Child labour: राहुल एक दस साल का बच्चा है और फोर्थ क्लास ने पढ़ता है। वो बहुत अच्छा गाता है साथ ही बहुत अच्छी एक्टिंग करता है , स्कूल के बाद उसके पेरेंट्स उसे एक्टिंग सेट पर ले जाते है जहां वो एक्टिंग करता है जिसके बदले उसे भुगतान किया जाता हैं, जो उसके माता पिता के पास रहता है। राहुल के माता पिता उसकी बेसिक सुविधाओं का ख्याल रखते हैं लेकिन उसे अलग से पैसे की जरूरत होती है तो वो देने से इनकार करते है,ऐसे में सवाल ये उठता है कि राहुल जो काम कर रहा है वो चाइल्ड लेबर की कैटिगरी में माना जाएगा या नहीं। अगर हां तो क्यों, और अगर नहीं तो क्यों नहीं। अपने इस लेख में हम बात करेंगे बच्चों से जबरन मजदूरी या काम करवाने के खिलाफ भारत में क्या कानून है। कैसे पता करें कि बच्चा बाल मजदूरी कर रहा है और वहीं क्या है बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम.. और अगर बाल श्रम करवाया जाता है तो उसके लिए BNS की धारा 113 क्या कहती है।
बच्चों से काम कराने पर लगेगा कानून
बाल मजदूरी क्या है- भारतीय संविधान में बाल मजदूरी को दो तरीके से बांटा गया है। पहला 14 साल तक के बच्चों से मजदूरी करवाना दूसरा 14 से 18 साल तक के बच्चों से ऐसा काम करवाना जो खतरनाक है, उसके जीने, पढ़ने या आजादी के अधिकारो को छीनता है। बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के मुताबित 14 साल के कम उम्र के बच्चों से आप काम नहीं ले सकते है.. न उन्हें व्यवसाय में लगा सकते है। जिससे उनके बचपन को जीने का अधिकार छिनता हो.. वहीं 2016 में बाल श्रम एक्ट संशोधन पारित हुआ जिसके बाद ये ये तय किया गया कि 14 साल के ऊपर के बच्चो को भी 18 साल तक होने तक खतरनाक कामों में लगाना प्रतिबंधित है। बच्चो से ऐसा कोई काम नहीं करा सकते है जिससे उन्हें शारीरिक रूप से या मानसिक रूप से आघात पहुंचे.. उनका विकास रूके, वो खुश न रहे, बीमार रहे, उन्हें स्कूल से वंचित रखा जाये, जिससे उनका ज्ञान न बढ़े, वो लोगो के बीच नहीं जाते, दूसरे बच्चों के साथ खेल कूद नहीं सकते है.. जैसे कई मामले बाल श्रम में ही गिने जाते है।
बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने की जिम्मेदारी सबसे अहम है.. ताकि वो मानसिक और शारीरिक रूप से सुरक्षित महसूस करें.. अब सवाल उठता है कि राहुल के मामले में जो कुछ भी उसके साथ हो रहा था वो बाल श्रम में गिना जायेगा या नहीं.. तो इसका जवाब है कि नहीं.. ये बाल मजदूरी में नहीं आयेगा.. क्योंकि राहुल अपनी खुशी से एक्टिंग कर रहा है, उसकी बेसिक जरूरतें पूरी हो रही है,,, वो स्कूल जा रहा है, रही बात उसके पैसो की तो बाल श्रम नियम 2017 के मुताबिक बच्चे की कमाई का 20 प्रतिशत बच्चे के अकाउंट में जाना चाहिए, बाकि मांबाप अपनी सहूलियत से खर्च कर सकते है।
लेकिन अगर बाल श्रम होता है तो ऐसे हालातो में क्या किया जाता है.. बाल श्रम कानून के उल्लंघन की जाँच के लिए सरकारी संस्थाएँ है। वहीं जांच में पाये गए आरोपी को 6 महीने से 2 साल तक की जेल औऱ 20 हजार से 50 हजार तक का जुर्माना हो सकता है। बच्चो के मुद्दे के लिए बाल न्यायालय एक विशेष अदालत है.. जो केवल बाल श्रम के मामले ही देखते है।
भारत में साल 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया था जिसके बाद से देश के सभी को 6 से 14 साल तक बच्चों को शिक्षा हासिल करना अनिवार्य है। जिसके लिए सरकार मुफ्त में सारी सुविधायें देती है।
जबरन श्रम करवाने के मामले में पहले आईपीसी की धारा 374 के तहत सजा दी जाती थी लेकिन अब ये भारतीय न्याय संहिता के तहत तय की जाती है। बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिबंध और विनियमन) अधिनियम, 1986 की धारा 14(1) में आरोपी के खिलाफ सजा का प्रावधान है। वहीं 14(2) कहता है कि अगर मालिक दुबारा अपराध करता है तो उसे 1 साल से 3 साल की सजा होगी, तब जुर्माना देकर बचा नहीं जा सकता है। वहीं धारा 14(3) के मुताबिक अगर बच्चो के काम का रिकॉर्ड नहीं रखा गया या प्रशासनिक नियमों का उलंघ्घन किया गया है तो 1 महीने की जेल 10000 रूपय जुर्माना लगाया जाता है। वहीं अगर मांबाप बच्चे से जबरन काम करवाते है तो पहले तो उन्हें चेतावनी दी जाती है लेकिन ये सिलसिला बार बार होता है तो उन पर 10000 रूपय तक का जुर्माना लगाया जाता है। बाल श्रम से जुड़े मुद्दो की शिकायत PENCIL पोर्टल चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर कर सकते है।



