Top 5 Dalit news: क्या इस देश का कानून इतना कमजोर है कि केवल आंदोलन की धमकी देने से किसी केस का रूख बदल जायें.. या ये केवल जातिवादी मानसिकता को दर्शाता है, जहां पीड़ित दलित है तो उनके मामले को पूरी तरह से दबा देने से भी बाज नहीं आती है पुलिस..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो सवाल उठाते है कि क्या दलित होने के कारण आप न्याय से वंचित रह सकते है.. क्या उंची जाति में होने से उनके सारे गुनाह माफ किये जा सकते है।
झांसी में दुष्कर्म पीड़िता को 7 साल बाद न्याय
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के झांसी से है जहां एक बुजुर्ग महिला को अपने साथ हुए दुष्कर्म के मामला में न्याय मिलने में 7 सालों का लंबा इंतजार करना पड़ा। हालांकि पीड़िता को आखिरकार न्याय मिला और आरोपी को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा और दो लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। ये मामला झांसी के एरच थाना क्षेत्र के एक गांव का है। पीड़िता ने पुलिस को 23 अगस्त 2019 को तहरीर देते हुए बताया था कि शाम को करीब चार बजे अपने खेतों में रखवाली कर रही थी कि तभी ककरबई थाना क्षेत्र के धन्नौड़ गांव का रहने वाले आरोपी भज्जू ढीमर ने पीड़िता पर पीछे से हमला कर दिया। पहले आरोपी ने पीड़िता को बांधा और फिर उसका दुष्कर्म किया। जिसके बाद आरोपी फरार हो गया, किसी तरह महिला अपने घर पहुंची और पति को सारी आपबीती सुनाई। पुलिस ने तहरीर के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि पीड़िता को न्याय के लिए सात सालों को इंतज़ार करना पड़ा लेकिन एससी-एसटी एक्ट कोर्ट के विशेष न्यायाधीश नेत्रपाल सिंह ने आरोपी की सजा का ऐलान किया। पीड़िता ने इस मामले में पुलिस की भूमिका को भी सराहा है। वैसे ये बहुत कम होता है जहां दलितों से मुद्दों पर पुलिस तेजी से काम करती है।
बरनाला में दलित मजदूरों पर हमले के खिलाफ पंजाब बंद
दलितों से जुड़ा अगला मामला पंजाब के बरनाला से है, जहां दलित सफाई कर्मचारियों के साथ पुलिस की बदसलूकी और लाठीचार्ज के खिलाफ अब लोग सड़कों पर उतर आ आए है। पीड़िता को न्याय दिलाने को लेकर होशियारपुर ने 30 जुलाई को दलित संगठनों ने पंजाब बंद कर दिया। गौरतलब है कि बरनाला में 20 जुलाई 2026 को सफाई कर्मचारियों ने अपनी नौकरियों को पक्का करने और सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल और प्रदर्शन शुरू कर दिया था, लेकिन पुलिस ने उनपर लाठीचार्ज कर दिया। जिसमें कई मजदूरों और महिलो को गंभीर चोटें आई है। लेकिन इतनी बड़ी घटना होने के बाद सरकार की अनदेखी देखते हुए पीड़ितों के साथ हुई इस वीभत्स घटना को लेकर सफाई सेवक यूनियनों, श्री गुरु रविदास सभाओं, डॉ. बी.आर. आंबेडकर सभाओं और भगवान वाल्मीकि सभाओं ने एकजुटता दिखाते हुए व्यापक आंदोलन शुरू कर दिया है। उनकी केवल एक ही मांग है कि बरनाला में जो भी हुआ उसके जिम्मेदार डीएसपी सतबीर सिंह बैंस और इंस्पेक्टर एसएचओ लखविंदर सिंह को तुरंत बर्खास्त किया जाए। साथ ही पीड़ित मजदूरों की स्थिति देखने के बाद उसपर उनके खिलाफ धारा 307 (हत्या के प्रयास) का मामला भी चलाया जाए। हालांकि अभी तक सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अब सवाल ये है कि क्या सरकार पुलिस वालों को लेकर जानबूझ कर ढिलाई कर रही है।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके का बड़ा बयान
