Top 5 Dalit news: धर्म बदलने के बाद भी क्या जातिगत उत्पाड़न खत्म हो जाता है। नहीं.. हम सभी जानते है कि धर्म केवल कागजों पर बदला जाता है, क्योंकि जातिवादी मानसिकता के आतंकियों के लिए वो तब भी दलित और पिछड़े ही रहते है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो आपको भी सोचने पर मजबूर कर देंगे कि क्या धर्म बदलने से जाति बदल जाती है.. क्योंकि जातिगत उत्पीड़न तो तब भी नहीं बदलता.. तो क्या धर्म बदलना सहीं है या गलत।
चिराग पासवान ओऱ जीतन राम मांझी में जुबानी जंग
1,दलितों से जुड़ा पहला मामला बिहार की राजनीति में अनुसूचित जाति के लिए कोटे के अंदर कोटा दिए जाने को लेकर भरी उथल पुथल मची है। कोटे के अंदर कोटा होना चाहिए या नहीं उसे लेकर दो केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी और चिराग पासवान के बीच जुबानी जंग काफी तेज हो गई है। एक तरफ मांझी और उनके बेटे संतोष सुमन चाहते है कि आरक्षण की समीक्षा और उसका उप-वर्गीकरण होना चाहिए तो वहीं चिराग पासवान इसके खिलाफ है। आपको बता दें कि मांझी समुदाय काफी लंबे समय से एससी आरक्षण में भी वांछित श्रेणी के लाभ दिए जाने की मांग कर रहा है वहीं वो सभी sc समुदाय को एक समान मानने से भी इनकार कर रहे है, क्योंकि इससे जो वाकई में वंचित है उन्हें नुकसान होता है, वो लाभ से वंचित रह जाते है। वहीं चिराग पासवान का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो अनुसूचित जाति वर्ग के सभी लोगों के समता को ठेस पहुंचेगी। दो दलित नेताओं के बीच आरक्षण की समीक्षा और कोटे के अंदर कोटा दिए जाने को लेकर चल रही बहस देख कर साफ अंदाजा लगाया जा रहा है कि बिहार में दलित राजनीति में बड़ा बदलाव आने वाला है। ऐसे ने देखना ये होगा कि दलित असल में किसका नेतृत्व स्वीकार करते है।
गाजियाबाद में दलित भाइयों के साथ मारपीट
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से है, जहां केवल गलती से टच होने पर दबंगों ने दो दलित भाइयों के साथ न केवल जातिगत उत्पीड़न किया बल्कि उनके साथ मारपीट भी की। ये घटना गाजियाबाद के मोदीनगर थाना क्षेत्र के तिबड़ा गांव की है। पीड़ित के मुताबिक वो और उसका भाई किसी काम को लेकर पंचायत भवन गए थे, जहां गांव का ही एक ऊंची जाति का युवक जानबूझ कर उसके कंधे से टकरा गया, जिसके बाद उसने पीड़ित के साथ लड़ाई शुरू कर दी। इस दौरान आरोपी के कुछ साथी भी वहां पहुंच गए, लेकिन पीड़ित ने आरोपी की बातों का विरोध किया तो उन लोगो ने पंचायत भवन में ही मारपीट शुरू कर दी, यहां तक कि बीचबचाव करने आए पीड़ित के भाई पर भी लाठी-डंडों और धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में दोनों को काफी गंभीर चोटें आई है। वहीं पीड़ित के भाई की हालत गंभीर है और उसे निजी अस्पताल में रेफर कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने भी तहरीर और मेडिकल के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
केरल सरकार का दलित इसाइयों को लेकर बड़ा ऐलान
