Top 5 Dalit news: बाबा साहब ने जब महार सत्याग्रह में चावदार तालाब का पानी पिया था, तब ब्राह्मणों औऱ सवर्णों ने उसका पहले शुद्धिकरण किया..क्योंकि उनके छूने से वो पानी अशुद्ध हो गया था, लेकिन अब तो डेमोक्रेसी है.. सब बराबर है फिर कैसे किसी दलित के किसी जमीन पर पैर रखने से वो अशुद्ध हो सकता है। ये कैसी मानसिकता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो आपको ये बताने के लिए काफी है कि छुआछूत न तो पानी छूने से है और न ही जमीन पर पैर रखने से.. ये केवल मानसिक विकृती है।
कांग्रेस अध्यक्ष की रैली के बाद रामलीला मैदान का शुद्धिकरण
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तराखंड के हलद्वानी से है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने है, जिसे लेकर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को हलद्वानी के रामलीला मैदान में विजय शंखनाद रैली की थी..लेकिन उसके दो दिनो के बाद ही 10 अगस्त को धार्मिक संगठन श्री राम सेना धर्मार्थ सेना न्यास ने रामलीला मैदान का शुद्धिकरण करने के लिए यज्ञ हवन किया। वहीं समिति का कहना है कांग्रेस ने य़हां खड़े हो कर हिंदू विरोधी नारे लगाये थे, उन्होंने इस्लाम को बढ़ावा देने वाली बात की थी। जिसका विरोध दर्ज करने के लिए ही समिति के सचिव राम अवस्थी ने शुद्धिकरण हवन का आयोजन किया। वहीं शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस ने नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष के दलित होने के कारण बीजेपी के इशारे पर उनके साथ इस तरह का व्यावहार किया जा रहा है। जिसका विरोध करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता ने हलद्वानी के बुद्ध पार्क में प्रदर्शन करना शुरु कर दिया। वहीं समिति ने दावा किया कि हमारी समिति किसी पार्टी से जुड़ी नहीं है। इसलिए इसका राजनीतिकरण न करें, रामलीला मैदान धार्मिक कार्यक्रम के लिए है, न की रैलियों के लिए। सवाल ये है एक रैली के बाद शुद्धिकरण करना दलितों का अपमान करने के लिए नहीं किया गया तो क्यों किया गया। क्योंकि अगर किसी नारे से परेशानी थी तो रिपोर्ट की जा सकती थी.. लेकिन सामूहिक तौर पर शुद्धिकरण इशारा है कि किसी भी पद का व्यक्ति क्यों न हो.. अगर दलित है तो उसे न्याय के लिए आवाज उठाने का हक नहीं है।
डांगावास हत्याकांड के आरोपियों को बरी करने के खिलाफ धरना
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के नागौर से है, जहां बहुचर्चित डांगावास हत्याकांड के सभी 40 आरोपियों को बरी करने के फैसले के खिलाफ दलित समाज का गुस्सा फूट पड़ा है। 11 सालों का लंबा इंतजार करने के बाद भी 5 दलितों की हत्या को लेकर पीड़ितों को न्याय में विफलता ही मिली..जिसने दलित समाज के विश्वास को न्याय से डगमगा दिया है। 2015 में 5 दलितो के समेत 6 लोगों की हत्या के मामले में अभी हाल ही में कोर्ट ने सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया.. जिसके बाद से दलित संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवार ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जयपुर के शहीद स्मारक पर धरना देने शुरु कर दिया है। दलित संगठन का कहना है कि 23 बीघा जमीन विवाद को लेकर इतनी बेरहमी से 5 दलित समेत 6 लोगो की हत्या की गई। सीबीआई जांच में 40 लोग दोषी पायें गए.. तो फिर कोर्ट की नजरो में वो बेगुनाह कैसे हो गए… और उन 6 हत्याओं का हत्यारा कहां है। कोर्ट के फैसला समाज के दलितों और वंचितो के खिलाफ है। इससे उनका न्याय से भरोसा हमेशा के लिए उठ जायेगा। निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए अब हाईकोर्ट में अपील करने की तैयारी की जा रही है। वहीं इस मामले में इन अन्यायपूर्ण फैसले को लेकर जमकर राजनीति शुरु हो गई है। विपक्ष सवाल उठा रहा है कि अगर सभी निर्दोष है तो असली आरोपी पिछले 11 सालों में पकड़ा क्यों नहीं गया.. ये राजस्थान सरकार औऱ पुलिस दोनो की विफलता का पुख्ता सबूत है। अब देखना ये होगा कि हाईकोर्ट में जाने से इस मामले में कोई बदलाव आता है या नहीं।
कानपुर में दलित युवती की संदिग्ध मौत
