356 BNS in Hindi: अक्सर हम ऐसी खबरें सुनते हैं जब किसी के बारे में झूठी अफवाह फैलाई जाती है या न सिर्फ किताबों और पोस्टरों के ज़रिए बल्कि अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झूठी खबरें फैलाकर किसी व्यक्ति की इज़्ज़त को नुकसान पहुंचाया जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा करने पर सज़ा भी हो सकती है और ऐसे में BNS का कौन सा सेक्शन लागू होता है और किस तरह की सज़ा दी जाएगी? तो चलिए हम आपको बताते हैं, अगर ऐसा किया जाता है तो भारतीय न्याय सहिंता (BNS) का सेक्शन 356 लागू होता है। तो चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सज़ा का प्रावधान है और BNS में इसके बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 356 क्या कहती है? BNS Section 356 in Hindi
आज के समय में, टेक्नोलॉजी का दुरूपयोग इतना ज्यादा बढ़ गया है कि ऑनलाइन मेसेज करके लोगो को धमकाया, डराया जाता है लेकिन पकडे जाने पर कड़ी सजा भी होती है… वही जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 356 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 356 यह सेक्शन उस व्यक्ति पर लागू होता है जब कोई किसी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश करता है और सोशल मीडिया के माध्यम से उनके बारे में झूठी खबरें फैलाता है, तो इससे उनके बारे में नकारात्मक छवि बनती है, जिसमें झूठे स्टेटमेंट देना भी शामिल है जो उनकी इमेज को नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसा अक्सर बदले की भावना से किया जाता है.
BNS section 356 Important points
- BNS का सेक्शन 356 मानहानि के अपराध से जुड़ा है, जिसमें किसी व्यक्ति की इज़्ज़त और सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाले झूठे बयान देना शामिल है। मानहानि तब होती है जब किसी व्यक्ति के बारे में गलत जानकारी फैलाई जाती है जिससे उसकी सोशल इमेज को नुकसान पहुंचता है।
- For Example: मान लीजिए कि पंकज नाम का एक युवक ने अखबार में एक महिला के बारे भ्रष्टाचार के अपराध में शामिल होने की झूठी खबर प्रकाशित की, जबकि पंकज जानता है कि यह जानकारी झूठी है। लेकिन फिर भी उसने यह झूठी खबर प्रकाशित करके महिला की छवि को नुकसान पहुंचाता। लेकिन मामले की जांच होने पर पंकज आरोपी पाया जाता है तो उसे इस धारा के तहत सजा होगी।
बीएनएस धारा 356 की और सजा
इसके अलावा, BNS की धारा 356 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी को शांति भंग करता है या किसी व्यक्ति की इज़्ज़त और सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाले झूठे बयान देता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर 2 साल का कारावास (Simple Imprisonment) जुर्माना, या दोनों। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।



