Dangavas massacre case: हाल ही में राजस्थान के नागौर से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ बहुचर्चित डांगावास हत्याकांड मामले में मेड़तामें मौजूद SC/ST स्पेशल कोर्ट ने लगभग 11 साल बाद ऐतिहासिक और जिसका इंतज़ार था, वो फैसला सुनाया है और सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया है।
डांगावास दलित हत्याकांड मामले 11 साल बाद फैसला
क्या दलितों के साथ कभी न्याय होगा? क्या उन्हें न्याय पाने का अधिकार नहीं है? पहले तो दलितों पर अत्याचार होता है, उनकी हत्या होती है और फिर सालों तक मामला कोर्ट में पेंडिंग रहता है, लेकिन उसके बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिलता और आरोपी बरी हो जाते हैं। क्या समाज में दलितों की यही हालत हो गई है? दरअसल राजस्थान के नागौर जिले में हुए प्रसिद्ध डांगावास दलित हत्या मामले में 11 वर्ष बाद एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। मेड़ता स्थित विशेष अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) न्यायालय ने पिछले बुधवार को सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में बताया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय सबूत पेश करने में विफल रहा, इसलिए संदेह न होने के कारण सभी आरोपियों को बरी किया जाता है।
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23 बीघा जमीन के विवाद को लेकर खूनी संघर्ष
बता दें, यह मामला 14 मई 2015 की है, जब नागौर जिले के डांगावास गांव में 23 बीघा जमीन के विवाद को लेकर खूनी संघर्ष शुरू हो गया था। ये इतना ज्यादा बढ़ गया कि एक तरफ के पांच दलितों रतनराम मेघवाल, पोखरराम मेघवाल, पंचराम मेघवाल, खेमाराम मेघवाल और गणपतराम मेघवाल की मौत हो गई (कहा जाता है कि कुछ को ट्रैक्टर से कुचल दिया गया)। दूसरी तरफ, रामपाल गोसाईं नाम के एक आदमी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। कई अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हो गए।
ज़्यादातर गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर पाए
जिसके बाद यह केस काफी चर्चा में रहा और 11 साल तक SC/ST कोर्ट में केस की सुनवाई होती रही लेकिन जब कोर्ट को कोई ठोस सबूत नहीं मिला जिसके खिलाफ CBI ने आरोप लगाए थे तो उसने इसी केस में 82 गवाह पेश किए जबकि शिकायत करने वाले ने 8 और गवाह पेश किए। कोर्ट ने पाया कि इनमें से ज़्यादातर गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर पाए।
वही मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुतिबिक आरोपी पक्षों के वकीलों ने बताया कि “कोर्ट ने पाया कि CBI ने अपनी जांच ठीक से नहीं की थी और प्रॉसिक्यूशन केस में किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा था।” और सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया लेकिन लेकिन न्याय का इंतज़ार कर रहे पीड़ितों के मन में अब ही यह सवाल ज़िंदा है कि उनके अपनों के हत्यारे कौन थे, जिसका जवाब हाई कोर्ट में आगे की कानूनी लड़ाई से ही मिल सकता है।



