Meerut news: हाल ही में उत्तर प्रदेश के उत्तर प्रदेश के मेरठ से हैरान और परेशान करने वाला मामला सामने आया है। जहाँ मेरठ के पॉश इलाकों में रहने वाले लोग गंदगी, बदबूदार पानी, जल-जमाव और खुले बिजली के तारों से परेशान हैं। इतना ही नहीं वहाँ भी अमीर और पढ़े लिखे लोगों की बस्ती में भी ऐसा जातिवाद का बोलबाला है, जिसका नमूना देखने को मिला।
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पॉश इलाके में भी दलित बस्ती का बुरा हाल
कहने को हर जगह विकास होता दिख रहा है, लेकिन दलित बस्तियों की हालत बहुत खराब है; आज भी गलियों में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, बिजली के तार खतरनाक ढंग से लटके हुए हैं और विकास का काम भी जाति के आधार पर किया जाता है। दरअसल मेरठ के वार्ड 16 इलाके को जिले का काफी रहीस इलाका माना जाता है लेकिन वार्ड 16 अजंता कॉलोनी (Ward 16, Ajanta Colony) के ही दलित बस्ती को प्रशासन ने पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। बाहर से तो ये काफी विकसित लगता है लेकिन दलित बस्ती में न तो सड़के है और न ही बिजली पानी की सटीक व्यवस्था। बिजली के नंगे तार लटक रहे है, जो यहां के लोगों को मौत के साये में जीने पर मजबूर कर रहा है।
गलियों में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं
इतना ही नहीं स्थानीय लोगों ने कई बार इसके लिए शिकायत भी की की लेकिन प्रशासन कानों में तेल डाल कर सोई है। दलितों की बस्ती को अलग थलग करने के लिए जिन सड़कों का पक्का निर्माण करवाया गया वो भी बस्ती से ऊंचा है। बारिश के दिनों में दलितो के घरों में गंदा और दूषित पानी घुस जाता है.. न तो पानी निकासी की व्यवस्था की गई और न ही अब तक कोई कूड़ा गाड़ी की… सड़को पर गंदगी कई कई दिनों तक फैली रहती है.. यहां रहने वाले पीड़ित परिवारों का कहना है कि वो इस नारकीय जिंदगी को जीने के लिए मजबूर है, नेता केवल चुनावों के समय चेहरा दिखाते है, और फिर उनका हाल तक जानने की जरूरत किसी को महसूस नहीं होती।
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जातिगत भेदभाव के आधार पर किया जा रहा है विकास
उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाता हैं जैसे वो कोई भारत के नागरिक नहीं बल्कि बाहर से विस्थापित होकर आए है। वहां रहने वाले नागरिको का कहना है कि राज्य में विकास भी जातिगत भेदभाव के आधार पर हो रहा है… इस खबर के सामने आने के बाद एरिया की पार्षद ने सफाई पेश की है क्षेत्र में सफाई कर्मचारी की कमी है इसलिए काम में देरी हो रही है..सोचने वाली तो ये है कि जो हालात दलित बस्ती के है वो दो चार दिन में होने वाले हालात तो है नहीं.. फिर क्या माना जाये.. क्या दलित बस्ती होने के कारण ही उन्हें अनदेखा नहीं किया गया.. आपकी किया राय है हमें कमेंट करके बतायें।



