Top 5 Dalit news: कहीं FIR के लिए 5 साल, कहीं जातीय भेदभाव… दलितों पर अत्याचार के 5 मामले

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Top 5 Dalit news: कहते है कि न्याय सबके लिए बराबर है.. फिर ऐसा क्यों है कि जब बात दलितों की आती है तो न्याय कब मिलेगा, इसकी चिंता करने से पहले इसकी चिंता करनी पड़ती है कि पुलिस उनका मामला भी दर्ज करेगी या नहीं.. कहीं पुलिस भी उन्हें दलित पिछड़ा कह कर दुत्कार तो नहीं देगी। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो समाज की उस व्यवस्था पर सावल उठाता है, जहां न्याय पर भरोसा करने के लिए कहा जाता है.. लेकिन कहने वाले ही भरोसा नही करते।

बस्ती में दलित उत्पीड़ना का मामला दर्ज कराने में 5 साल लगे

1, दलितो से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के बस्ती से है.. यूपी में दलितो की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि एक पीड़ित परिवार को केवल मामला दर्ज कराने में ही 5 सालो का लंबा समय लग गया.. तो जरा सोचिये.. उसे न्याय मिलने में कितनी पुश्तें बीतेंगी। जी हां, ये मामला है बस्ती के वाल्टरगंज पुलिस थाना क्षेत्र के गणेशपुर का.. जहां दलित जाति से आने वाली रीना देवी और उनके पति राजेश कुमार सोनकर पिछले 5 सालो से अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ केवल मामला दर्ज कराने के लिए ही दर दर भटक रहे है। पीड़िता के मुताबिक 26 मई 2021 के दिन उसके घर के सामने लगे दो हरे भरे पेड़ो को ठेकेदार दुर्गेश चौबे ने एक पुलिस वाले विनोद के साथ मिलकर बिना परमिट के ही काट दिया..जब पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया तो आरोपी जातिसूचक गालियां देने लगे, इतना ही नहीं वो जबरन पीड़िता का मुंह कराने के लिए उसके पति को थाने ले गए.. औऱ झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी दी। पीड़िता ने इन सबकी शिकायत सीएम पोर्टल से लेकर जिला अधिकारियों से भी की, लेकिन सभी जगह से निराशा ही हाथ लगी। करीब 5 सालो तक संघर्ष करने के बाद एससीएसटी एक्ट की अदालत में याचिका दाखिल की.. जिसके बाद करीब 5 सालो से भी ज्यादा समय के बाद दोनो मुख्य आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया और इस मामले की जांच शुरु की गई है। अब देखना ये होगा कि 5 साल केवल मामला दर्ज कराने में तो न्याय में कितने साल लगेंगे।

कर्नाटर के रायचूर में दलित उत्पीड़न

2, दलितो से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के रायचूर जिले से है, जहां एक में खाना खाने के बाद एक दलित युवक को उसकी जाति के कारण पीने के लिए पानी ग्लास में देने के बजाय अलग से हाथों में डाल कर पिलाया गया। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आ रहा है जिसके बाद जातिगत भेदभाव का ये मामला तूल पकड़ने लगा है। दरअसल वीडियो के अनुसार ये घटना करीब 3 महीने पहले घटित हुई थी..रायचूर के लिंगासगुर पुलिस थाना क्षेत्र में शरणप्पा हडपाड़ा नाम का शख्स एक होटल चलाता है.. जहां 3 महीने पहले पीड़ित भी खाना खाने गया था। जहां होटल मालिक और उसके एक कर्मी ने उसके साथ ऐसा व्यावहार किया था.. जिसे रिकॉर्ड भी किया गया था,, लेकिन पीड़ित ने इस मामले को दबा दिया था,, मगर 3 महीने के बाद अचानक आऱोपी के खिलाफ एससीएसटी एक्ट के तहत भेदभाव करने को लेकर शिकायत दर्ज की गई.. इतना ही नहीं साक्ष्य के तौर पर ये वीडियो भी सामने आया.. जिसके बाद आरोपी के खिलाफ कई सगीन धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई है। वहं आरोपी पक्ष का कहना है ये उन पर लगे ये इल्जाम झूठ है.. अब देखना ये होगा कि जांच के बाद क्या सामने आता है।

