Top 5 Dalit news: सरकार भले ही कितने ही कानून बना लें, लेकिन जब तक दिमाग में भरी गंदगी नहीं निकलेगी.. जातिवाद की विकृत मानसिकता नहीं निकलेगी.. तब तक दलित भले ही गुहार लगाता रहे, जातिवादी आतंकी बहरे हो कर उनपर अत्याचार करेंगे। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है.. साथ ही ये भी सवाल उठाते है कि वो दिन आखिर कब आयेगा जब दलितों और पिछड़ो को भी इंसानो की तरह ही सम्मान दिया जायेगा।
बलरामपुर में दलित युवक को बांध कर पीटा
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से है, जहां एक दलित युवक के साथ मानवता की सारी हदें पार करते हुए उसे बांध कर इस कदर पीटा गया कि उसकी मौत हो गई.. इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है.. ये घटना बलरामपुर के गैसड़ी कोतवाली क्षेत्र के ठकुरापुर गांव की है। वीडियो में आरोपी युवक… राम सनेही शिल्पकार नाम के शख्स को बुरी तरह से बांध कर पीट रहा है, औऱ पिटने वाला शख्स बार बार उसे छोड़ने की गुहार लगा रहा है.. पीड़ित परिवार ने पुलिस के तहरीर दी कि आरोपियो ने रंजिश के चलते मृतक के साथ ऐसा व्यवहार किया है.. वहीं जब पुलिस ने वीडियो वायरल होने के बाद मामले की जांच शुरु की तो आरोपी परिवार का कहना है कि राम सनेही उनके घर पर चोरी के इरादे से आया था, पकड़े जाने पर उसके गुनाह को कूबूल करने के लिए पीटा गया था लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उसकी मौत हो जायेगी। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरु कर कर दी है। पुलिस ने बताया कि राम सनेही अपने भाई के साथ रहता था और उसकी पत्नी उसे छोड़ कर जा चुकी थी.. इस मामले में राम सनेही के भाई फूल कुमार ने ही आरोपियों गुड्डू, उसके पिता अकबर अली, मग्घे नाऊ और उसके साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कर कराया है। हालांकि अभी तक किसी भी आऱोपी को हिरासत में नही लिया गया है। अब देखना ये होगा कि पुलिस अपवी जांच में क्या साबित करती है।
हलद्वानी में शुद्धिकरण प्रकरण गरमाया
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तराखंड के हल्द्वानी से है जहां रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हिंदू संगठन द्वारा किया गया शुद्धिकरण का मामला अब राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। जी हां, कांग्रेस एक तरफ इसे बीजेपी का दलित को अपमान करने के लिए उठाया गया कदम बता रही है तो वहीं मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी अब अपना बयान जारी किया है। खड़गे ने कहा कि देश में अब दलितों के लिए कोई जगह नहीं है। बीजेपी धर्म के नाम पर सभी को बांट रहे है, उन्हें इस सारे प्रकरण से बेहद अपमानित महसूस हो रहा है। खड़गे ने आगे कहा कि मैने कभी भी अपने दलित होने का ढिंढोरा पीट कर सुरक्षा नहीं मांगी, लेकिन एक सार्वजनिक जगह पर जहां हर धर्म, हर जाति के व्यक्ति मौजूद थे, वहां विजय शंखनाद रैली के बाद ही शुद्धिकरण करने का क्या मतलब है। मुझे वाकई में ये एहसास कराया गया कि मैं अछूत हूँ। वहीं इस मुद्दे पर नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद भी जमकर बीजेपी पर भड़के। उन्होंने कहा कि ये सही नहीं हुआ.. भले ही हम सभी अलग अलग पार्टियों से है लेकिन जाति के नाम पर यह अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे, सरकार को जवाब देना पड़ेगा.. आखिर कब जाति के नाम पर हमें ये अपमान सहना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से इन मुद्दे पर जवाब भी मांगा है। ये मामला अब पूरी तरह से राजनैतिक रंग ले चुका है.. ऐसे में देखना ये होगा कि कहीं ये शुद्धिकरण उत्तरखंड से बीजेपी को ही शुद्ध रूप से बाहर न निकाल दें.. ये तो 2027 के चुनावो के बाद पता चल ही जायेगा।
कर्नाटक के चिक्कमगलु में दलितो की जमीन पर वन विभाग का कब्जा
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के चिक्कमगलुरु से है जहां जंगल की जमीन पर खेती करने के आरोप में वन अधिकारियों ने पूरे दलित परिवार को बुरी तरह से प्रताड़ित किया। ये मामला चिक्कमगलुरु के तारिकेरे तालुक के अमृतपुरा होबली, नागराजपुरा गांव का है। जहां खुद सरकार द्वारा ही आवंटित 4.3 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे दलित किसान सुगुनम्मा को पहले तो वन विभाग के अधिकारों से सरकारी जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगा कर रोका, और जब पीड़ित ने सारे दस्तावेज दिखा कर साबित करने की कोशिश की कि ये जमीन उसे दी गई है तो अधिकारियों ने पूरे परिवार के साथ मारपीट की। जिसे लेकर अब कर्नाटक दलित संघर्ष समिति ने आरोपियो के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। समिति ने एक बयान जारी करते हुए बताया कि कर्नाटक सरकार ने खुद 2018 में यारेहल्ली गांव की सुगुनम्मा को 4.3 एकड़ जमीन आवंटित की था, जिसपर वो कई सालो से नारियल और आम की खेती कर रहा था, लेकिन अचानक वन विभाग ने आकर दावा ठोक दिया है कि ये जमीन सर्वेक्षण संख्या 34 का हिस्सा है जो वन विभाग के अंतर्गत आता है। सभी दस्तावेज दिखाने के बाद भी अधिकारियों का ऐसा रवैया बर्दाश्त के बाहर है। समिति ने चेतावनी जारी की है कि अगर जल्द से जल्द कोई सख्त कार्यवाही नहीं हुई तो वो बड़े स्तर पर धरना प्रदर्शन करेंगे। वैसे वाकई में दलितों को जमीन दी गई थी, या केवल ढोंग था.. वो अंतिम जांच में सामने आ ही जायेगा।
फतेहगढ़ में दलित की हत्या के बाद 15 साल बाद न्याय
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के फारूखाबाद से है। जहां एक दलित व्यक्ति की हत्या के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में 15 सालों का इंतजार करना पड़ा। कोर्ट ने आखिरकार दोनो आऱोपी भाईयो को उनके अंजाम कर पहुंचाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है साथ ही 90 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया है। ये घटना 15 साल पहले जुलाई 2011 की है, जब फारूखाबाद के फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के टीटिया ग्वालटोली में 38 साल के दलित युवक संतोष कुमार को उसके ही पड़ोस में रहने वाले दो सगे भाई फरमान औऱ सलमान ने अपने एक साथी परविंद के साथ बाजार जाने के बहाने ले गए, लेकिन 2 दिन बाद उसका छत विछत शव रेलवे ट्रेक के किनारे बरामद हुआ था। जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरु की और तीनो आरोपी हिरासत में लिये गए, पीड़ित परिवार को करीब 15 सालो का इंतजार करना पड़ा लेकिन आखिरकार न्याय की जीत हुई।
महाराष्ट्र में एससी एसटी के आवंटित फंड में गोलमाल
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला महाराष्ट्र से है, जहां एससी एसटी कैटेगरी के बच्चों के लिए आवंटित फंड को जेनेरल कैटेगरी के बच्चो के लिए इस्तेमाल करने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। दरअसल अभी हाल ही में मुम्बई की Comptroller and Auditor General (CAG) ने एक ऑडिट किया है जिसमें ये खुलासा हुआ है कि BOARD OF APPRENTICESHIP TRAINING बोट ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के छात्रो के लिए आवंटित किये गए 17.34 करोड़ रूपय का इस्तेमाल जेनेरल कैटेगरी के बच्चो के लिए किया है। इस मामले में एक रिपोर्ट संसद में पेश किया है, जिसमें ये भी खुलासा किया गया कि पिछले कुछ सालों में एससी एसटी वर्ग के ट्रेनर की संख्या में लगभग 72 प्रतिशत की गिरावट आई है। जो संकेत है कि एससी एसटी वर्ग के छात्रों की जानबूझ कर अनदेखी की जा रही है, जो लाभ उन्हें मिलना चाहिए था वो दूसरे बच्चों को दिया जा रहा है। अब देखना ये होगा कि रिपोर्ट के खुलासे के बाद सरकार का क्या रूख होता है।



