Top 5 Dalit news: समाज के वाकई में कोई बदलाव ला सकता है तो वो केवल सरकार ही है। क्योंकि सही मायने में राजनीति में बैठे लोग ही जाति के नाम पर बांटते है, ताकि उनका वोट बैंक बना रहे, लेकिन सच तो ये है कि अगर वो इस भेदभाव को राजनीति को छोड़ दे तो समाज खुद बदलने लगेगा तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में जानेंगे, जिसे जानने के बाद आपको अहसास होगा कि असल में बंटने की मानसिकता फैलाने वाले तो ये राजनीति करने वाले ही फैलाते है।
चंद्रशेखर आजाद दो दिनों से संसद में बैठे धरने पर
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला राजधानी दिल्ली से है, जहां संसद के मानसूत्र सत्र के दौरान भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद की मांगो को लेकर है, जिन्होंने 20 जुलाई को जंतर मंतर पर संसद मार्च करने की तैयारी कर रहे छात्रों पर पुलिस की क्रूरता के बाद इनके लिए न्याय की मांग करते हुए खुद धरने पर बैठ गए हैं। आजाद ने वीडियो जारी ये भी ऐलान किया कि पीड़ित बच्चों को न्याय दिलाने के लिए देश भर में 25 जुलाई को भीम आर्मी व ASP समस्त देशभर में जिला मुख्यालयों पर बड़ा आंदोलन करेगी। इसी दौरान नीट पेपर लीक की घटना और दिल्ली पुलिस ने जो छात्रों पर लाठी चार्ज किया है उसे लेकर जिला मुख्यालयों ने ज्ञापन भी देंगे। आजाद ने धरना स्थल से ही संदेश दिया कि सरकार द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर चलाने का आदेश बेहद क्रूर और अन्यायपूर्ण है, इसपर सरासर रोक लगनी चाहिए। आजाद छात्रों के लिए न्याय की आवाज उठाने के लिए खुद संसद भवन के अंदर बाबा साहब आंबेडकर की मूर्ति के नीचे बैठे है, दिल्ली में जहां लगातार बारिश हो रही है, लेकिन बावजूद इसके आजाद के हौसले उससे कमजोर नहीं होने वाले, उनका संदेश साफ है कि सरकार को अपने लिए अन्याय का हिसाब देना होगा, वहीं शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा। हालांकि अब देखना ये होगा कि क्या आजाद का संसद भवन में ऐसे अनशन करना सही है, और क्या ऐसा करने से सरकार को कोई असर पड़ने वाला है। क्योंकि इतना व्यापक आंदोलन हो गया लेकिन सरकार बातचीत तक करने को तैयार नहीं हुई है, ऐसे में क्या आजाद अकेले बदलाव ला पाएंगे।
ललिता गौतम मामले में प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ से है, जहां आखिरकार प्रशासन को पता चल ही गया कि अगर दलित और पिछड़े एकजुट हो जाए तो चट्टान को हिला सकते है, फिर उनकी लठिया क्या कर लेगी। जी हां ललिता गौतम हत्याकांड में पुलिस द्वारा हुई लापरवाही को लेकर 8 जुलाई को धरना कारण रहे निहत्थे लोगों पर प्रशासन ने लाठियां बरसाई थी, तब पुलिस भारी थी, लेकिन वहीं अब राज्य के किसान ट्रैक्टर लेकर कलेक्ट्रेक्ट में घुस गए, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उन्हें रोक सके, शायद इसे ही कहते है कि समय ही सबसे ज्यादा बलवान होता है। अमेरिका में चल रहे ट्रेड डील को लेकर मेरठ के सभी जाट किसान सड़को पर उतर आए है जिनका नेतृत्व किसान नेता राकेश टिकैत कर रहे है। इस दौरान पुलिस की कमजोरी साफ जाहिर हुई कि वो केवल दलितों और कमजोरों को ही निशाना बना सकती है, वहीं खबरें आ रही है कि ललिता गौतम हत्याकांड में खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने 19 जुलाई को पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी, जिसके बाद अब 8 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार हुए दस लोगों के खिलाफ गैर जमानती आरोप हटा दिए गए है। बता दें कि ललिता गौतम हत्याकांड में दो महीने बीतने के बाद भी कई आरोपी गिरफ्त से बाहर थे, जिसे लेकर उसके परिवार समेत दलित नेताओं और संगठनों ने कलेक्ट्रेक्ट जाकर ज्ञापन देने की कोशिश की थी, लेकिन प्रशासन ने उन्हें जाने ही नहीं दिया, जिसके बाद वो सभी धरने पर बैठ गए थे। मगर कानून को अपनी जागीर समझने वाले पुलिसवालों ने निहत्थे लोगों को पीटना शुरू कर दिया। जिसके कारण सपा, आसपा समेत कई पार्टियों के शीर्ष नेताओं ने राज्य सरकार की काफी फजीहत की थी। आरोपियों को मिली इस राहत के बाद ये तो साफ है कि न्याय भले ही देर से हो, लेकिन होता जरूर है।
आंध्र प्रदेश में शादी का झांसा देकर दलित से यौन उत्पीड़न
