पति या ससुराल वालों की क्रूरता पर लगेगी BNS की धारा 85, जानें क्या है कानून – BNS section 85

BNS Section 85
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BNS section 85: भारत में घरेलू हिंसा के खिलाफ़ बहुत सख़्त कानून हैं, फिर भी इसके सालाना आँकड़े चिंताजनक बने हुए हैं। भारत सरकार के ‘नेशनल फ़ैमिली हेल्थ सर्वे-6’ (NFHS-6) 2023-24 की एक रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में लगभग 22.3 प्रतिशत महिलाएँ अपने पतियों या रिश्तेदारों के हाथों घरेलू हिंसा का शिकार हुईं। वहीं, ‘नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो’ (NCRB) और ‘वीमेन एंड मेन इन इंडिया’ रिपोर्ट के आँकड़े और भी चौंकाने वाले हैं; इनसे पता चलता है कि हर साल 31 से 38 प्रतिशत महिलाएँ घरेलू हिंसा का सामना करती हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इनमें से 80 प्रतिशत महिलाएँ यह समझ ही नहीं पातीं कि वे जिस स्थिति से गुज़र रही हैं, वह घरेलू हिंसा की श्रेणी में आती है। नतीजतन, इतनी ज़्यादा हिंसा के बावजूद, पुलिस के पास केवल 1 से 2 प्रतिशत मामलों की ही रिपोर्ट दर्ज होती है। साफ़ है कि समाज का डर—”लोग क्या कहेंगे?”—और बच्चों की देखभाल की चिंताएँ ऐसी बेड़ियाँ बना देती हैं जो अक्सर दुर्व्यवहार को एक “अधिकार” के तौर पर सही ठहराती हैं, जिससे हिंसा करने वाले आसानी से जवाबदेही से बच निकलते हैं। आइए समझते हैं कि असल में घरेलू हिंसा क्या है।

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क्या कहती है BNS की धारा 85

भारतीय न्याय संहिता, 2023 में किए गए बदलावों के बाद, धारा 85 के तहत विवाहित महिला के साथ शारीरिक और मानसिक क्रूरता को एक आपराधिक अपराध माना गया है और इसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इस अपराध में कई तरह की हरकतें शामिल हैं, जैसे शारीरिक चोट या मानसिक सदमा पहुंचाना, बेइज्ज़ती करना, डराना-धमकाना, यौन उत्पीड़न और आर्थिक शोषण (जैसे ज़रूरी ज़रूरतों के लिए पैसे न देना)। इसमें महिला को उसके परिवार से अलग-थलग करना या दूसरों से मिलने से रोकना, घर के कामों को लेकर परेशान करना या काम न करने पर प्रताड़ित करना, बच्चे पैदा करने का दबाव डालना, दहेज के लिए परेशान करना और पत्नी को उसके वैवाहिक घर से गैर-कानूनी तरीके से या ज़बरदस्ती निकालना भी शामिल है। अगर किसी महिला के साथ उसका पति या ससुराल वाले ऐसा व्यवहार करते हैं, तो यह धारा 85 का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अलावा, अगर कोई महिला अपने ही घर में सुरक्षित महसूस नहीं करती है, तो कानून उसे कानूनी सुरक्षा पाने का अधिकार देता है।

जानें आरोपी को कितने साल की होगी सजा

यदि महिला अपने साथ होने वाले व्यावहार और उत्पीड़न के लिए ससुराल वालो के खिलाफ मामला दर्ज करा देती है तो जिनके जिनके नाम एफआईआर में दर्ज होंगे उन्हें कानून के शिकंजे से कोई नहीं बचा सकता है। धारा 85 को एक जमानती अपराध की श्रैणी में रखा जाता है। यानि की अगर महिला ने धारा 85 के तहत मामला दर्ज कराया तो आरोपियों को जमानत तो हो सकती है लेकिन फिर भी ये संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) माना जाता है, इसलिए पुलिस बिना वारंट के ही आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है। वहीं आरोपी गिरफ्तारी होने के बाद मैजिस्ट्रेट या संबंधित न्यायलय में अर्जी दे सकते है, जहां पूरी तरह से कोर्ट के फैसले पर निर्भर करता है कि आरोपी की जमानत होगी या नहीं। वहीं धारा 85 के तहत अगर कोई दोषी पाया जाता है तो आरोपी को 3 साल की सजा और जुर्माना लगाया जाता है। वही महिला के साथ किस तरह की क्रूरता की गई है, उसे देखने के बाद इस पर और अपराधिक धारायें लगाई जा सकती है।

हालांकि भले ही ये अपराध गैर जमानती है लेकिन महिला द्वारा लगाये गए आरोप सही ये है नहीं ये साबित होना चाहिए उसके लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गाइडलाइन जारी की गई, जिसके मुताबिक 7 साल के कम सजा वाले सभी अपराधों में पुलिस सीधे आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकती है.. उसके लिए पुलिस को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 85 के तहत आरोपी पक्ष को पहले नोटिस जारी करना होगा.. जिसनें उनके पुलिस द्वारा की गई जांच में सहयोग मांगा जाता है। अगर आरोपी पक्ष जांच में सहयोग करता है तो गिरफ्तारी करने के बजाय पहले जांच होगी, अगर तब भी आरोप सिद्ध होता है तो ही गिरफ्तारी होगी। हालांकि महिला की स्थिति बेहद खराब है तो पुलिस किसी वारंट के ही आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है। इस मामले में आरोपी अग्रिम जमानत के लिए भी अप्लाई कर सकता है। इसी के साथ बता दै कि बीएनएस की धारा 85 के तहत कार्यवाई होती है लेकिन उससे पहले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498a के तहत मामले दर्ज होते थे लेकिन बीएनएस लागू होने के बाद अब धारा 85 के अंतर्गत आता है।

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