Top 5 Dalit news: दलितो को कमजोर समझ कर अक्सर उनपर अत्याचार करने वाले ये भूल जाते है कि जब एक शरीफ शराफत छोड़ता है तो उनसे ज्याद खतरनाक कोई नहीं होता है, वैसे दलित अब कमजोर नहीं है.. ये बताने का समय आ गया है। तो चलिए आपको आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओ के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है, जो ये बताती है कि दलितों को अब अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी..
भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद भी बैठे धरने पर
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जिन्होंने जंतर मंतर पर पुलिस की बर्बरता का जवाब देने के लिए खुद की बाबा साहब की प्रतिमा के नीचे तंबू गाड़ कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। आज 21 जुलाई को भीम आर्मी की स्थापना की गईं थी, वहीं 20 जुलाई को संसद तक मार्च करने से रोकने के लिए पुलिस वालों ने भारी बल का प्रयोग छात्रों पर किया, जिससे शांत करने के लिए आजाद ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर कोई आप पर लाठी बरसायेगा तो आप उल्टा जवाब दीजिए, अब समय बर्दाश्त करने का नहीं बल्कि ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा। आजाद ने खुद वहां बैठकर ये संदेश दे दिया है कि ये आंदोलन इतनी आसानी से खत्म नहीं होने वाला है। आजाद खुद छात्रों के प्रदर्शन और संसद तक मार्च के लिए जंतर मंतर पहुंचे थे, लेकिन वहां पुलिस ने उन्हें संसद तक पहुंचने की नहीं दिया था, बावजूद इसके छात्रों का हौसला कमजोर नहीं हुआ। वो अब भी वहां टिके हुए है, और अपनी मांगो पर अडिग है , वहीं आजाद के सक्रिय होने के बाद भारी भीड़ जमा होने लगी है। किसी ने नहीं सोचा था कि ये आंदोलन जो छात्रों ने अपने साथ हुए अन्याय के लिए किया था वो इतना व्यापक हो जाएगा। अब देखना ये होगा कि आजाद के भी धरना प्रदर्शन पर बैठने के बाद क्या सरकार की तरफ से कोई प्रतिनिधि आता है या नहीं।
तमिलनाडु में दलित इसाईयों को मिला बड़ा हक
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के त्रिचि से है, जहां करीब 20 सालों से दलित ईसाई को सार्वजनिक कब्रिस्तान में दफनाने की लड़ाई दलित ईसाईयों ने जीत ली है। ये खबर त्रिचि जिले के कोट्टापलयम गांव का है, जहां कैथोलिक कब्रिस्तान में केवल कैथोलिक लोगों के शवों को ही दफनाने की परमिशन थी, वहीं जो दलित धर्म बदल कर ईसाई बने है, उन्हें उनकी जाति के कारण वहां दफनाने नहीं दिया जाता था, जिसे लेकर दलित ईसाइयों का संघर्ष जारी था, लेकिन करीब बीस सालों के बाद उनकी बराबरी की लड़ाई खत्म हो गई और दलितों को अब से कैथोलिक कब्रिस्तान में दफनाने की परमिशन मिल गई। वहीं सार्वजनिक कब्रिस्तान पर गांव के प्रभावशाली रेड्डी समुदाय के लोगों ने कब्जा कर रखा है, और वो लोग किसी भी स्थिति में दलित ईसाइयों को कब्रिस्तान में शव नहीं दफनाने देते है, जिस कारण एक रिटायर्ड शिक्षक ए वृद्धाश्रम का शव पिछले तीन दिनों से ऐसे ही अंतिम संस्कार के इंतजार में पड़ा था, लेकिन कैथोलिक कब्रिस्तान में जगह मिलना दलितों की पहली जीत कही जा सकती है। वहीं दलित ईसाइयों का संघर्ष सरकार से भी जारी है, जहां वो अपने लिए एससीएसटी एक्ट के तहत मिलने वाले लाभ को उन्हें भी देने की मांग कर रहे है, लेकिन कोर्ट इसके लिए राजी नहीं है। मगर इस जीत से कहीं न कहीं ये जरूर उम्मीद जागेगी कि उन्हें आगे न्याय जरूर मिलेगा।.
