संविधान की असली कहानी ड्राफ्ट बी.एन. राव का था या बाबा साहेब का? जानिए पूरा सच। Dr. B.R. Ambedkar vs B.N. Rao

Dr. B.R. Ambedkar vs B.N. Rao, Drafting Committee
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Dr. B.R. Ambedkar vs B.N. Rao: अभी कुछ महीनों से बाबा साहब अंबेडकर के संविधान के शिल्पकार होने पर लगातार सवाल उठाये जा रहे है। एक वर्ग ऐसा है जो ये अफवाह फैला रहे है कि बाबा साहब ने संविधान नहीं लिखा बल्कि बीएन राव ने लिखा था.., जबकि जब आप संविधान का इतिहास उठा कर देखते है तो आपको अनगिनत साक्ष्य मिल जायेंगे जो .ये कहते है कि कैसे बाबा साहब ने दिन रात एक करके 7 सदस्यी मसौदा समिति के होते हुए भी खुद अकेले ये संविधान तैयार किया था।

उनके साथ रहने वाले लोगो की माने तो ऐसा लगता था कि शायद बाबा साहब ने इतनी शिक्षा इसी दिन के लिए हासिल की थी जब वो भारत को ऐसा संविधान दे सकें जो सबको बराबरी का हक दे पायें.. जो न्याय प्रिय और कानून के रखवाला हो.. फिर भी ये शोर क्यों मचाया जा रहा है कि बाबा साहब ने संविधान तैयार नहीं किया.. और कौन है ये बीएन राव,… जो अभी कुछ तथाकथित मनुवादियों के मसीहा और संविधान के शिल्पकार बनाये जा रहे है। अपने इस लेख में हम जानेंगे कि संविधान की असली कहानी बाबा साहब ने लिखी या बीएन राव ने.. और क्यों बीएन राव को इसका क्रेडिट देने की कोशिश की जा रही है।

कौन थे बीएन राव – Who was B.N. Rao?

सर बेनेगल नरसिंह राव (B.N. Rao) जिन्हें आप बी एन राव के नाम से जानते है, एक भारतीय सिविल सेवक , , राजनयिक और राजनेता थे, जिन्होंने 1947 में बर्मा यानि की वर्तमान में म्यांमार और 1950 में भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने में एक सलाहकार की भूमिका निभाई थी। 1950 से 1952 तक United Nations Security Council में उन्होंने भारत के representative के रूप में काम किया था। राव का जन्म 26 फरवरी 1887 को हिंदू सारस्वत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। जो कि कर्नाटक के रहने वाले थे, उनके पिता बेनेगल राघवेंद्र राउ पेशे से प्रसिद्ध डॉक्टर थे। उन्होंने 1909 में भारतीय सिविल सेवा परीक्षा पास की थी और पहली नियुक्तु उनकी बंगाल में हुई थी।

बी एन राव ने 1935 में भारत सरकार अधिनियम, 1935 का मसौदा तैयार किया था, जिससे भारत सरकार देश में सुधार को लेकर सिरियस कदम उठा सकें। जिसके बाद वो कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप  में भी कार्यरत रहे थे। बीएन राव 1944 में सेवानिवृत्त हो गए लेकिन उनकी उपलब्धियों के कारण वो जम्मू और कश्मीर की रियासत के प्रधानमंत्री नियुक्त किये गये। लेकिन राजा के साथ मतभेद के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और उन्होंने फिर से भारत सरकार के  सुधार कार्यालय में अस्थायी रूप से काम करना शुरु कर दिया था, जहां उन्होंने विशेषरूप से संवैधानिक और संघीय मुद्दों पर प्रकाश डालने और उसके लिए ही काम करना शुरु किया था, जिसके कारण उन्हें गवर्नर-जनरल कार्यालय का सचिव चुना गया जो संवैधानिक सुधारो के लिए काम करते थे, और उसी दौरान 1946 में संविधान सभा का संवैधानिक सलाहकार बनाया गया था।

