Taoism vs Buddhism: बौद्ध धर्म जहां भारत में शुरु हुआ वहीं चीन में शुरू हुआ था… ताओवाद.. चीन में इन दो धार्मिक विचारो का मिलन हुआ और एक तीसरी धार्मिक परंपरा का जन्म हुई जेन परंपरा। जिसे चीन में चान औऱ जापान में जेन परंपरा कहा जाता है। जब तीसरी सदी में बौद्ध धर्म में चीन पहुंचा तब तक वहां ताओवाद परंपरा को फॉलो किया जाता था, ताओ ने बौद्ध धर्म की अवहेलना करने के बजाये, या उसके खिलाफ जाने के बजाये उनकी कुछ विचारों को अपनी परंपरा के साथ जोड़ लिया जिससे बौद्ध धर्म ताओवाद से घुलमिल गया.. अपने इस वीडियो में हम ताओवाद और बौद्ध धर्म के बीच के 4 विशेष फर्क के बारे में जानेंगे.. जो इन्हें एक दूसरे के लिए सम्मानिय और अलग बनाता है।
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ताओवाद बनाम बौद्ध धर्म – Taoism vs Buddhism
बुद्ध ने जब बुद्धत्व प्राप्त किया था तो उन्होंने पाया कि केवल आपकी इच्छा, आपका मोह ही आपके सभी समस्याओं का कारण है, मोह का त्याग ही आपको मुक्ति का रास्ता बताता है. बुद्ध ने इसी ज्ञान का बांटा भी लेकिन वहीं ताओवाद, जिसे दाओवाद भी कहा जाता है.. वो ऐसा नहीं सोचते.. ताओवाद परंपरा की शुरुआत करने के पीछे अलग अलग मत है.. लाओत्से ने ताओवाद की सोच को चीन में शुरु किया था, और वो बुद्ध से अलग प्रकृति के नियमो को सार्थक मानते है.. वो कहते है कि हमें प्रकृति जो दे रही है उसे वू वेई नियम.. य़ानि कि सहज भाव से या बिना किसी जबरदस्ती के कुछ करने के नियम के अनुसार चलना चाहिए।
ताओवाद कहता है कि हर चीज को नश्वर मानकर सबका मोह छोड़ने के बजाय प्राकृतिक लय यिन और यान शक्ति के साथ ही चलना चाहिए.. वहीं ताओवाद में निर्वाण जैसी कोई विचार नहीं है.. वो मुक्ति के मार्ग को बताने के बजाय कहते है कि ब्राहाम्ड की उर्जा के साथ हमें अपना सामन्जस्य बिठाना है.. हमे कोई मुक्ति नहीं चाहिए,, और न ही मुक्ति का नाम लेकर हमें किसी चीज के भागना है। ताओ जहां इस बात पर विश्वास करते है कि एक ब्राह्मण्डिय शक्ति है, जो सभी चीजो को गुप्त रूप से खुद में समाहित कर रही है, और लयबद्ध तरीके से खुद ही उत्पन्न भी कर रही है तो वहीं बौद्ध धर्म किसी ऐसी शक्ति के होने को नकारता है।
बौद्ध धर्म अनात्मवाद के सिद्धांत पर चलता
वो शक्ति के बजाये कर्म पर जोर देता है। बौद्ध धर्म जहां व्यक्ति के मुक्ति मार्ग पर निर्भर है.. वो निर्वाण की खोज करने की प्रेरणा देता है, जिससे व्यक्ति को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिले.. तो वहीं ताओवाद में जीवन में सहजता और ताओ के साथ समांजस्य बिठाने की प्रेरणां देते हुए रसायन विद्या, श्वास क्रिया और खाने के माध्यम से ज्याद उम्र पाने और अमर होने की बात करता है.. यानि की एक मुक्ति की बात करता है और दूसरा दीर्घायु होने की.. बौद्ध धर्म आत्मा के होने का पूरी तरह से खंडन करता है, बौद्ध धर्म अनात्मवाद के सिद्धांत पर चलता है तो वहीं ताओ उसके विपरीत है.. ताओ मानता है कि आपकी कोई भी धार्मिक क्रिया आपकी आत्मा और आत्मा के विकास के लिए, उसे पवित्रता देने के लिए, और अमर बनाने के प्रयास से जुड़ा है।
ताओ ही ब्रह्मांड का सृजनात्मक मार्ग
ताओवाद में भी दो अलग अलग विचारधारा है, दार्शनित ताओवाद और धार्मिक ताओवाद कहा जाता है। दार्शनित ताओवाद बौद्ध परंपरा के काफी करीब है तो वहीं धार्मिक ताओवाद उससे बिल्कुल अलग है। वो एक संगठित अलग धर्म है जिनके अपने देवता है, पूजा अनुष्ठान, मंदिर है, और अमरता की खोज करने का इनका अपना सिद्धांत है। ताओवाद में माना जाता है कि ताओ ही ब्रह्मांड का सृजनात्मक मार्ग है। संसार में जो भी क्रिया हो रही है वो ही ताओ है.. और जब आप उस क्रिया के खिलाफ जाते है तो आपको पीड़ा का सामना करना पड़ा है। इसलिए संसार में जो हो रहा है उसके खिलाफ जाकर उससे लड़ने के बजाये धारा के साथ बहना ही ताओवाद का नियम का है।
हालांकि ताओवाद केवल चीन तक ही सिमित रह गया तो वहीं बौद्ध धर्म का प्रचार पूरे एशिया में हुआ.. क्योंकि बौद्ध परंपरा समय के साथ बदलती रही लेकिन ताओवाद में ऐसा नहीं हुआ। वो अपने शुरुआत से ही एक ही विचार पर टिके है। हालांकि ताओवाद हो या बौद्ध धर्म दोनो ने ही आंतरिक शांति को महत्व दिया है। दोनो ही परंपराओ में जीवन में सादगी को अपनाने,. अंहकार को छोड़ने, प्रकृति के साथ तालमेल बिठा कर अपने सभी दुखो से मुक्ति कैसे पाई जा सकती है उसका मार्ग बताया है। दोनो परंपराओ में संसार को देखने का अपना तरीका बताया गया है लेकिन दोनो ही ये बताने की कोशिश कर रहे है कि हम जैसे संसार को देख रहे है संसार का रहस्य उससे ज्यादा गहरा है।



