संविधान के 6 मौलिक अधिकार और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण अनुच्छेद – Fundamental Rights in India

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Fundamental Rights in India: Suppose किजिए.. आप एक नॉर्थ इस्ट स्टेट से है और एक क्रिश्चन है.. लेकिन आप मुम्बई जाकर फिल्मों में काम करना चाहते है, वहां अपना करियर बनाना चाहते है.. लेकिन जब आप मुम्बई पहुंचते है तो आपको पहले तो आपके स्टेट और धर्म के कारण काम नहीं मिलता और जहां मिलता भी है तो वहां आपको भेदभाव का सामना करना पड़ता है। आपको ऐसा अहसास कराया जाता है कि आप महाराष्ट्र से नहीं है तो आप यहां नहीं रह सकते है। आपको अपने स्टेट वापिस चले जाना चाहिए.. ऐसे स्थिति में आप क्या करेंगे.. क्या वापिस अपने स्टेट चले जायेंगे.. महाराष्ट्र जो कि आपका राज्य नहीं है। क्या वहां के लोगो को आपके साथ ऐसा करने का अधिकार है। अगर है तो क्यों… और अगर नहीं तो क्यों नहीं..भारत जो कि 28 राज्यों से मिलकर बना है.. जिसे एक संविधान ने एक साथ जोड़ा है.. ऐसे में अगर आपको य़े भेदभाव सहना पड़े तो आपके पास क्या इसका विरोध करने का अधिकार है। जी हां, आज हम आपको एक भारतीय होने के उन मूल अधिकारों से रूबरू करायेंगे.. जो आपको भारत के किसी भी राज्य में जाकर बसने, कमाने खाने की आजादी देता है.. जिन्हें संविधान में हमारे मौलिक अधिकार कहें गए है।

संविधान से भाग 3 में Article 12 से लेकर Article 35 तक आपको भारतीय होने पर मिलने वाले 6 मौलिक अधिकारों यानि की Fundamental Rights के बारे में बताया गया है। इंडियन Constitution का पार्ट 3, जिसमें भारत का मैग्नाकार्टा के बारे में बताया गया.. जो एक रिटेन Document है आपके Fundamental Rights of Citizens को लेकर.. मौलिक अधिकार असल में वो अधिकार होते है जो न तो कोई व्यक्ति औऱ न ही कोई सरकार हमसे छीन सकती है.. जीवन को बेहतर औऱ सूचारू रूप से जीने के लिए अमेरिकन Constitution से इंडियन Constitution में शामिल किया गया था।

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ये 6 Fundamental Rights है

1, समता का अधिकार(Right to Equality) आर्टिकल 14 से लेकर आर्टिकल 18 तक)

2, स्वतंत्रता का अधिकार Right to Freedom( आर्टिकल 19 से लेकर आर्टिकल 22 तक)

3, शोषण के विरूद्ध अधिकार Right against Exploitation( आर्टिकल 23 और आर्टिकल 24)

4, धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार- Right to Freedom of Religion ( आर्टिकल 25 से आर्टिकल 28 तक)

5, संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार- Rights to Culture and Education( आर्टिकल 29 और आर्टिकल 30)

6, संवैधानिक उपचारो का अधिकार- Right to Constitutional Remedies ( आर्टिकल 32)

