नेहरू भी नहीं टाल पाए ये शर्त! जानिए कैसे फ्री में लिखा गया Indian constitution

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Indian constitution को बनाने और उसे बनने के लिए जो जो प्रोसेस फॉलो किया गया, उसे लेकर अक्सर चर्चा होती है। देश आजाद हुआ तब तक राजशाही थी, लेकिन अब बारी थी कि एक नए भारत का जन्म हो, जिसमें सरकार की जवाबदेही जनता के हाथों में हो, जहां जनता के हाथों में ताकत हो कि वो अपना शासक किसे चुनते है। पूंजीवाद, ब्रिटिश उपनिवेशवाद का अंत हो उसके लिए जरूरी था कि स्वराज हो, देश को आजाद कराने में लोगों की एकजुटना ने संविधान निर्माताओं को ये प्रेरणा दी कि वो एक ऐसा संविधान बनाए जिसमें सभी एक समान हो। इसके लिए अलग अलग 22 समितियां बनी, जिसमें तीन अहम मनी जाती है, और इन्हीं तीन अहम समिति में से ड्राफ्टिंग कमिटी की ज़िम्मेदारी बाबा साहब आंबेडकर के कंधों पर थी।

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रखी गई ऐसी शर्त कि नेहरू भी नहीं कर पाए मना

बाबा साहब ने दिन रात एक करके मसौदा तैयार कर दिया, तीन अलग अलग बैठकें हुई और उसे अंतिम रूप दे दिया गया, लेकिन अब बारी थी उसे एक किताब के रूप ने तैयार करने की, जो भारत का भविष्य तैयार करने वाली थी। संविधान को दो भाषाओं में लिखा गया, इंग्लिश और हिंदी। हिंदी में संविधान लिखने की जिम्मेदारी जहां वसंत कृष्ण वैध को मिली तो वहीं नेहरू की इच्छा से इंग्लिश में लिखने की जिम्मेदारी प्रेम बिहारी नारायण रायजादा को दी गई। लेकिन उन्होंने संविधान लिखने से पहले एक ऐसी शर्त रखी जिसे नेहरू भी इनकार नहीं कर सकें। और वो आज भी संविधान में ज्यों के त्यों है। आइये जानते है कि कैसे इंग्लिश का संविधान हिंदी से अलग है और क्या शर्त रखी थी प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने नेहरू के सामने।

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प्रेम बिहारी नारायण रायजादा की नाम कलिग्राफी

जिस संविधान तैयार हुआ.. उस वक्त वो एक रफ तैयार किया गया मासौदा था, जिसे आराम से टाइपराइटर से भी छापा जा सकता था, लेकिन ये पंजित जवाहर लाल नेहरू की इच्छा थी कि भारत का संविधान केवल टाइप न हो बल्कि उसे अंग्रेजी में इटैलिक स्टाइल में और हिंदी भी देवनागरी स्टाईल में लिखी जायें। अब विडंबना ये थी कि ऐसा कौन था जिनके शब्दो मोतियो की तरह हो.. और तब शुरु हुई उस हुनरबाज को खोजने की पहल.. उस दौरान दिल्ली में प्रेम बिहारी नारायण रायजादा की नाम कलिग्राफी में पूरे भारत में सबसे आगे थे। उनके दादाजी मास्टर राम प्रसाद सक्सेना पारसी औऱ अंग्रेजी भाषा के विद्वान थे, प्रेम बिहारी के माता पिता की कम उम्र में मौत होने के कारण उनके दादाजी ने ही उन्हें कलिग्राफी इटैलिक स्टाइल से लिखने की ट्रेनिंग दी।

नेहरू से कहा कि वो संविधान हाथों से लिखेंगे

नेहरू उनकी बिना गलती किए कलिग्राफी के देखने के बाद उनके फैन बन गए थे, और उन्होंने प्रेम बिहारी के सामने ये इच्छा रखी कि वो अपने हाथो से संविधान का इंग्लिश भाषा में ट्रांसलेशन लिखे। एक 251 पन्नों का दस्तावेज, जिसमें करीब 1 लाख 17 हजार 369 शब्दों को लिखना आसान नही था.. और रायजादा में ये हुनर था कि वो बिना किसी काटछांट से पूरा संविधान हाथों से लिखने की कला जानते थे। प्रेम बिहारी नारायण रायजादा पंडित नेहरू के व्यक्तिगत आमंत्रण को अस्वीकार तो नही कर सकें लेकिन उन्होंने एक शर्त रख दी, उन्होंने नेहरू से कहा कि वो संविधान हाथों से लिखेंगे जैसा की वो चाहते है, औऱ बदले में वो एक पैसा भी नहीं लेंगे लेकिन उनकी शर्त है कि वो हर पन्ने पर अपना नाम लिखेंगे.. और जब संविधाव की किताब पूरी हो जायेगी तो वो अंत के पन्ने पर अपने दादाजी मास्टर राम प्रसाद सक्सेना का नाम लिखेंगे.. क्योंकि ये उनकी ही दी गई शिक्षा का देन है कि वो इस काबिल हो सकें कि उन्हें देश का संविधान अपने हाथों से लिखने का सौभाग्य मिला था। नेहरू उनकी शर्त से इंकार नहीं कर पायें..और वो राजी हो गए।

संविधान के हर पन्ने पर प्रेम बिहारी नारायण रायजादा का नाम

प्रेम बिहारी ने पूरा संविधान खूबसूरत इटैलिक भाषा में लिखा, और वो भी बिना किसी गलती के.. इसके लिए उन्हें करीब 6 महीनों का समय लगा.. लेकिन जो भरोसा नेहरू ने उन पर दिखाया था वो उन्होंने काम रखा। दुनिया का सबसे बड़ा और लचीला संविधान हाथों से तैयार हो चुका था। वहीं संविधान के हर पन्ने पर प्रेम बिहारी नारायण रायजादा का नाम लिखा हुआ है औऱ उसके अंत के पन्ने पर उनके दादाजी का नाम लिखा है।  सभी पन्नों पर संविधा सभा से 284 सदस्यों के साइन किये गए.. वहीं शांतिनिकेतन के प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस और उनके शिष्यों ने मिलकर खूबसूरत चित्रकारीकर सजाया है। आज जिसने भी संशोधन होते है वो संविधान की मूल की कॉपी में लिखे जाते है, ऑरिजन पन्नों को संजो कर रखने के लिए दोनो प्रतियो को हीलियम गैस से भरे एक डब्बे में रखा गया है और ये संसद भवन के सेंट्रल लाइब्रेरी में सुरक्षित रखी हुई है। ये दोनो प्रतिया सबूत है भारत के उस गौरवपूर्ण इतिहात का, जिसने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश बनाया है। जिसे धर्म निरपेक्षता की नए मायने खड़े किये.. जो अनेकता में एकता की मिशाल है।

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