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से है जहां एक दलित महिला को शादी का झांसा दे कर पहले तो आरोपी ने बार बार उसका यौन शोषण किया, लेकिन जब पीड़िता ने उसपर शादी का दवाब बनाया तो आरोपी न केवल शादी से मुकर गया बल्कि उसने और उसके परिवार वालों ने पीड़िता को जातिसूचक गालियां दी और जान से मारने की धमकी भी दी। ये घटना विशाखापत्तनम के वाइजैग के एमआर पेटा थाना क्षेत्र का है। जब पहली बार साल 2019 में ही ये मामला सामने आया था। 22 साल की पीड़िता ने अपने लिए न्याय की गुहार लगाई जिसके बाद पुलिस ने तुरंत आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही की। इस मामले में धोखा देने वाले आरोपी जगदीश्वर राव को विशाखापत्तनम की एक अदालत ने आखिरकार 7 सालों बाद आजीवन कारावास की सजा सुनाई है साथ ही उसपर 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। वहीं पीड़िता का जान से मारने की धमकी देने और जातिसूचक गालियां देने के मामले में प्रभावती को छ महीने की सजा और पी त्रिवेणी पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। भले ही न्याय मिलने में 7 सालों का लंबा इंतजार था लेकिन पीड़िता को सही न्याय जरूर मिला।
यूपी के अमरोहा में दलित महिला का अपहरण
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के अमरोहा से है, जहां न तो सरकार दलितों का उत्पीड़न रोक पा रही है और न ही उनका जबरन धर्म परिवर्तन। ताजा मामला अमरोहा के हसनपुर थाना क्षेत्र के सैदनगली के उझारी का है, जहां एक दलित जाति से आने वाली नर्स, जो साईं जीवनदान अस्पताल में काम करती थी, उसे अस्पताल के संचालन से बहकाया और भगा कर ले गया, वहीं पीड़ित परिवार ने जब गायब बच्ची की खोजबीन की तो अस्पताल के कर्मचारियों ने धमकी दी कि चले जाओ यहां से नहीं तो तुम्हे भी कलमा पढ़वा कर मुसलमान बना देंगे। पीड़ित परिवार को डर है कि कहीं उनकी बेटी का धर्म परिवर्तन करा कर शादी न करा दी गई हो। उन्होंने एबीजी खुलासा किया है आरोपी ने पहचान छिपाकर अस्पताल का संचालन किया हुआ था, वहीं दलित लड़की की शादी तय हो चुकी थी मगर आरोपी ने उसकी शादी तुड़वा दी और उसे लेकर फरार हो गया। परिजनों ने साईं जीवनदान अस्पताल को लव जिहाद और गौकशी का अड्डा कहा। वहीं पुलिस भी इस खुलासे बाद हरकत में आ गई, वो अवैध रूप से चलने वाले इस अस्पताल की जांच में लग गई है तो वहीं गायब दलित युवती की तलाश भी जारी है। हालांकि अभी तक उसका कोई सुराग नहीं लगा है। अब देखन ये होगा की क्या पुलिस पीड़िता का सही सलामत ला पाएगी, वहीं अस्पताल की जांच के बाद क्या क्या खुलासे होते है।
कर्नाटक की सरकार का राज्य के युवाओं को बड़ा तोहफा
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक से है, जहां अभी हाल में निर्वाचित नई सरकार ने राज्य में अलग अलग विभागों में कुल 72,186 रिक्त पदों को भरने का फैसला लिया है। जिसमें 6 महीने के अंदर सभी अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के खाली पड़े बैकलॉग पदों को भरने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस मुद्दे पर उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कई दलित संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करके scst cast से जुड़े कैंडिडेट्स को उनका पूरा अधिकार मिले, ये सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। सरकार ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और बड़े सरकारी विभागों में खासकर scst वर्ग के लिए आरक्षित खाली पदों को भरने के लिए प्राथमिकता देने के भी निर्देश जारी लिए है। रिक्त पदों को भर्ती के लिए सरकार ने आने वाले 2 महीने के अन्दर नौकरियों का नोटिफिकेशन जारी करने , और फिर 4 महीने में ही परीक्षाएं करवाने और 6 महीने के अन्दर उत्तीर्ण कैंडिडेट को उनकी नियुक्ति पत्र जारी करने का अहम लक्ष्य रखा है। कर्नाटक सरकार के इस फैशलेन्सी न केवल scst वर्ग के ही बल्कि अन्य जातियों के युवाओं में भी खुशी की लहर है। जो सालों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे लेकिन सरकार की ढ़िलाई के कारण ये पद सालों से रिक्त पड़े थे। वैसे इस फैसले को देखकर लगता है कि जिस मकसर से कर्नाटक सरकार बदली गई थी वो मकसद शायद पूरा होना शुरू हो चुका है।