फतेहपुर में दलित प्रधान के साथ मारपीट
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से है, जहां एक दलित प्रधान ने सार्वजनिक तालाब की पैमाइश क्या की, एक जातिवादी को ये इतना नागवार गुजरा कि उस शख्स ने प्रधान के ओहदे की चिंता किए बिना उसे जातिसूचक गालियां दी और उसके साथ मारपीट की। हैरानी की बात तो ये है कि आरोपी ने ये भी नहीं सोचा कि प्रधान तो केवल सरकारी काम कर रहा है। ये मामला फतेहपुर जिले के हुसैनगंज थाना क्षेत्र के गणेशपुर गांव का है। दलित जाति से आने वाले प्रधान नरेश रैदास ने पुलिस को तहरीर दी कि पुरवा का कंधई में सरकारी इंटरलॉकिंग के लिए ट्रैक्टर से सीमेंटेड ईंटें ले कर जा रहा था, तभी वहां गांव का ही एक युवक पहुंच गया, दलित समाज से प्रधान होने के कारण वैसे ही गांव के कुछ ऊंची जाति के लोग उसे पसंद नहीं करते है, और जब पैमाईश में आरोपी का घर भी तालाब के जोन में आ गया तो वो और नाराज हो गया जायक बाद वो प्रधान को ही जातिसूचक गालियां देने लगा। लेकिन अगले दिन जब प्रधान पैमाईश करने के लिए तालाब पर पहुंचा तो आरोपी ने फिर से उसे गालियां दी, जिसका विरोध करने पर प्रधान के साथ मारपीट शुरू कर दी गई, जिसके उसका हाथ टूट गया है और उसे गंभीर चोटें आई है साथ ही उसे जान से मारने की धमकी भी दी। प्रधान ने जब इस मामले में पुलिस ने मदद मांगी तो पुलिस वालों ने उनकी शिकायत तक नहीं सुनी, आरोपी काफी दबंग किस्म का है जिससे डर कर पुलिस उसे भिड़ना नहीं चाहती है। हैरानी की बात है एक प्रधान होकर भी जातिगत भेदभाव से वो नहीं बच सका, और पुलिस भी उसके साथ न्याय नहीं कर पा रही है। फिर कैसे यूपी की कानून व्यवस्था के गुण गए जाते है।
नैनीताल में प्यार का झांसा देकर दलित महिला का यौन उत्पीड़न
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तराखंड के नैनीताल से है, जहां एक दलित महिला को ऊंची जाति के एक युवक ने प्यार के जाल में फंसाया, फिर शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया और जब पीड़िता गर्भवती हो गई तो युवक ने पीड़िता को छोड़ दिया। ये मामला नैनीताल के हल्द्वानी थाना क्षेत्र से है, पीड़िता ने पुलिस को तहरीर दी कि अल्मोड़ा के रहने वाले एक शख्स से उनका लंबे समय से प्रेम सम्बन्ध था, पीड़िता दलित जाति से है और आरोपी ब्राह्मण है। बावजूद इसके आरोपी ने पीड़िता से शादी का वादा किया और उससे शारीरिक संबंध बनाए, लेकिन जब पीड़िता दो महीने की गर्भवती हो गई तो आरोपी ने शादी से साफ इनकार कर दिया। जिसके बाद पीड़िता न्याय के लिए पुलिस थाने पहुंची। पुलिस ने तुरंत आरोपी प्रेमी को धर दबोचा, जिसके बाद पीड़िता ने थाने में पहुंच कर काफी बहस भी की। काफी समझाने के बाद आरोपी शादी के लिए मान तो गया लेकिन अब उसके घर वाले राजी नहीं है। पूरे थाने में हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ और युवती आरोपी से शादी करने पर अड़ी हुई है, वहीं पुलिस परिवार को समझाने की कोशिश कर रही है, अगर ये शादी नहीं होती है और पीड़िता ने लिखित तहरीर दे दी तो आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही होगी। ऐसे में देखना ये होगा कि क्या घरवाले अंतरजातीय विवाह के लिए हामी भरेंगे, या धोखेबाज प्रेमी को सजा मिलनी चाहिए।
चिराग पासवान ने भी पंजाब राजनीति में की एंट्री
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला 2027 में होने वाले पंजाब के विधानसभा चुनावों को लेकर है, जहां दलितों को साधने औऱ कांग्रेस का समीकरण बिगाड़ने के लिए, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) भी पंजाब के चुनावी रण में उतरने को तैयार है। पंजाब की दलित जनता का ध्यान खींचने के लिए चिराग पासवान खुद अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में मत्था टेकने पहुंचे थे, इस दौरान उन्होंने केसरिया रंग की पगड़ी पहनी थी, जो इशारा है कि बीजेपी को इनडायेरेक्टली समर्थन देने के लिए तैयार है। चिराग पासवान ने सीधे तौर पर कहा कि स्वर्ण मंदिर में आशीर्वाद लेकर उन्होंने चुनावी रथ को आगे बढ़ाने का काम शुरु कर दिया है, हम केवल राज्य की जनता की सेवा और उन्हें एक एकजुट करने के लिए लड़ रहे है। चिराग पासवान ने डेरा सचखंड बल्लान, भगवान वाल्मिकी स्मारक और जालंधर में बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को पुष्पांजलि अर्पित कर संदेश दे दिया है कि वो बिहार की लहर पंजाब में भी लाने की तैयारी में है, और उनका मुख्य टारगेट दलित और पिछड़े ही होने वाले है। हालांकि ये देखने वाली बात होगी कि क्या पंजाब की जनता नए लोगो को स्वागत करेगी या उनकी छुट्टी होगी।



