Top 5 Dalit news: दलितों के खिलाफ अपराध या अधिकारों का हनन? देश को झकझोर देने वाली पिछले 24 घंटे की 5 बड़ी घटनाएं

Minor Dalit girl raped, Bulandshahr news
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Top 5 Dalit news: ये कैसा लोकतंत्र है, ये कैसा न्याय है, जहां आरोपी को सजा दिलाने के लिए नहीं बल्कि उसे बचाने के लिए सैकड़ो लोग सड़क पर उतर कर रैली कर रहे है.. क्योंकि आरोपी ब्राह्मण जाति से है, और पीड़ित दलित जाति से है.. तो क्या देश में ब्राहमण होने से उन्हें अपराध करने का लाइसेंस मिल जाता है.. या संविधान का कानून उन पर लागू ही नहीं होता है..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों से जुड़ी घटनाओं के बारे में जानेंगें जो आपको ये सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या वाकई में संविधान सबके लिए एक समान है.. कहीं ऐसा तो नहीं कि आधिकारों के नाम पर जातिवादियों का संरक्षण किया जा रहा है..

दलित मासूम के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पंडित के समर्थन में लोग

1, दलितो से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से है, यहां की एक घटना जो पिछले कुछ दिनों से सुर्खियों में है, लेकिन दिल को झकझोर देने वाली इस घटना ने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यूपी में आखिर कानून किसका चल रहा है, दरअसल सहारनपुर में एक पुजारी विजय पंडित ने मंदिर प्रांगण में खेल रही 10 साल की एक बच्ची के साथ अश्लील हरकतें करने की कोशिश की,.. पीड़िता किसी तरह पंडित के चंगुल से भाग गई और घर जाकर परिजनों को आपबीती बताई.. जिसके बाद तुंरत इस मामले में पुलिस वालों ने तेजी दिखाई और पंडित को गिरफ्तार भी कर लिया गया… लेकिन असली खेल तो उसके बाद शुरु हुआ।

एक मासूम बच्ची के साथ ऐसी घिनौनी हरकत की गई.. मगर यहां उसके लिए न्याय के लिए आवाज उठाने के बजाये मनुवादी सवर्ण समाज के लोग आरोपी पंडित के समर्थन में उतर गए है। सैकड़ो लोग सहारनपुर पुलिस दफ्तर के सामने हनुमान चालीसा पढ़ कर पंडित को रिहा करने की मांग कर रहे है.. सवाल ये है कि ये देश संविधान से चलता है या मनुस्मृति से.. जहां पंडित का किया गया हर गुनाह भगवान का आदेश कह कर सही साबित कर दिया जाता था… क्या आपको नहीं लगता है कि आज अगर प्रशासन इन जातिवादियों के आगे झुक जाती है तो देश में हर ब्राहमण को खुलेआम अपराध करने का लाइसेंस मिल जाय़ेगा।

रोहिणी घावरी का इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड

2, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद पर संगीन आरोप लगा कर सुर्खियां बटोरने वाली उनकी तथाकथित एक्स गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी को लेकर है, जिसने अब आजाद पर एक तरफ तो भ्रष्टाचारी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि 10 करोड़ की सांसद निधि से आजाद ने धामपुर में करोड़ो की कोठी बनाई है, कोई जनता का भला नहीं किया है, घावरी ने आजाद को अय्याश कहते हुए चेतावनी दी है कि वो जल्द नगीना आकर उसका सच वहां की जनता को बतायेगी, वहीं घावरी के इंस्टाग्राम अकाउंट के सस्पेंड होने के बाद इसका ठीकरा भी वो बीजेपी पर फोड़ रही है।

घावरी ने कहा कि अमित शाह के बेटे ने पहले ही कम अत्याचार नहीं किये, एक साल से वो एक केस तक नहीं कर पा रही है, किसी तरह से वो सोशल मीडिय़ा के जरिये न्याय पाने की कोशिश कर रही है तो बीजेपी के इशारों पर उनका इंस्टाग्राम अकाउंट सस्पेंड करवा दिया है, कुछ दिन में मेरे एक्स औऱ फेसबुक अकाउंट भी बंद हो जायेंगे..सच तो ये है कि भारत में लड़कियां अपने हक के लिए, न्याय के लिए लड़ ही नहीं सकती है। घावरी की बातो से लगता है कि वो अब भारत आकर बीजेपी औऱ आसपा से अकेले लड़ने की तैयारी में है.. अब देखना ये होगा कि घावरी खुद को सच्ची साबित कर भी पायेगी.. या ये सब केवल पब्लिसीटी स्टंट ही है।

