Top 5 Dalit news: दलित समाज पर अत्याचार से लेकर बड़े राजनीतिक घटनाक्रम तक 5 सबसे बड़ी खबरें

Caste discrimation, Top 5 Dalits new
Source: Google

Top 5 Dalit news: ये बेहद हैरानी की बात है कि किसी का वर्चस्व किसी की जान से ज्यादा कीमती है.. भले ही उसके लिए कई लाशों के ढेर पर ही क्यों न बैठने पड़े.. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या जान लेने से ये लड़ाई खत्म हो जाती है..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे..जो आपको ये सोचने पर मजबूर कर देगा कि आखिर क्यों एक पढ़ा लिखे समाज में रहने के बाद भी जातिगत भेदभाव खत्म नहीं हो रहा है।

रायबरेली में दलित बच्चियों के साथ छेड़खानी

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश की रायबरेली से है जहां स्कूल से आई नाबालिक बच्चियों के साथ विशेष समुदाय के कुछ मनचलों ने अश्लील हरकते करने की कोशिश की और जब बच्चियों ने शोर मचाया तो उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। इतना ही नहीं बाकी बचाव करने आए एक पीड़िता के चाचा को भी बुरी तरह से पीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया है। ये मामला रायबरेली के नसीराबाद थाना क्षेत्र का है। पीड़ित बच्चियों ने नसीराबाद थाना में तहरीर दी कि वो सभी हरिनाथ मेमोरियल स्कूल मऊ, थाना डीह की छात्रा है, और स्कूल खत्म करके घर लौट रही थी तभी रास्तें में शिवप्रसाद मजरे महमदपुर नमकसार के रहने वाले दूसरे समुदाय के 4आरोपी आदिल, मौलाना, मुर्तजा और उसके भाई ने उन्हें घेर लिया, और जबरन उन्हें सड़क से खींचते हुए खेतों में ले गए। पीड़िता ने जब विरोध करते हुए शोर मचाना शुरू किया तो आरोपियों के उन्हें गालियां दी। इस घटना की जानकारी एक पीड़िता के चाचा को मिली तो वो भागते हुए घटना स्थल पहुंचे, लेकिन आरोपियों ने उसपर जानलेवा हमला कर दिया। वहीं पुलिस ने तहरीर के आधार पर बिना किसी देरी के मामला दर्ज कर चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रभारी निरीक्षक पवन कुमार सोनकर ने बताया कि सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है और आगे की जांच जारी है।

करनाल में बीरू वाल्मिकी की हत्या

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला हरियाणा के करनाल जिले से है, जहां इंस्टाग्राम पर हुई बहस और गाली गलौच के कारण वाल्मिकी समुदाय से आने वाले बीरू वाल्मिकी की दिनदहाड़े गोली मार की हत्या कर दी गई, इतना ही नहीं इस हत्या को वर्चस्व की लड़ाई बताते हुए सबक सिखाने की बात कह कर दिनेश भाई और नीरज फरीदपुरिया ने जिम्मेदारी भी ली। बीरू वाल्मीकी की मौत के बाद पूरे वाल्मिकी समुदाय का गुस्सा देखते हुए पुलिस ने भी तेजी दिखाते हुए दोनो शूटर को घटना के करीब 27 घंटे बाद ही एनकाउंटर में मार गिराया.. ये घटना 5 अगस्त 2026 को घटित हुई थी, बीरू वाल्मिकी सदर बाजार के दराबी लाइन का रहने वाला था औऱ अपनी बहन से मिलने जा रहा था, लेकिन तभी भगवडिया गैस एजेंसी के सामने दो बाइक सवाल बदमाशो ने बीरू पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाना शुरु कर दिया.. जिससे उसके सिर में गोली लगी.. बीरू को आनन फानन में करनाल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उसकी बिगड़ती हालात को देखते हुए उसे अमृतधारा अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां करीब आधे घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई.. बीरू की हत्या से पूरे गांव में सनसनी फैल गई.. करीब 8 महीने पहले ही उसकी शादी हुई थी। परिजनों ने आरोपियो के एनकाउंटर की मांग करते हुए सड़क जाम कर दिया.. जिसके बाद पुलिस ने भी तेजी दिखाते हुए दोनो शूटर्स को घोघड़ीपुल नहर के पास मुठभेड़ में घायल कर गिरफ्तार कर लिया गया.. लेकिन  इलाज के दौरान दोनो की मौत हो गई.. जिसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हो गए.. वहीं इस मुद्दे पर रोहिणी घावरी ने भी पीड़ित परिवार के साथ अपनी सांत्वना व्यक्त की है। पुलिस का ये एक्शन शायद कुछ लोगो को पसंद नहीं आये, लेकिन आपको क्या लगता है.. ऐसे कुख्यात शूटर्स के साथ क्या होना चाहिए था, जिसने एक घर का चिराग बुझा दिया।

