Basti: हाल ही में उत्तर प्रदेश के बस्ती से चौकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक दलित दम्पति ने पेड़ काटने का किया विरोध किया तो मनुवादियों ने उन्हें बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया; साथ ही, उन्होंने जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल करके दलित जोड़े को अपमानित भी किया।
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दलित उत्पीड़न का मामला दर्ज कराने में 5 साल लगे
कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं; ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बस्ती से है। यूपी (Uttar Pradesh) में दलितो की स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि एक पीड़ित परिवार को केवल मामला दर्ज कराने में ही 5 सालो का लंबा समय लग गया.. तो जरा सोचिये.. उसे न्याय मिलने में कितनी पुश्तें बीतेंगी। जी हां, ये मामला है बस्ती (Basti) के वाल्टरगंज पुलिस थाना (Walterganj Police Station) क्षेत्र के गणेशपुर (Ganeshpur) का.. जहां दलित जाति से आने वाली रीना देवी और उनके पति राजेश कुमार सोनकर पिछले 5 सालो से अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ केवल मामला दर्ज कराने के लिए ही दर दर भटक रहे है।
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पेड़ काटने के विरोध में मारपीट का आरोप
पीड़िता के मुताबिक 26 मई 2021 के दिन उसकेघर के सामने पीडब्ल्यूडी सड़क किनारे दो हरे भरे पेड़ो को ठेकेदार दुर्गेश चौबे ने एक पुलिस वाले विनोद के साथ मिलकर बिना परमिट के ही काट दिया। जब पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया तो आरोपी जातिसूचक गालियां देने लगे, इसी दौरान सादे कपड़ों में मौजूद तत्कालीन गनेशपुर चौकी के सिपाही विनोद ने उनके पति राजेश कुमार सोनकर के साथ मारपीट की और उन्हें जबरन चौकी ले जाकर हिरासत में रखा। इतना ही नहीं झूठे मामलों में फंसाने की धमकी भी दी। पीड़िता ने इन सब की शिकायत सीएम पोर्टल से लेकर जिला अधिकारियों से भी की, लेकिन सभी जगह से निराशा ही हाथ लगी।
करीब पाँच साल तक संघर्ष करने के बाद, SC/ST एक्ट कोर्ट में एक याचिका दायर की गई; इसके बाद—पाँच साल से ज़्यादा समय बीतने पर—दो मुख्य आरोपियों के खिलाफ़ मामला दर्ज किया गया और जाँच शुरू हुई। अब पुलिस कोर्ट के आदेश और पीड़ित की शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर जाँच कर रही है। यह देखना बाकी है कि न्याय मिलने में कितने साल लगेंगे, क्योंकि सिर्फ़ मामला दर्ज होने में ही पाँच साल लग गए।