अपहरण और हत्या मामले में एक आरोपी को आजीवन कारावास

3, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के ही बुलंदशहर से है, जहां दो महिलाओं को अपनी कार से कुचलने और एक बच्ची का अपहरण करने की कोशिश के मामले में करीब 7 सालो को बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला औऱ आरोपी को आजीवन कारावास। ये घटना 25 जून 2019 को घटित हुई थी, जब बुलंदशहर के  चांदपुर गांव में धर्मेंद्र सिंह के घर लड़की की शादी थी, इस दौरान मुख्य आरोपी नकुल ठाकुर और उसका एक साथ अपनी गाड़ी से शादी समारोह के आसपास घूम रहे थे, जहां उन्होंने नशे की हालत में एक दलित लड़की को अगवा करने की कोशिश की थी, लेकिन जब वहां भीड़ जमा होने लगी तो वो कार से तेजी से फरार होने की कोशिश करने लगे.. और कुछ देर बाद तेजी से वापिस आये औऱ बाहर खड़े लड़की के परिवार वालो पर गाड़ी चढ़ा दी.. जिसमें 2 महिलाओं की मौत हो गई। शादी का माहौल मातम में बदल गया था.. जिसके बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई थी। करीब 7 सालो से मुकदमा कोर्ट में चल रहा था.. औऱ 17 फरवरी 2024 को मुख्य आरोपी की मौत हो गई थी, लेकिन अब एससी एसटी कोर्ट  ने दूसरे आरोपी ओमेंद्र को दोषी ठहरा कर आजीवन कारावास की सजा और 51 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया है।

रोहिणी घावरी ने भारत आते ही एक्शन अपनाया

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद की कथित एक्स प्रेमिका रोहिणी घोवरी को लेकर है, जो आखिरकार 1 साल के तमाम हंगामों के बाद भारत वापिस आ ही गई है.. और जैसा कि वो पहले ही ऐलान कर चुकी थी, उन्होंने आते ही आजाद की फिल्डिंग सेट कर दी है.. घावरी को समर्थन करने के लिए सवर्ण समाज तक एकजुट हो कर खड़ा है। वहीं घावरी ने आजाद को दोहरा चरित्र का व्यक्ति कहते हुए कहा कि जब तक वो सांसद नही थे तब तक उनकी सख्सियत अलग थी और जब से वो बीजेपी की मेहरबानी से सांसद बना.. उनके सुर ही बदल गए। घावरी ने आजाद को गरजने वाला बादल कहते हुए कहा कि पिछले 2 साल की सांसदी में आजाद ने एक भी काम अपने समाज के लिए नहीं किया। वहीं घावरी ने आजाद की पत्नी को भी इस मामले घसीटते हुए कहा कि उसकी पत्नी ने देखा है कि वो कैसे दूसरी महिलाओ के साथ व्यावहाहर कर रहा है, अन्याय कर रहा है लेकिन अगर वो शांति से देख रही है तो साफ है कि वो भी आजाद के इन कुकृत्य में बराबर की भागीदार है। साथ ही उन्होंने आजाद को गली का नेता कहते हुए कहा कि जब वो 2019 में जेल में सड़ रहा था, तो मुझे स्कॉलरशिप मिली थी.. मुझे अपना नाम बनाने के लिए आजाद जैसे लोगों की जरूरत नहीं है..यूएन के चौखट पर वो वाल्मिकी समाज की बेटी बन कर गई थी.. और किसी नेता ने नहीं इस बेटी ने देश का नाम रोशन किया है। घावरी ने आते ही एक्शन मोड ऑन कर दिया है। ऐसे में देखना ये होगा कि विधानसभा चुनावो  पहले आजाद ने जो छवि एक दलित मसीहा की बनाई है.. उस छवि को घावरी कितना तोड़ पाती है।

चैन्नई में बंधुआ मजदूरी का मामला

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के चैन्नई से है, जहां एक दलित परिवार को जबरन बंधुआ मजदूर बनाने का संगीन मामला सामने आया है.. इतना ही नहीं बंधुआ मजदूरी के कारण पीड़ित की गर्भवती पत्नी की मौत हो गई लेकिन आरोपी ने तब भी पीड़ित की मदद नही की.. ये घटना चैन्नई के कांचीपुरम के पोन्नरीकराई पुलिस थाना क्षेत्र के वेल्लाई गेट इलाके का है। 45 साल के पीड़ित आनंद ने पुलिस थाने में अपने मालिक अरुमुगम के खिलाफ मामला दर्ज कराते हुए बताया कि उसने 6 महीने पहले कुछ पैसे लिये थे और उसके बदले वो उसके यहां लकड़ी काटने का काम करता था.. उसके साथ उसकी गर्भवती पत्नी भी रहती थी.. वो अपने मालिक के पास ही झोपड़ी बना कर रहता था लेकिन 6 महीने काम करने के बाद जब पीड़ित ने चावल लाने के लिए पैसे मांगे तो आरोपी ने उस पर हमला कर दिया, उसे जातिगत गालियां दी.. यहा तक कि उसकी पत्नी थेनोमोजी को पेट दर्द की शिकायत हुई तो भी आरोपी ने पीड़ित को मेडिकल चेकअप के लिए भी ले जाने की परमिशन नहीं दी.. वहीं रात में उसके पेट में बहुत तेज दर्द उठा तो भी उसकी मदद नही की गई औऱ मां और बच्चे दोनो की मौत हो गई.. इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने एससीएसटी एक्ट और बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई है। पुलिस ये भी जांच कर रही है क्या जानबूझ कर चिकित्सा देखभाल से दूर रखा गया था.. अगर ये साबित होता है तो आरोपी औऱ उसकी मां दोनो को जेल जाना पड़ेगा। अब देखना ये होगा कि क्या पीड़ित को वाकई में न्याय मिलेगा।

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