Ludhiana news: हाल ही में पंजाब के लुधियाना से खबर सामने आई है, जहाँ पुलिस कस्टडी में एक दलित महिला को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के लगभग 21 साल बाद, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने जगरांव में इस मामले में कार्यवाही शुरू की है और बीते दिन पांच लोगों के बयान दर्ज किए हैं।
21 साल पुराने मामले में अब जांच शुरु हुई
अक्सर ऐसा ही क्यों होता है जब दलितों के न्याय की बात आती है, तो उनको न्याय मिलने में सालो लग जाते है। कार्यवाही सालों तक खिंचती रहती है और तब तक पीड़ित की मौत ही हो जाती है। ऐसा ही मामला पंजाब के लुधियाना से है, जहां करीब 21 साल में पुलिस कस्टडी में दलित महिला को टॉर्चर करने की जांच अब 2026 में शुरु की गई थी। कहते है कि भारत की कानून व्यवस्था बहुत लचर है, लेकिन जरा सोचिये कि अगर 21 साल बाद जांच शुरु हुई हो तो न्याय कब मिलेगा।
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पुलिस की बर्बरता के कारण हुई मौत
दरअसल यह, घटना जुलाई 2005 की है, जब पीड़िता कुलवंत कौर जो कि लुधियाना (Ludhiana) के जगराओ (Jagraon) की रहने वाली थी। उन्हें पुलिस ने उनकी ही भतीजी की आत्महत्या करने के मामले में 14 जुलाई 2005 में पूछताछ करने के लिए कस्टडी में रखा था, जहां उन्हें थर्ड डिग्री ट़ॉर्चर दिया गया था। इस घटना के वक्त कुलवंत की उम्र मात्र 19 साल की थी और घटना से आहत होने के कारण वो हमेशा के लिए विकलांग हो गई और कुलवंत करीब 16 सालों तक बिस्तर पर ही रही थी, लेकिन 10 दिसंबर, 2021 को 35 वर्ष की उम्र में उसकी मौत हो गई। जिसके बाद जगरांव सिटी पुलिस ने FIR दर्ज की थी, लेकिन परिवार का दावा है कि अब तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है।
मामले में 5 लोगो के बयान भी दर्ज किये गए
हैरानी की बात तो ये है कि एक 19 साल की लड़की के साथ पुलिस ने ऐसी बर्बरता की, उसकी पूरी जिंदगी खराब हो गई लेकिन किसी एक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन अब करीब 21 सालो के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) खुद इस मामले मे पड़ चुका है औऱ वो पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में लग गया है। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक सोशल एक्टिविस्ट और कौर के परिवार के सदस्य इक़बाल सिंह रसूलपुर ने कहा अब तक इस मामले में 5 लोगो के बयान भी दर्ज किये है। अब देखना ये होगा कि न्याय के इंतजार में पथराई आंखो में फिर से चमक लौटेगी.. बेटी तो रही नहीं तो क्या न्याय भी अधूरा ही रहेगा।



