Top 5 Dalit news: रोहिणी घावरी विवाद से SC/ST Act तक, दिल्ली-झारखंड में भी बवाल!

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Top 5 Dalit news: क्या सच में आरक्षण खत्म करके दलितों के साथ भेदभाव खत्म किया जा सकता है, शायद नहीं, क्योंकि जब वो आपस में ही भेदभाव खत्म नहीं कर सकते तो वो समाज से क्या लड़ेंगे। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो आपको ये सोचने पर मजबूर करेगा कि आपकी लड़ाई क्या वाकई ने सही दिशा में है भी या नहीं।

रोहिणी घावरी पर अभिनेत्री उर्मिला सनावर का हमला

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद की कथित एक्स गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी को लेकर है। एक तरफ वो भारत आने के बाद से ही अलग अलग जगहों पर आजाद की इमेज की बखिया उधेड़ रही है, तो वहीं आजाद हमेशा की तरह शांत है, लेकिन अब घावरी के वार पर अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने पलटवार किया है। अभिनेत्री ने कहा कि जब पहली बार रोहिणी ने आजाद के खिलाफ बयान दिया था तब वो खुद भी घावरी के पक्ष में खड़ी हुई थी। यहां तक कि नगीना, पतेपुर और सहारनपुर में आजाद के खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया था। क्योंकि ये मामला तब तक निजी था लेकिन अब घावरी अपने बयानों से समाज में बंटवारा कर रही है। दलित समाज को अलग-अलग जातियों में बांट कर वो अब अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रही है। वाल्मीकि, आंबेडकर जैसे लोगों ने समाज को एकजुट करने की कोशिश की थी लेकिन घावरी इसे बाँट रही है, जो सरासर गलत है। सच तो ये है कि जातीय विभाजन की राजनीति से दलित समाज कमजोर हो रहा है। घावरी को खुद आरक्षण का लाभ मिला था, लेकिन अब वो उसी आरक्षण को खत्म करने वाले के साथ खड़ी है। घावरी और आजाद के बीच जो भी हुआ उसके लिए वो कोर्ट जाए, लेकिन इसका राजनीतिकरण करके वो समाज में बंटवारा कर रही है। हैरानी की बात है कि खुद अभिनेत्री ने घावरी के लिए आवाज उठाई थी लेकिन घावरी ने एक बार भी उनके लिए कुछ नहीं कहा। उर्मिला सनावर के इन बयानों के बाद घावरी को लेकर लोगों की क्या प्रतिक्रिया होती है वो देखने वाली बात होगी। वैसे आप इनकी बातों से कितने सहमत है।

केवल अनूसूचित जाति से होने से नहीं लगती एससीएसटी एक्ट

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से है। जहां इलाहाबाद हाई कोर्ट का एससीएसटी एक्ट के तहत लगने वाली धाराओं को लेकर बड़ा बयान आया है। कोर्ट ने सीधे कहा कि केवल पीड़ित अनुसूचित जाति से आता है इसका मतलब ये नहीं है कि आरोपी पर एससीएसटी एक्ट लगेगा। कोर्ट ने साफ कहा कि ये धारायें तब ही लगेगी जब आरोपी का अपराध ऐसा हो जिससे जातिगत अपमान हुआ हो। दरअसल ये फैसला कोर्ट ने गाजियाबाद लोनी थाने में साल 2025 के रहने वाले कथित आरोपी राजू कुरैशी उर्फ उमरदराज पर लगे एससीएसटी एक्ट को खारिज करते हुए सुनाया है।  न्यायमूर्ति संतोष राय ने कहा कि आरोपी पर जालसाजी, धोखाधड़ी और अन्य आरोपों की पुष्टि तो होती है लेकिन कहीं भी जातिगत अपमानित करने की पुष्टि नही है.. और जब जातिगत अपमान नहीं हुआ तो फिर एससीएसटी एक्ट क्यों लगाया गया है। एक्ट का दुरुपयोग न हो इसके लिए जरूरी है कि इसके दायरों का पता होना चाहिए। केवल एससी एसटी कैटेगरी से आने से ही मामला एससीएसटी एक्ट का नही बनता। कोर्ट के इस बयान को लेकर आपकी क्या राय है।