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर स है, जहां एक दलित युवती संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई.. मृतका 4 महीने की गर्भवती भी थी, परिजनो ने महिला के प्रेमी पर हत्या का आरोप लगाया है। ये घटना कानपुर के घाटमपुर के पतारा का है, मृतका के पिता राजेंद्र सोनकर ने पुलिस को जानकारी दी कि उनकी 24 साल की बेटी करीब 4 महीने पहले अपने प्रेमी के साथ चली गई थी लेकिन अचानक एक महीने पहले लौटी तो वो 3 महीने की गर्भवती थी, मगर कुछ दिनों पहले वो किसी अंजान शख्स के संपर्क में थी, और अनाचक फिर उसके साथ चली गई.. जबकि पीड़ित परिवार को उस शख्स के बारे में कोई जानकारी नही है,.. वहीं 13 अगस्त की सुबह युवती का शव उसके घर से आधे किलोमीटर दूर बगीचे के पास मिला.. उसके मुंह से निकलने वाले झाग ने युवती की मौत को संदिग्ध बना दिया है। घाटमपुर थाना प्रभारी मनोज सिंह भदौरिया के मुताबिक युवती के शव के पास उसका मोबाईल मिला.. जिसकी पुलिस जांच कर रही है, वहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के बाद मौत का कारण पता चलेगा। पुलिस की कई टीम उसके प्रेमी की तलाश में जुटी है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वो जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार कर लेंगे।
हिंदू कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री पर लगा संगीन आरोप
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के छत्तरपुर से है, जहां आजाद समाज पार्टी के नेता “दामोदर सिंह यादव ने हिंदू कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री और उनकी भाई पर संगीन आरोप लगाते हुए कुशवाहा, वाल्मिकी जैसे पिछड़े और दलित जाति के लोगो की जबरन 250 एकड़ जमीन बंदूक की नोंक पर हथियाने का आरोप लगाया है। दामोदर यादव ने ग्वालियर में एक प्रेस कांफेंस में बड़ा खुलासा करते हुए पीड़ितो को भी मीडिया के सामने खड़ा कर दिया। उन्होंने कहा कि जमीने न देने वाले दलितो को सीधे गोली मार दी जाती है.. यादव ने सीएम मोहन यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि संत और कथावाचक का भेष बना कर ये भूमाफिया दलितों और पिछड़ो के साथ अन्याय कर रहे है औऱ सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है। हैरानी की बात है कि सरकार खुद ऐसे अपराधियों की ब्रांडिंग कर रही है.. उन्होंने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि अगर जल्द से जल्द जमीने मुक्त नहीं कराई गई तो वो एक हजार गाड़ियां और 20 हजार लोग लेकर धीरेंद्र शास्त्री का आश्रम घेरेंगे। दामोदर यादव ने पीड़ितो को मीडिया के सामने खड़ा कर साबित कर दिया है कि अब लड़ाई आरपार की ही होने वाली है.. और धीरेंद्र शास्त्री जैसे लोगो की मनमानी नहीं चलने देंगे।
आजमगढ़ में मजदूरी मांगने गई 3 महिलाओं के साथ मारपीट
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से है, जहां दलित महिलाओं ने अपनी मजदूरी मांगने की कोशिश क्या की.. दूसरे समुदाय के कई लोगो ने महिलाओ को बुरी तरह से पीटा। ये मामला आजमगढ़ जिले के दीदारगंज थाना क्षेत्र के सितारा महमूदपुर गांव का है, 11 अगस्त को दलित जाति से आने वाली तीन महिलाएं जो कि गांव के ही तब्बू के खेतों में मजदूरी कर रही थी.. लेकिन काम खत्म होने के बाद जब वो लोग मजदूरी मांगने पहुंचे तो तब्बू समेत उसके परिवार के कई सदस्य उन्हें जातिसूचक गालियां दे कर अपमान करने लगे.. इतना ही नहीं जब महिलाओं ने इसका विरोध किया तो उनके साथ मारपीट भी गई.. इसका एख वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। तीनो किसी तरह से घर पहुंची जहां परिवार को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन जब पुलिस को तहरीर दी गई तो पुलिस वालो ने भी आरोपियो के रसूख के चक्कर में पहले तो घंटो इंतजार करवाया और फिर आरोपियो के आने के बाद उन्हें थाने से भगा दिया गया। पीड़ितों ने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। हालांकि वीडियो के वायरल होने के बाद भी पुलिस ने अब तक किसी आरोपी को गिरफ्तार तक नहीं किया है.. फिर भला दलितों का कानून पर विश्वास कहां से होगा।



