क्या पेरियार ने अपनी ही बेटी से शादी की थी? जानिए इस दावे की सच्चाई

Periyar.
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ईरोड वेंकटप्पा रामास्वामी नायकर, जिन्हें आप पेरियार या ईवीआर के नाम से जानते है, उन्होंने समाज में जातिगत भेदभाव के खिलाफ आत्मसम्मान आंदोलन शुरु किया था बल्कि द्रविड़ कगजम की स्थापना कर द्रविड़ राजनीति के जनक रूप में खुद को स्थापित किया था। भारत में वामपंथी राजनीति को बढ़ावा देने में भी पेरियर की भूमिका काफी विवादों में रही है.. पेरियार ब्राह्मणवादी विचारधारा के सख्त खिलाफ थे और अलग द्रविड़ नाडु (द्रविड़ लोगों की भूमि) की वकालत करते थे। लेकिन पेरियार जितने बड़े समाजसुधारक और राजनीतिज्ञ थे, उनके साथ विवाद भी उतने ही घिरे रहते थे।

अखिलेश त्रिपाठी का दावा पेरियार ने अपनी ही बेटी से शादी की

जिसमें सबसे बड़ा विवाद उनसे जुड़ा है कि पेरियार ने अपनी ही बेटी से शादी की थी। सोशल मीडिय़ा पर पेरियार को लेकर तरह तरह की नेगेटिव बातें कहीं गई.. इलाहाबाद हाई कोर्ट के सीनियर वकील अखिलेश त्रिपाठी ने दावा किया कि 70 साल के पेरियार ने अपनी 40 साल की बेटी से शादी कर ली थी, केवल अपनी काम वासना को पूरा करने के लिए.. पेरियार जैसा व्यक्ति किसी का आदर्श नही हो सकता है औऱ न जाने क्या क्या.. लेकिन सवाल ये उठता है कि इन दावो की सच्चाई क्या है। क्या है पेरियार की अपनी बेटी से शादी करने के पीछे का सच।

पेरियार की बेटी की मौत

पेरियार तमिलनाडु के ईरोड में एक धनी व्यापारी परिवार से थे, जिनका जन्म 17 सितंबर 1879 को हुआ था। घर में धार्मिक माहौल था लेकिन समाज में होने वाले भेदभाव के कारण पेरियार जल्द ही नास्तिक बन गए। जब वो 19 साल के थे तो घरवालों की मर्जी से उन्होंने 14 साल की  नागम्मा  से शादी की थी। नगम्मा बेहद खुशमिजाज महिला थी.. दोनो की शादीशुदा जिंदगी और खुशनुमा हो गई जब उनकी बेटी ने जन्म लिया.. लेकिन 5 महीने के बाद ही पेरियार की बेटी की मौत हो गई। पेरियार की उसके बाद कोई औलाद नहीं हुई और न ही उन्होंने दुसरा विवाह किया.. 1933 में नागम्मा के निधन हो गया, और पेरियार पूरे तरह से अकेले थे, बावजूद इसके वो शादी नही करना चाहते थे। और अपना जीवन समाज सेवा में लगाना चाहते थे।

कनागासाबाई पेरियार की विचारधारा को फॉलो करने लगी

पेरियार पहले कांग्रेस का हिस्सा थे लिए उन्हें धीरे धीरे अहसास हुआ कि कांग्रेस ब्राह्मणी विचारधारा की गुलाम है, बस उन्होंने 1919 में कांग्रेस की सदस्यता छोड़कर द्रविड कष्गम नाम की नई पार्टी का गठन किया। इस पार्टी से जुड़ी थी 20 साल की मनियम्मई.. मनियम्मई जस्टिस पार्टी की सदस्य कनागासाबाई की बेटी थीं , और पेरियार की एक बड़ी समर्थक थी, और आत्म-सम्मान आंदोलन में उन्होंने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया था। लेकिन जब कनागासाबाई का निधन हो गया तब मनियम्मई ने द्रविड़ कज़गम पार्टी को अपना लिया, और पेरियार के विचारधारा को ही फॉलो करने लगी। मनियम्मई ने 20 साल की उम्र में ही पिता को खो दिया था, और महिलाओ के प्रति समाज की सोच और भावनायें उन्हें हमेशा से परेशान करती थी।

मनियम्मई का फैसला आजीवन विवाह नहीं करना

जिसका नतीजा ये हुआ कि मनियम्मई ने आजीवन विवाह न करने का फैसला किया.. वो कहती थी कि वो उस समाज की नीति नियमों को कभी नहीं मानेंगी, जिसे समाज ने महिलाओं के लिए निर्धारित किया था। पेरियार मनियम्मई में अपना एक ऐसा उत्तराधिकारी देखने लगे थे जो उनके जाने के बाद द्रविड़ कष्गम के आदर्शों के प्रति खुद को समर्पित करें, जो चेयरमैन के तौर पर पद का भार संभाल सकें और पेरियार के ट्रस्ट और व्यक्तिगत संपत्ति के भी अधिकार किसी को मिल जायें। मनियम्मई उनके साथ रह कर उनकी देखभाव करती थी, जिसके कारण पेरियार ने तय किया कि वो उनसे दूसरी शादी करेंगे, जिसके बाद 1948 में पेरियार ने मनियम्मई से दूसरी शादी की थी। उस वक्त पेरियार करीब 70 साल के थे औऱ मनियम्मई करीब 30 साल की।

पेरियार ने खुद बतायी इसकी वजह

पेरियार ने खुद अपने अखबार विदुतलाई में मनियम्मई ने शादी करने की वजह बताई थी, इसलिए इस बात में कोई शसंय नहीं था कि ये शादी प्रेम या वासना के कारण नहीं की गई थी बल्कि जिम्मेदारी के कारण की गई थी। हालांकि इस शादी के कारण अन्नादुरैई काफी नाराज हो गए और द्राविण कष्गम  पार्टी में टूट पड़ गई, इतना ही नहीं अन्नादुरई ने द्रविड़ मुनैत्र कषगम (डीएमके) नाम की एक दूसरी पार्टी बनाई, जिसमें पेरियार के जुड़े कई बड़े लोग उनसे अलग होकर डीएमके में चले गए। 24 दिसंबर 1973 के दिन पेरियार की मौत के बाद मनियम्मई दव्रिड़ कगझंम की अध्यक्ष चुनी गई थी, जिन्होंने इंदिरा गाँधी के खिलाफ इनरजेंसी का खुल कर विरोध किया था।

हालांकि 16 मार्च 1978 को मात्र 61 साल की उम्र में उनका निधन हो गया.. इस सच्चाई से पता चलता है कि पेरियार की भले ही एक बेटी थी लेकिन वो बचपन में ही मर चुकी थी, और मनियम्मई उनकी बेटी नहीं थी.., उन्होंने उनसे शादी भी इसीलिए की थी क्योंकि वो मनियम्मई को अपना उत्तराधिकारी बना सकें, क्योंकि  उत्राधिकारी बनने के लिए या तो वैवाहिक संबंध होना चाहिए था या खून का संबंध। मनियम्मई पेरियार की नीजि सचिव थी और द्रविड़ड कृष्णम का एक अहम हिस्सा थी। इसलिए पेरियार को बदनाम करने की ये केवल साजिश मात्र थी..जिसका सच सबको जानना चाहिए।

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