Uttarakhand: हाल ही में उत्तराखंड (Uttarakhand) के हल्द्वानी (Haldwani) से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में ‘विजय शंखनाद’ रैली की थी। लेकिन, ठीक दो दिन बाद 10 अगस्त को, ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेना न्यास’ नाम के धार्मिक संगठन ने उस मैदान को शुद्ध करने के लिए यज्ञ-हवन किया। वहीं समिति का दावा है कि कांग्रेस के सदस्यों ने वहां खड़े होकर हिंदू-विरोधी नारे लगाए थे और इस्लाम को बढ़ावा देने वाले बयान भी दिए थे।
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रैली के बाद रामलीला मैदान का शुद्धिकरण
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 8 अगस्त 2026 को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में रामलीला मैदान में एक चुनावी रैली को संबोधित किया। रैली खत्म होने के बाद, ‘श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास’ नाम के एक दक्षिणपंथी हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने मंच पर जाकर हवन किया और गंगाजल छिड़ककर उस जगह को ‘शुद्ध’ किया। जब इस घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, तो मामला अचानक बढ़ गया और एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया। वहीं शुद्धिकरण को लेकर कांग्रेस ने नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष के दलित होने के कारण बीजेपी के इशारे पर उनके साथ इस तरह का व्यावहार किया जा रहा है, जिसका विरोध करने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता ने हलद्वानी के बुद्ध पार्क में प्रदर्शन करना शुरु कर दिया। वहीं समिति ने दावा किया कि हमारी समिति किसी पार्टी से जुड़ी नहीं है।
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रामलीला मैदान एक सांस्कृतिक और धार्मिक स्थल
शुद्धिकरण करने वाले संगठन का दावा था कि रामलीला मैदान एक सांस्कृतिक और धार्मिक स्थल है और कांग्रेस की रैली के दौरान वहां कथित तौर पर आपत्तिजनक व धार्मिक नारे लगाए गए थे, जिससे उसकी पवित्रता प्रभावित हुई थी। जिसके कारण स्थल की पवित्रता बहाल करने के लिए ‘शुद्धिकरण’ किया गया। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह कदम जातिगत भेदभाव के तहत नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल की शुद्धि के लिए उठाया गया था। इसलिए इसका राजनीतिकरण न करें, रामलीला मैदान धार्मिक कार्यक्रम के लिए है, न की रैलियों के लिए। सवाल ये है एक रैली के बाद शुद्धिकरण करना दलितों का अपमान करने के लिए नहीं किया गया तो क्यों किया गया। क्योंकि अगर किसी नारे से परेशानी थी तो रिपोर्ट की जा सकती थी.. लेकिन सामूहिक तौर पर शुद्धिकरण इशारा है कि किसी भी पद का व्यक्ति क्यों न हो.. अगर दलित है तो उसे न्याय के लिए आवाज उठाने का हक नहीं है।
मल्लीकार्जुन ने उठाये सवाल
वही इस घटना के बाद राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लीकार्जुन खरगे ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि आखिर कब तक दलितों के साथ इस तरह का अमानवीय व्य्ह्वाहर होगा इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा क्या 21वीं सदी में भी उनके साथ अछूतों जैसा बर्ताव किया जाता रहेगा। खड़गे ने सदन में कहा कि भले ही वह दलित हैं, लेकिन उन्होंने कभी इस बात का राजनीतिक फ़ायदा उठाने की कोशिश नहीं की; फिर भी, उनके मंच से उतरने के बाद ‘शुद्धिकरण’ की रस्म निभाना उनकी जाति और उनके व्यक्तित्व का सीधा अपमान है।