नागौर में दलितों की हत्या मामले में बड़ा फैसला

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के नागौर जिले से है, जहां 5 दलितो की हत्या हुई, तमाम सबूत गवाह पेश करने के बाद भी (SC/ST) मामलों की एक विशेष अदालत ने  40 आरोपियों को बरी कर दिया.. उनकी दलील थी कि आरोपियो के खिलाफ सबूत प्रयाप्त नहीं थे। ये घटना नागौर जिले के डांगावास गांव में मई 2015  में घटित हुई थी, जहां करीब 23 बीघा जमीन के लिए हुए विवाद में आरोपियों ने 6 लोगो की हत्या कर दी थी, जिसमें से 5 दलित थे। जातिवादियों की नफरत इतनी गहरी थी कि 3 लोगो को तो ट्रेक्टर से कुचल दिया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपी दलितों को उस जमीन से जबरन हटाना चाहते थे, जिसके लिए 40 से ज्यादा आरोपियों ने दलितो पर हमला कर दिया था। लेकिन करीब 11 सालों तक मामला कोर्ट में लंबित होने के बाद.. करीब 82 गवाहों को पेश करने के बाद भी कोर्ट ने सीबीआई जांच को नाकाम बता कर सभी आरोपियों को सबूतो के अभाव में रिहा कर दिया, इस रिहाई को लेकर जहां आरोपी पक्ष में खुशी की लहर है, तो वहीं दलित समाज में रोष है। उनका कहना है कि वो हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देंगे। सीधी सी बात है कि जब कोई आरोपी  ही नहीं था तो 6 लोगो की हत्या कैसे हो गई.. औऱ उन हत्याओ का जिम्मेदार कौन है। साफ दिखाई दे रहा है कि जांच ठीक से नहीं की गई.. अब देखना ये होगा कि क्या भविष्य में पीड़ितो को  न्याय मिलेगा।

झारखंड के चतरा में दलित उत्पीड़न के बाद मॉब लिंचिंग

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के चतरा जिले है, जहां एक दलित लड़की को बंधक बना कर मारपीट करने औऱ उसके साथ बलात्कार करने के मामले में खुद गुस्साई भीड़ ने उसका फैसला कर दिया। 15 साल की लड़की के साथ ऐसी घटना को अंजाम देने के कारण लोगो ने आरोपी की पीट पीट कर हत्या कर दी। ये घटना चतरा जिले के तांडवा थाना क्षेत्र का है। सोशषल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है जिसमें कुछ लोग आरोपी के पिता को घसीटते हुए ले जा रहे है.. पुलिस ने वीडियो का संज्ञान लिया तो पता चला कि 4 अगस्त को करीब 100 -150 लोग मोहम्मद सुल्तान के घर मे घुस गए.. उन लोगो ने मोहम्मद सुल्तान उस पर दलित लड़की को बंधक बना कर उसका दुष्कर्म करने की बात की.. मोहम्मद सुल्तान  के बेटे  मोहम्मद इमरोज ने लोगो को रोकने की कोशिश की तो वो लोग उसे भी घसीटते हुए ले गए। पीड़िता के मुताबिक 3 अगस्त की रात को  मोहम्मद इमरोज और सुल्तान ने मिलकर उसे अगवा कर अपने घर मे कैद रखा,.. वहीं  मोहम्मद इमरोज ने उसका यौन उत्पीड़न भी किया.. लेकिन अगल दिन लड़की किसी तरह से बच निकली.. उसने तुरंत उसकी जानकारी घर वालों को दी.. जिससे गुस्सायें परिजनो ने  मोहम्मद इमरोज और मोह्म्मद सुल्तान पर हमला कर दिया। वही पुलिस ने  मोहम्मद इमरोज की हत्या किये जाने के मामले में 10 लोगो को गिरफ्तार कर लिया वहीं लड़की को मेडीकल के लिए भेजा गया है..जिसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। ऐसे में देखना ये होगा कि आखिर सच्चाई किसकी बातों मे है, वहीं क्या कानून को अपने हाथ में लेना सही फैसला है।

झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रो के समर्थन में आजाद

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद को लेकर है.. जिन्होंने ये साबित कर दिया है कि उनके लिए राजनीति हमेशा बाद में आती है और समाज का भला पहले। झारखंड में छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे है.. जिसे लेकर आजाद ने बड़ी बात की है। उन्होंने सीधे कहा कि प्रदर्शन करना छात्रो का काम नहीं है लेकिन चंद लोगो के कारण छात्रो को सड़को पर उतरना पड़ रहा है। झारखंड हो या यूपी पंजाब, अगर किसी भी सरकार में छात्र आंदोलन पर बैठे हैं तो शर्म की बात है। छात्रों का काम आंदोलन करना नहीं है, उनका काम पढ़ना है। आजाद ने सीएम हेमंत सोरेन से अपील की है कि वो खुद इस प्रोटेस्ट में आये और छात्रो को आश्वासन दें कि उनकी मांगे पूरी की जायेगी। आजाद ने पहले ही ये ऐलान कर दिया है कि अगर बात बच्चो के भविष्य की है तो वो किसी पार्टी की नहीं बल्कि उनके भविष्य की बात करेंगे। आजाद का छात्रों को लेकर इस तरह से खुल कर बोलना ही उन्हें सबसे खास बनाता है। आपको क्या लगता है, क्या आजाद की बात से आप सहमत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *