत्महत्या की कोशिश करने जैसा सनसनीखेज कदम नहीं उठा लिया। वहीं पुलिस ने भी आरोपी सचिव के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है..लेकिन पीड़िता अब भी सरकारी राजाजी अस्पताल में भर्ती है। स्थानीय दलित समुदाय के लोगो ने बताया कि सचिव अक्सर जाति विरोधी गतिविधियों में शामिल रहती है। यहां कि एमबीसी समुदाय के श्रमिकों को काम न देने की वकालत करती थी.. जबरन पीड़िता से जूते चप्पलों को उठवाना, उसे साफ करने के लिए मजबूर करती थी, और जब विरोध करती थी तो उसे जान से मारने की धमकी दी जाती, जातिसूचक शब्द कहे जाते.. अब इस मामले में खुद राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भी पड़ गया है, ऐसे में देखना ये होगा कि ये मामला कहां तक जाता है।
पूर्व सीएम सिद्दारमैया का बड़ा स्ट्रोक
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक से है, जहां दलितों के लिए राजनीति की राह को आसान करने की लड़ाई एक नया मोड़ ले रही है। जहां एक तरफ पूरे देश में जातिगत आरक्षण को खत्म करने के लिए आंदोलन किया जा रहा है तो वहीं कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने जातिय जनगणना को लागू करने और एससी एसटी समुदाय को मिलने वाले आरक्षण को बढ़ा कर 75 प्रतिशत करने की सिफारिश की है। दरअसल कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग महासंघ के सिल्वर जुबली समारोह में पहुंचे पूर्व सीएम ने कहा कि जब तक आबादी के हिसाब से लाभ नहीं मिलेगा तब तक बराबरी संभव ही नही है इसलिए जातिगत जनगणना जरूरी है.. सिद्दारमैया ने जातिगत भेदभाव को लेकर कहा कि जब तक जातिवाद है जब तक बराबरी हो ही नहीं सकती। जातिय जनगणना से जो आरक्षण के काबिल होंगे उन तक आरक्षण पहुंचेगा। बता दें कि सिद्धारमैय ने मधुसूदन नाइक की अध्यक्षता वाले पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के बारे में खुलासा किया है, लेकिन फिलहाल ये सार्वजनिक नहीं है.. जो कि राज्य में जातिय गणगणना की रिपोर्ट है.. औऱ ये साबित कर देंगे कि वाकई में किसे सबसे ज्यादा आरक्षण की जरूरत है और किसे ये दिया जा रहा है।
राहुल गांधी के खिलाफ एससी एसटी एक्ट दर्ज करने वाले को लेकर खुलासा
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तराखंड के हल्द्वानी में शुद्धिकरण मामले में आवाज उठाने वाले कांग्रेस सांसद के खिलाफ हुए एफआईआर को लेकर है.. जहां अमित कुमार नाम के शख्स ने राहुल गांधी पर वाल्मिली समाज का अपमान करने को लेकर मामला दर्ज कराया था तो वहीं अब इस मामले में एक बड़ा खुलासा खुद वाल्मिकी समाज के लोगो ने किया है। वाल्मिकी समाज के लोगो ने खुद आगे आकर इस मामले की जांच की और पाया कि मामला दर्ज कराने वाला शख्स असल में वाल्मिकी समाज से है ही नहीं बल्कि ये बीजेपी की साजिश है.. क्योंकि उसका सगा चचेरा भाई बीजेपी का कार्यकर्ता है। लोगो ने कहा कि ये साजिश केवल वाल्मिकी समाज को बदनाम करने और शुद्धिकरण प्रकरण में राहुल गांधी की आवाज को दबाने के लिए की गई है.. जबकि राहुल गांधी पर की गई एफआईआर की बुनियाद ही झूठी और फेक है। इस मामले में इस बड़े खुलासे के बाद क्या होगा कांग्रेस का अगला कदम.. और इस साजिश से क्या आगामी विधानसभा चुनावों में बीजेपी को होगा बड़ा नुकसान आपको क्या लगता है।