संविधान के मौलिक अधिकार

ये मौलिक अधिकार किसी भी भारतीय को 6 ऐसे अधिकार देता है, जिसके मुताबिक अगर आप भारत के नागरिक है, तो आप किसी भी धर्म, किसी भी जाति, किसी भी समुदाय, किसी भी क्षेत्र अथवा राज्य के हो, आपको ये पूरा अधिकार है कि आप भारत के किसी भी कोने में जाकर अपनी इच्छा का कार्य कर सकते है, अपने धर्म को आजादी से मान सकते है। अपने रीलिजन के अकोर्डिंग पूजा पाठ, तीज त्योहार मना सकते है। न तो किसी नागरिक को, और न ही राज्य की सरकार को ये अधिकार है कि वो आपके इन अधिकार का हनन करें। वहीं आपको भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है तो आपके पास ये अधिकार है कि आप सीधा अपनी याचिका हाइ कोर्ट में या फिर सुप्रीम कोर्ट में दायर कर सकते है। जो हमारे मूल अधिकारों के रक्षक कहलाते है।  कानून की नजरो में सभी सामान है, कोई भी किसी के साथ उसकी धर्म, जाति, लिंग, स्थान के आधार पर भेदभाव करता पाया गया तो वो कानूनन गुनहगार होगा। वहीं आर्टिकल 12 के अनुसार स्टेट जिसमें सेंट्रल गवर्नमेंट, स्टेट गवर्नमेंट और लोकल गवर्नमेंट शामिल होते है,, वो किसी के मूल अधिकारों का हनन नही कर सकते है लेकिन वो शांति बनाये रखने के लिए कुछ नियम जरूर बना सकते है।

कब मौलिक अधिकार को रोका जा सकता है

अगर आपको अपने हक के लिए आवाज उठानी है तो आप कानून का सहारा ले सकते है कोर्ट जा सकते है, शांतिपूर्ण अहिंसक धरना प्रदर्शन भी कर सकते है.. लेकिन अगर इस दौरान कानून का अपमान होता है, या प्रदर्शन हिंसक हो जाता है तो सरकार को ये अधिकार होगा कि वो आप पर कानूनी कार्यवाई करें। वहीं युद्ध, इमजेंसी जैसी स्थिति में व्यक्ति के मूल अधिकारों को छीना जा सकता है.. जिसका  आर्टिकल 358 और आर्टिकल 359 में बताया गया है.. हालांकि ये टेम्पेरेरी होता है और इसे राष्ट्रपति द्वारा लागू किया जाता है, वहीं अनुच्छेद 20 और 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को इमरजेंसी की कंडीशन में भी सस्पेंड नहीं किया जा सकता है। वहीं 86वें संविधान संशोधन में हर भारतीय को शिक्षा का अधिकार दिया गया, जो कि आर्टिकल 21 ए का हिस्सा बना।

इसके तहत 6 साल से 14 साल तक के हर बच्चे को सरकार की तरफ से मुफ्त शिक्षा दी जायेगी। वहीं 22 के मुताबिक व्यक्ति को गिरफ्तारी और हिरासत से सुरक्षा का अधिकार दिया जाता है, गिरफ्तार किये व्यक्ति को उसके अपराध के बारे में जानकारी देना अनिवार्य है, साथ ही उसे 24 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के सामने पेश कराना होगा, वहीं वो अपनी इच्छा से वकील कर सकता है,, वही शक के आधार पर गिरफ्तार करने के बाद भा बिना सलाहकार बोर्ड के अनुमति के 3 महीने से ज्यादा समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता है।

वहीं PREVENTIVE DETENTION यानि की निवारक निरोध की स्थिति में शक के आधार पर गिरफ्तार व्यक्ति को बिना अनुमति और वारंट के भी हिरासत में लिया जा सकता है बर्शते उसकी गतिविधि देश विरोधी होना चाहिए। मौलिक अधिकारों में सशोधन भी किया जा सकता है जिसका अधिकार पार्लियामेंट के पास है। आर्टिकल 368 में संशोधन करने की प्रक्रिया दी गई है। हालांकि संशोधन के लिए लोकसभा और राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत होना अनिवार्य है, संशोधन के कारण मूल ढांचा, BASIC STRUCTURE में कोई बदलाव नहीं होना चाहिए। अगर मूल ढांचे को किसी भी तरह से नुकसान होता है तो सुप्रीम कोर्ट उसे NULL AND VOID करार दे सकती है। एक इंडियन सीटीजन के तौर पर ये अधिकार आपको स्वतंत्रता के साथ जीने.. आजाद महसूस करने की शक्ति देते है।

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