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला केरल से है, जहां सीएम वीडी सतीशन ने दलितों इसाईयों को अनुसूचित जाति के आधार पर मिलने वाले आरक्षण को देने को लेकर बड़ा ऐलान किया है, जिससे केरल की राजनीति में भारी उथलपुथल मच गई है। बता दें कि केरल के समाज सुधारक अय्यनकाली की 163वी जयंति के मौके पर हुए कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे केरल सीएम ने दलित इसाईयों और एससी समाज के लोगो को आरक्षण के लाभ से वंचित रखने की बात करते हुए कहा कि वो जल्द ही इस मामले की गहीनता से अध्ययन करेंगे औऱ इस समस्या का समाधान निकालेंगे.. लेकिन वहीं दलित ईसाइयों के जातिगत आरक्षण को लेकर हमेशा से खिलाफ रही बीजेपी को केरला सीएम की बात पची नहीं औऱ उनव लोगो ने उन्हें घेरना शुरु कर दिया। बीजेपी एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष शाजूमोन वट्टेक्कड़ ने तो सीएम को चेतावनी तक दे दी है कि अगर एससी वर्ग का अधिकार छीन कर दलित इसाइयों को दिया जायेगा तो पूरे राज्य में इसके खिलाफ बड़ा आदोंलन किया जायेगा.. बेहतर है कि सरकार अपना फैसला वापिस ले ले.. वर्ना परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे। धर्म बदलने से जातिगत भेदभाव नही मिटता.. फिर इसाई आपस में ही क्यों नहीं समस्या का हल निकालते.. सरकार का ये कदम धर्म परिवर्तन करने के बाद भी लाभ लेने वालो को सुरक्षा देगी.. जो हिंदू धर्म के दलितों पर अत्याचार होगा।
भीम आर्मी चीफ मे 24 सितंबर को जंतर-मंतर आने को कहा
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने आरक्षण को खत्म करने की मांग करते हुए आंदोलन करने वालो को करारा जवाब देने के लिए 24 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर संपूर्ण भागीदारी जन आंदोलन करने का ऐलान किया है। जिसके लिए आजाद ने भारी संख्या में लोगो को वहां एकत्रित होने का आहवान किया है। ये इस आंदोलन को सवर्णों के लिए एक चुनौती की तरह देखा जा रहा है। जहां आजाद ने सीधे कहा है कि इस देश के दलित पिछड़े भारत के मूलनिवासी हे! आप कुत्ता पालो,,बिल्ली पालो,,भेड़ पालो,,बकरी पालो!कुछ भी पालो लेकिन ये गलत फहमी मत पालना, कि आरक्षण को हटा दोगो.. जब तक बाबा साहब की औलादे जिंदा हे, इस देश में सविंधान की रक्षा करने वाले है!तब तक कोई माई का लाल आरक्षण का आ भी नही हटा सकता है! और ये वादा है हमारा। अब देखना ये होगा कि हर बार की तरह क्या फिर से आजाद के कारवा को रोकने के लिए सरकार कोई नई चाल चलती है.. आपको क्या लगता है।
धर्म न बदलने पर भी दलित हिंदू के शव को दफनाया
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के देवरिया से है, जहां जातिगत उत्पीड़न से एक 65 साल के बुजुर्ग इतने ज्यादा परेशान हो गए थे कि मरने के बाद उन्होंने इस्लामिक रीति रिवाज से खुद को दफनाने की इच्छा रखी थी। ये मामला देवरिया जिले के सोनुघाट गांव का है, जहां दलित हिंदू व्यक्ति मोहन प्रसाद की मौत के बाद जब उसके अंतिम संस्कार की बात आई तो उसके परिवार ने उसकी इच्छा का सम्मान किया लेकिन वहीं गांव के दूसरे हिंदू लोगो ने इनका विरोध शुरु कर दिया। जिसके कारण मामले की गंभीरता को देखते हुए परिजनो ने पुलिस को बुलाया.. और विरोध कर रहे लोगो को वहां से शांत करके भेजा गया औऱ फिर इस्लामिक रिती रिवाज से दफना दिया गया। हैरानी की बात है कि पूरे परिवार में केवल मृतक औऱ उसकी पत्नी ही इस्लामिक रीति रिवाज को फॉलो करते है, जबकि बाकि परिवाह हिंदू धर्म को मानता है। वहीं दस्तावेजों में वो अब भी हिंदू ही है.. वैसे ये कोई पहला मामला नहीं है.. जातिगत भेदभाव के कारण बहुत से दलित समाज के लोग धर्म बदले बिना ही दूसरे धर्म को फॉलो करने लगते है। हालांकि धर्म बदलने पर आरक्षण का लाभ न मिलने के बाद भी उत्पीड़न होता ही रहता है.. जिस कारण बहुत से दलित है जो चाह कर भी धर्म नही बदल सकते है.. ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या धर्म बदलने के बाद जातिगत आरक्षण मिलना चाहिए या नहीं.. आपको क्या लगता है।