कांग्रेस नेता और सांसद रणदीप सुरजेवाला का बड़ा बयान

3, दलितो से जुड़ा अगला मामला हरियाणा से है, जहां दलितों औऱ पिछड़ो के अधिकारो को छीने जाने को लेकर कांग्रेस नेता सांसद रणदीप सुरजेवाला ने बड़ा खुलासा करते हुए हरियाणा सरकार की मिट्टी पलीत कर दी है। दरअसल सहायक प्रोफेसर भर्ती मामले में सरकार की बार बार बदली जा रही मानदंड साफ जाहिर करता है कि सरकार एससी बीसी वर्ग से नफरत करती है। ये मामला  2 अगस्त 2024 को एचपीएससी द्वारा 2424 पदो की नियुक्ति के लिए विज्ञापन के खिलाफ था, जब इनपर लाखों आवेदन आ गए तो सरकार ने नई नई शर्ते जोड़ दी थी, जिसके बाद दलित समाज के बच्चो को कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था। जिसके बाद कोर्ट ने सरकार को साफ जवाब दिया कि जब आवेदन हो गए है तो कोई नए नियम नहीं हो सकते है। जाहिर है पिछले कुछ सालो से यूपी हो, एमपी हो या हरियाणा, सभी जगहों पर सरकार भर्ती में एससीएसटी समाज के लोगो के लिए जारी मापदंज के कारण उनके लिए आरक्षित सैकड़ो सीट खाली रह जाती है, जिसे बाद में सबके लिए ओपन कर दिया जाता है। सुरजेवाला ने दावा किया कि सरकार की नरफत के कारण ही अंग्रेजी के सहायक प्रोफेसर के 613 पदों की परिक्षा के बाद भी 462 पद खाली रह गए.. पीजीटी भर्ती के 1,711 पदों में से 1,672 पद खाली रह गए.. जिनपर गरीब दलित जाति के बच्चों का अधिकार था। सुरजेवाला के इस खुलासे के बाद हरियाणा में कौन सी नई जंग छिड़ने वाली है ये देखने वाली बात होगी।

झारखंड में दलित बस्ती का रास्ता रोका

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला झारखंड के जमुआ से है, जहां जातिवादी मानसिकता के कारण पूरे दलित परिवार का ही रास्ता रोक दिया गया है। यहां तक कि छोटे छोटे बच्चो को भी स्कूल नहीं जाने दिया जा रहा है, उन्हें जातिगत अपमानित किया जा रहा है। ये मामला जमुआ प्रखंड के नवडीहा ओपी स्थित चोरगता पंचायत के कटहरियाटांड़ गांव का है, जहां दलित बस्ती के दर्जनो भर लोगो ने एक साथ आवेदन देते हुए अपनी आपबीती बताई है। आवेदन के मुताबिक उनका गांव मुख्य सड़क से करीब 800 मीटर अंदर है, और वो बाहर जाने के लिए पुराने सड़क का ही इस्तेमाल करते थे, लेकिन कुछ समय पहले गांव के कुछ जातिवादी दबंगो ने उन पर हमला बोला,, उन्हें अपनी जमीन बता कर दलित बस्ती का रास्ता ही रोक दिया है। जिसके कारण वो अपने ही गांव में कैद हो गए है। जो गांव से बाहर जाने की कोशिश करता है तो उन्हें जातिगत अपमानित और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। जिसके बाद उन लोगो ने अर्जी देकर मांग की है कि राजस्व अभिलेख नक्शे के अनुसार जंमीन के मालिकाना हक के बारे में सही जानकारी दें, और उनके लिए जायज रास्ते की व्यवस्था की जायेँ। हैरानी की बात है कि दशको से जिस रास्ते पर दलित समाज चलता आ रहा था, वो अचानक किसी की पुश्तैनी जमीन कैसे हो गई.. और प्रशासन अब तक मूक क्यों है।

आप विधायक का बीजेपी विधायक को लेकर बड़ा खुलासा

5, दलितो से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली से है, जहां बीजेपी विधायक द्वारा बीजेपी के ही दलित मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार को घर बुला कर बंधक बनाने, उनके साथ मारपीट करने और जातिवादी गालियां देने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दरअसल आम आदमी पार्टी  विधायक कुलदीप कुमार ने बीजेपी विधायक गजेंद्र ड्राल  पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीजेपी में तो उनके अपने ही लोग सुरक्षित नहीं है, तो भला वो दलित जनता की कहां से सुरक्षा करेंगे। जब वो दलित मंडल के साथ ऐसा व्यावहार कर सकते है तो आम जनता को लेकर उनकी मानसिकता कैसी होगी, उसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। सच तो ये है कि बीजेपी में दलित होना सबसे बड़ा अपराध है। उन्होंने बीजेपी विधायक गजेंद्र ड्राल के खिलाफ मामला दर्ज करने और तुरंत निलंबित करने की मांग की है। बताते चले कि इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है.. वहीं आप विधायक ने खुद ये जानकारी दी कि मंडल अध्यक्ष को कराला गांव स्थित दीपक माथुर के कार्यालय आने को कहा था, जहां उनकी मां बहन को गालियां दी गई,., उन्हें अपमानित किया गया औऱ सारी रात नंगा करके पीटा गया था। बीजेपी के दिल्ली में आने के बाद अब यहां भी जातिवाद ने अपने पैर पसार लिये है। वे दलित और वाल्मीकि समुदायों के लोगों कमजोर समझते है.. और अपने मन मुताबिक करते है। ऐसे में सवाल ये है कि क्या दिल्ली भी अब जातिवादियों का अड्डा बन रहा है.. और आप विधायक के इस खुलासे के बाद क्या होगी बीजेपी की प्रतिक्रिया।

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