दलितों से जुड़ा अगला मामला कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर है जिन्होंने नीट पेपर लीक मामले में आंदोलन करके दीपके ने एक तरफ स्टूडेंट पावर दिखाई तो वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी ने उन्हें रोकने और छात्रों के साथ दगाबाजी करने का भारी दवाब बनाया। ये खुलासा खुद सीजेपी के अध्यक्ष ने किया है। अभिजीत यूपी के छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे थे जहां उन्होंने मीडिया के सामने बीजेपी की पोलपट्टी खोलते हुए कहा कि बीजेपी ने आंदोलन के दौरा उन्हें बार बार धमकी दी। वो उनपर दवाब बना रहे थे कि अभिजीत बीजेपी ज्वाइन कर कर वरना उनका रिजल्ट उनकी फैमिली को भुगतना पड़ेगा। अभीजित ने आगे कहा कि उनपर देश की संस्कृति को भ्रष्ट करने का संगीन आरोप लगा है लेकिन अगर देश के भविष्य के लिए लड़ना, लोकतंत्र की रक्षा के लिए सरकार से सवाल करना, अगर संस्कृति को भ्रष्ट करना तो वो भ्रष्ट है। लेकिन वो अपना संघर्ष जारी रखेंगे। अभीजित ने जेन जी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि जेन जी भारत की संस्कृति, लोकतंत्र और देश को अब अच्छी तरह संभाल सकती है। वहीं जंतर मंतर पर पुलिस की बर्बरता को लेकर भी उन्होंने बीजेपी को जिम्मेदार ठहराया जिनके इशारे पर छात्रों के साथ आतंकियों जैसे व्यवहार किया गया। सरकार के लगाए सारे इल्ज़ाम केवल जुबानी है, उनके पास कोई सबूत नहीं है। ये केवल उनकी तानाशाही दिखाती है। दीपके के इस खुलासे के बाद बीजेपी की छवि को इससे क्या नुकसान होगा, और क्या अभिजात भी यूपी में बीजेपी की जमीन खोदने के लिए लगे गये है।
टिहरी गढ़वाल में केतनलाल हत्याकांड में नया मोड़
दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल से है, जहां 7 जून को एक 18साल के दलित लड़के की पीट पीट कर हत्या किए जाने का मामले में एक बड़ी सनसनीखेज बात सामने आई है। मारपीट का शिकार हुए दोनों दोस्तों में से एक युवक केतनलाल की मौत हो गई थी तो वहीं दूसरे युवक दिवाकर डिमरी पर लड़की की मां ने आरोप लगाया था कि दोनों युवकों ने उनकी बेटी के साथ गैंगरैप किया था, और ब्लैकमेल कर रहे थे। जिसके बाद उल्टा दोनों युवकों के खिलाफ ही मामला दर्ज कर केतनलाल के दोस्त को ही गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक लड़की के घरवालों ने मेडिकल रिपोर्ट दिखाई है जिसमें दुष्कर्म की बात सामने आई है। जिसके आधार पर केतनलाल के दोस्त को गिरफ्तार किया है। इस केस में आया ये बदलाव साफ दिखाता है कि मामले का पूरा रुख बदलने की कोशिश की गई है खासकर दलित संगठनों का सपोर्ट मिलने के बाद। लेकिन पुलिस दिवाकर डिमरी को गिरफ्तार करके केस को पूरी तरह से बदल दिया है, जबकि पीड़ित दिवाकर का कहना है कि वो केवल केतनलाल के कहने पर उसके साथ गया था और खुद लड़की ने फोन करके बुलाया था। केतन के साथ साथ उसे भी बुरी तरह से पीटा गया। और अब उसकी आवाज दबाने के लिए उनपर संगीन आरोप लगाए जा रहे है। हैरानी की बात तो ये है कि इन सबमे लड़की के बयान को लेकर कोई बात सामने नहीं आई है। केवल लड़की मां ने जबरन आंदोलन की धमकी देकर दिवाकर डिमरी को गिरफ्तार करवाया है। ऐसे में देखन ये होगा कि क्या जानबूझ पर मामले को बदला जा रहा है ताकि दलितों का मुद्दा होने के कारण लोग इसे जल्दी भूल जाए, और फिर से दलित अन्याय सह कर चुप चाप खड़ा रहे।
भीम आर्मी चीफ का बड़ा ऐलान
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जो नीट पेपर लीक में छात्रों के साथ जमकर खड़े रहे है, उन्होंने विधानसभा में भी उनके लिए आवाज उठाई थी, लेकिन अब उन्होंने एक नया ऐलान कर दिया है..आजाद इस वक्त आगामी विधानसभा को लेकर चुनावु रैलियां कर रहे है, इस दौरान उन्होने चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए ऐलान कर दिया है कि अब तक सरकार की कई दमनकारी नीतियों का सामना कर चुके है उनके खिलाफ मोर्चा खोल चुके है, लेकिन अगला मोर्चा देश में EVM के खिलाफ होगा। आजाद ने कहा कि आज देश जाग रहा है, नौजवान जाग रहा है, क्रांति का बिगुल बज चुका है। अब भ्रष्ट मीडीया को भी करारा जवाब मिलेगा जो मुद्दों को डायवर्ट करने का काम करते है। इस सत्ता को बचाने का काम करते हैं.. उन्होंने मीडिया पर तीखा वार करते हुए कहा कि वो सरकार में आते ही सबसे पहले मीडिया की ही ईलाज करेंगे.. जो जो मुख्य मुद्दों पर आवाज उठाने के बजाय सरकार के झूठे गुण गाने में व्यस्त रहते है। आजाद का ऐलान बता रहा है कि आने वाले समय में बहुत कुछ बदलने वाला है।