संविधान तैयार करने में उनकी भूमिका

अब हम इस दावे पर आते है कि राव की भूमिका संविधान तैयार करने में कितनी थी।  दरअसल मसौदा समिति के 7 सदस्यों में बाबा साहब अंबेडकर को उनका अध्यक्ष चुना गया.. तब बीएन राव संवैधानिक सलाहकार थे। हम सभी जानते है कि भारत का संविधान 10 देशों के संविधान से लिया गया है, ऐसे में उसे और बारिकी से जानने का काम बाबा साहब ने बीएन राव के कंधे पर सौंपा था। बीएन राव (B.N. Rao) ने सलाहाकार के तौर पर अमेरिका, कनाडा, आयरलैंड और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशो की यात्रा करके संवैधानिक कानून के एक्सपर्ट्स, जजेस, और संविधान को बारिकी से जानने समझने वाले अनगिनत लोगो से मुलाकात कर उनसे सलाह ली थी। एक सलाहकार के तौर पर बीएन राव ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर दी,, और  अक्टूबर 1947 में बाबा साहब (Baba saheb) के मसौदा समिति को सौंप दी थी।

कौन है असली संविधान निर्माता

मसौदा समिति का मुख्य कार्य था कि वो बीएन राव की रिपोर्ट की पूरी तरह से गहन जांच करें और उन बिंदुओ को निकाले जो भारतीय संविधान में होने चाहिए थे, जिसके लिए  पहला मसौदा फरवरी 1948 में लाया गया.. औऱ साथ ही इस मसौदे में बदलाव करने के लिए 8 महीनो का समय भी दिया गया। इसके बाद जनता की दी गई सारी सलाह में काट-छांट करके अक्टूबर 1948 में बाबा साहब ने दूसरा मसौदा पेश किया.. और फिर  4 नवंबर 1948 को तीसरा और फाइनल मसौदा सभा के सामने पेश किया गया। तीन मसौदों के बाद 26 नवंबर 1949 संविधान को पारित करने की घोषणा की गई।

संवैधानिक सलाहकार बी एन राव

बाबा साहब ने 25 नवंबर 1949 को अपने फाइनल भाषण में कहा था कि जिस संविधान को उन्होंने पूर्ण रूप दिया.. उसका सारा श्रैय उनका नहीं बल्कि कुछ श्रेय संवैधानिक सलाहकार बी एन राव को भी जाता है, जिन्होंने संविधान का पहला मसौदा तैयार करके दिया था.. जिनके आधार पर ही आज फाइनल संविधान बना है। यानि की बाबा साहब ने खुद संविधान को तैयार करने में बी एन राव की भूमिका की तारीफ की थी… लेकिन संविधान को लिखने और किस बिंदु को लेना है और किसे नहीं .. इसे खुद बाबा साहब ने तैयार किया था। समिति के सदस्यों में से एक टी.टी. कृष्णामाचारी ने खुद इस बात को स्वीकार किया था कि 7 सदस्यों के होने के बाद भी अंबेडकर ने संविधान का मसौदा अकेले तैयार किया था,, क्योंकि ज्यादातर सदस्य वहां मौजूद ही नहीं होते थे।

वहीं पहले राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद ने भी इस बात की गवाही दी थी उन्होंने बाबा साहब को दिन रात एक करके संविधान तैयार करते देखा था। वहीं बीएम राव ने खुद कभी नहीं कहा कि उन्होंने संविधान तैयार किया.. फिर आज कुछ लोग उन्हें इसका क्रेडिट क्यों देते है.. वजह साफ है.. जो लोग बाबा साहब की महानता को स्वीकार नहीं कर पा रहे है उनके लिए ये स्वीकार कर पाना कहां आसान होगा कि उन्होंने इतने महान संविधान का निर्माण किया है। उम्मीद है अब आप भी जान गए होंगे कि संविधान तके असली शिल्पकार कौन है।

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