Andhra Pradesh: शादी का झांसा देकर दलित युवती का यौन शोषण, 7 साल बाद आरोपी को उम्रकैद

Andhra Pradesh news, Dalit girl rape
Source: Google

Andhra Pradesh: हाल ही में मामला आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के विशाखापत्तनम से इंसानियत को शर्मशार करने वाला ममला सामने आया  है जहां एक दलित महिला को शादी का झांसा दे कर पहले तो आरोपी ने बार बार उसका यौन शोषण किया, लेकिन जब पीड़िता ने उसपर शादी का दवाब बनाया तो आरोपी न केवल शादी से मुकर गया बल्कि उसने और उसके परिवार वालों ने पीड़िता को जातिसूचक गालियां दी और जान से मारने की धमकी भी दी।

और पढ़े: Meerut: ललिता गौतम केस में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गैर-जमानती धाराएं हटाईं गईं

कोर्ट ने सुनाई उमर्कैद की सजा

दलित महिलाओं के ख़िलाफ़ अत्याचार मारपीट, प्यार का झांसा देकर फंसाना और शादी का बहाना बनाकर यौन शोषण करना मनो की दबंगों के लिए —आम बात हो गई है। अक्सर दलित महिलाओं से जुड़ी ऐसी ही चौंकाने वाली ख़बरें रोज़ाना सामने आती हैं; ऐसी ही एक घटना विशाखापत्तनम (Visakhapatnam) (विज़ाग) के MR पेटा पुलिस स्टेशन (Police Station) इलाके से सामने आई है। वही विशाखापत्तनम की एक अदालत ने शादी का झांसा देकर एक दलित महिला के साथ रेप करने के आरोप में Ch. जगदीश्वर राव (32) को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है।

और पढ़े: Top 5 Dalit news: चंद्रशेखर आजाद के धरने से लेकर तमिलनाडु की ऐतिहासिक जीत तक

आरोपी पर लगाया 2.5 लाख रुपए का जुर्माना

दरअसल, पहली बार साल 2019 में ही ये मामला सामने आया था। जब 22 साल की पीड़िता ने अपने लिए न्याय की गुहार लगाई जिसके बाद पुलिस ने तुरंत आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही की। इस मामले में धोखा देने वाले आरोपी जगदीश्वर राव को गिरफ्तार कर लिया था। जिसके बाद से ये मामला कोर्ट में लंबित था और लगातार सुनवाई जारी थी।  वही अब इस मामले को लेकर विशाखापत्तनम की एक अदालत ने आखिरकार 7 सालों बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई है साथ ही उसपर 2.5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

अन्य आरोपी के खिलाफ 10 हजार रुपए का जुर्माना

इतना ही नहीं पीड़िता का जान से मारने की धमकी देने और जातिसूचक गालियां देने के मामले में प्रभावती को छ महीने की सजा और पी त्रिवेणी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। भले ही न्याय मिलने में 7 सालों का लंबा इंतजार था लेकिन पीड़िता को सही न्याय जरूर मिला। इसके अलवा सरकार ने पीड़िता को मुआवज़े के तौर पर दो लाख रुपये देने का आदेश दिया। वही आपको बता दें, ये कोई पहला मामला नहीं जब इस तरह की घटना किसी दलित महिला के साथ हुई है, लेकिन सवाल यह है कि सरकार इन सभी मामलों पर सख़्त रुख़ कब अपनाएगी और देश में रहने वाली महिलाएँ कब सुरक्षित होंगी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *