JJ Act Section: नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानि कि NCRB की एक रिपोर्ट के अनुसार केवल भारत में ही हर साल करीब पौने दो लाख मामले बच्चो के खिलाफ होने वाले अपराधों के दर्ज किये जाते है। 2024 के आकड़ो के मुताबिक बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों में 1 लाख 87 हजार 702 मामले दर्ज किये गए थे। जो कि 2023 से करीब 5.8 प्रतिशत ज्यादा थे.. क्योंकि 2023 में ये मामले 1,77,335 थे। इस कैटेगरी में उन बच्चों को शामिल किया जाता है जिनकी उम्र 18 साल से कम है.. और जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट 2015 का आर्टिकल 75 ही जुवेनाइल बच्चों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाली क्रूरता के लिए न्याय प्रणाली तय करता है। अपने इस वीडियो में किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) की धारा 75 के बारे में जानेंगे जो कि जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का ही हिस्सा है।
Juvenile Justice Act की धारा 75 क्या कहती है
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 75 के अनुसार जुवेनाइल बच्चों के साथ होने वाली क्रूरता के लिए कैसे निपटना है, उसके बारे में बात की गई है। आर्टिकल 75 में बच्चो के प्रति की गई क्रूरता के लिए दंड का प्रावधान है। इस कानून के तहत 18 साल के कम उम्र के बच्चे जो कि माइनर है, उनकी लीगल देखभाल की जिम्मेदारी जिसके पास है, वो अगर बच्चे के साथ किसी तरह का दुरव्यावहार करता है, उनके साथ मारपीट करता है, उनका परित्याग करता है, बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं करता.. या फिर अनावाश्यक मानसिक औऱ शारीरिक चोट पहुंचाता है तो ऐसी परिस्थिति में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 लगाया जा सकता है। ऐसे में अलग अलग तरह के सजा का प्रावधान है।
JJ Act की धारा 75 क्या है सजा
बाल अपराधों में कई अपराधों को जोड़ा गया है- जिसमें अगवा और अपहरण करना, बाल यौन उत्पीड़न, बाल श्रम औऱ भीख मंगवाना,बच्चो के खिलाफ साइबर क्राइम, बाल विवाह और भ्रूण हत्या औऱ शिशु परित्याग शामिल है। जिसमें हम बात करेंगे किसी अगर बच्चे के साथ मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ना होती हैस उनका परित्याग होता है तो कानून के तहत उनके क्या अधिकार है.. औऱ उन्हें क्या न्याय मिलेगा।
- धारा 75 के अनुसार अगर आरोपी माता पिता है, रिश्तेदार है तो आरोप सिद्ध होने पर 3 साल की सजा औऱ 1 लाख रूपय का जुर्माना लगाया जा सकता है, या फिर दोनो ही हो सकते है।
- वहीं अगर किसी चाइल्ड केयर सेंटर में किसी बच्चे के साथ क्रूरता होती है, तो यहीं सजा 5 साल की हो जाती है औऱ 5 लाख रूपय का जुर्माना हो जाता है।
- वहीं अगर बच्चे के साथ की क्रूरता के कारण अगर बच्चे के साथ कोई अनहोनी हो जाती है, बच्चा अपाहिज हो जाता है, या उसे मानसिक अघात पहुंचता है तो दोषी को 3 से 10 सालो तक की सजा का प्रावधान है। वहीं 5 लाख रूपय तक का जुर्माना लगाया जाता है।
हालांकि बच्चे के परित्याग को लेकर एक क्लॉज से भी जोड़ा गया है कि बच्चे का परित्याग ऐसी परिस्थिति में किया गया है जब माता पिता के पास कोई दूसरा रास्ता नही था तो ऐसे में धारा 75 के तहत मामला नहीं चलाया जायेगा। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार जब बच्चे के साथ घटित घटना के लिए आरोपी का Direct control or actual charge होना जरूरी है। सरकार की तरफ बाल अधिकारो के हनन को रोकने और उनके साथ होने वाली क्रूरता को रोकने के लिए 24 घंटे सातों दिन चलने वाली हेल्पलाइन नंबर जारी की गई है जो कि 1098 है। इसी के साथ शिकायतकर्ता राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) या राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ऑफिसियल वेबसाइट पर भी शिकायत कर सकते है या फिर किसी भी स्थानीय पुलिस स्टेशन या विशेष बाल कल्याण पुलिस इकाई’ (Special Juvenile Police Unit) में भी शिकायत की जा सकती है। ऐसे मामलो को 4 से 6 महीने के अंदर निपटाने का प्रावधान है।