हत्या के आरोपी को 20 साल बाद मिली सजा

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के आगरा से है, जहां मात्र 500 रूपय के लिए एक दलित युवक की निर्मम हत्या करने के एक आरोपी को 20 साल के बाद सजा का ऐलान किया गया है, और वो भी आजीवन कारावास.. कभी कभी तो ये बेहद हास्यस्पद लगता है कि भारत की कानून व्यवस्था इतनी सुस्त है कि न्याय मिलने में कई दशक गुजर जाते है,,तब तक तो न्याय की उम्मीद ही खत्म हो जाती है। ये घटना 7 जनवरी, 2007 को घटित हुई थी, जब दोषी बबलू प्रसाद ईसानपुर के रहने वाले पीड़ित तेज सिंह को अपने गांव हाजीपुर खेड़ा ले गया था, जहां दोनो ने पहले शराब पी थी, और फिर 500 रूपय की लेन देन के मामले में बहस शुरु हो गई।

जिसमें गुस्से में आकर बबलू प्रसाद ने तेज सिंह की गला दबा कर हत्या कर दी और फरार हो गया। मृतक के बेटे ने अगली सुबह अपने पिता का शव देखा था और पुलिस को जानकारी दी थी, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया गया औऱ सत्र न्यायालय ने प्रसाद को दोषी भी करार दिया था, लेकिन तब से ये मामला कोर्ट में लंबित था, और करीब 20 साल बीत गए.. लेकिन आखिरकार 20 साल बाद ही सही अलीगढ़ की एक विशेष अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि अब उसकी उम्र 65 वर्ष हो चुकी है.. वहीं 1 लाख 5 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया है। बीस साल बाद ही सही पीड़ित परिवार को न्याय तो मिला.. शायद इसे ही कहते है देर आये दुरुस्त आये। आपको क्या लगता है.. ये न्याय सहीं है।

दलित के घर खाने से माकपा नेता का सामाजिक बहिष्कार

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला हिमाचल प्रदेश के ठियोग से है, जहां पंचायत चुनाव में दो माकपा नेताओं ने एक दलित प्रत्याशी के घर खाना क्या खा लिया, जातिवादियो ने उस मसले को देव समाज का अपमान बता कर दोनो नेताओं का सामाजिक बहिष्कार करने की बात की है। ये मामला ठियोग के टियाली जिला वार्ड का है, जहां पंचायत चुनाव से पहले एक दलित प्रत्याशी के घर दो माकपा नेता रोबिन वर्मा और सोहन ठाकुर ने जाकर डिनर किया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर किसी ने वायरल कर दिया, जिसके बाद ठाकुर समाज के लोग खुल कर नहीं लेकिन दबी दबी आवाज में उनका विरोध कर रहे है। दोनो माकपा नेता ने खुद खुलासा किया है कि उनका सामाजिक बहिष्कार करने की साजिश की जा रही है।

जिसके लिए देव समाज के लोगो को भड़काया भी जा रहा है। माकपा नेताओं ने ये भी कहा कि उन्हें दुख है कि आज 75 साल से ज्यादा हो चुके है आजादी को लेकिन जातिवाद खत्म नहीं हो रहा है, लेकिन वो देव समाज से प्रार्थना करते है कि समाज को बांटने वालों से दूर रहे, उन्हें देवनीति की राजनीति से दूर रखा जायें… ये बेहद हैरानी की बात है कि जो बदलाव चाहते भी है उन्हें इतना प्रताड़ित किया जाता है कि कोई उंची जाति का बराबरी करने के बारे में सोचना ही छोड़ दें। फिर भला कहां से बराबरी होगी।

जातिगत दुश्मनी निकालने के लिए दलितो पर हमला

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के तेनकासी से है, जहां जातिगत दुश्मनी निकालने के लिए एक साथ कई दलित लोगो पर दरांती से हमला कर दिया गया..रोंगटे खड़े कर देने वाला ये मामला तमिलनाडु के तेनकासी में घटित हुई है, जहां बिना नंबर प्लेट वाले तीन दोपहिया वाहनों पर सवार होकर कई लोग तेनकासी जिले के नेत्तूर गांव की मथाकोविल स्ट्रीट पहुंचे औऱ वहां मौजूद अनुसूचित जाति-ईसाई  के लोगो पर अँधाधुंद हमला कर दिया, जिसमें कई लोग बुरी तरह से घायल हो गए, घायलो को जिले के कई अस्पताल पहुंचाया गया।

इसी तरह की घटना मार्च में तिरुनेलवेली में घटित हुई थी जिसमें एक व्यक्ति की मौत भी हो गई..लगातार दलितों पर होने वाले हमलो से गुस्साएं लोगो ने अलंगुलम-रेड्डीआरपट्टी रोड  पर चक्का जाम कर दिया था, लेकिन पुलिस ने किसी तरह स उन्हें समझा लिया है औऱ आश्वासन दिया है कि आरोपी जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होंगे। हैरानी की बात है कि करीब 2 महीने पहले हुए हमलों में भी अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, ऐसे में देखना ये होगा कि क्या इस हमले  के बाद पुलिस नींद से जागती है।

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