Vande Mataram Bill 2026: वंदे मातरम बिल को लेकर संसद में संग्राम, विपक्ष क्यों कर रहा विरोध?

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Vande Mataram Bill 2026: 24 जुलाई 2026 को सत्ताधारी बीजेपी ने मानसूत्र सत्र के दौरान राज्यसभा में एक प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव में  ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ (मूल कानून) की धारा 3 में संशोधन करने की बात की गई थी, और नए प्रस्ताव में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह ही कानूनी सुरक्षा और समान दर्जा देने का प्रस्ताव रखा गया.. जिसे वंदे मातरम बिल कहा गया। लेकिन क्या विपक्ष राजी हुआ, बिल्कुल नहीं.. इस बार जो संसद में हो रहा है वो नज़ारे शायद आपको कभी पहले देखने को नहीं मिले होंगे। विपक्ष पर पक्ष पूरी हावी है। 29 जुलाई आखिरकार भारी विरोध और विपक्ष के वॉयकॉट के बाद भी  ‘राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026’ को राज्यसभा में पारित कर दिया गया.. अब सवाल ये है कि वंदे मातरम बिल क्या है.. और विपक्ष इसपर इतना हंगामा क्यों कर रही है.. जानेंगे सबकुछ डिटेल्स में..

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वंदे मातरम बिल पास

7 नवंबर 1875 को महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था, जिसे वर्ल्ड फेमस नोवेल आनंदमठ में 1882 में शामिल किया गया था..और 1896 में भारतीय राष्ट्री कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने इसे गाया, तो दुनिया की नजरो पर ये गीत एक लीजेंड बन गया.. लेकिन 24 जनवरी 1950 को एक तरफ जन गण मन को राष्ट्रगान का दर्जा मिला तो वंदे मातरम को भी राष्ट्रगीत का दर्जा दिया.. 26 जनवरी 1950 भारत एक संवैधानिक देश बन चुका था.. लेकिन परेशानी ये थी कि संविधान का सम्मान कितने करते थे.. वहीं धर्म के नाम पर भड़काने वालों ने राष्ट्र गान को उनके कौम के विरूद्ध माना.. उसका सरेआम अपमान कया जाता था, नतीजा साल 1971 में राष्ट्र सम्मान का अपमान करने वालों के नाक में नकेल डालने के लिए ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम बिल पास किया गया था, हालांकि उस वक्त उसमें केवल राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज औऱ संविधान के अपमान की रोकथाम के लिए कानून पारित किया गया था। लेकिन करीब 55 सालो के बाद मोदी सरकार ने वंदे मातरम के सम्मान में वंदे मातरम’ बिल 2026 (Vande Mataram Bill 2026)  लाने का फैसला किया।

संसद में भारी हंगामे के बीच बिल क्यों हुआ पास?

29 जुलाई को बिल के पारित होने के बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को भी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह ही कानूनी सुरक्षा और समान दर्जा मिलेगा। प्रस्ताव के पास होने के बाद वंदे मातरम का अपमान करने वालो की अब खैर नहीं.. जो भी ऐसा करता पाया गया उसे अपमान और बाधा डालने के आपु में एक गंभीर दंडनीय अपराध मान कर सजा सुनाई जायेगी। जिसमें दोषी को अधिकतम 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। वहीं अगर कोई व्यक्ति एक बार दोषी ठहराए जाने के बाद दोबारा राष्ट्र गीत का अपमान करता पाया गया तो उसे कम से कम 1 वर्ष की अनिवार्य जेल का प्रावधान शामिल किया गया है।

संसद में क्यों मचा बवाल?

इस बिल के पारित होने से विपक्ष कुछ खास खुश नहीं है.. 24 जुलाई को जब प्रस्ताव दिया गया था तभी से ही संसद के बाहर औऱ सदम के अंदर विधेयक को लेकर भारी राजनीतिक ड्रामा और तीखी बहस देखने को मिली, यहां तक कि 29 जुलाई 2026 को जब राज्यसभा में इस बिल पर वोटिंग हो रही थी, तब कांग्रेस, वामपंथी (Left) दलों और कई क्षेत्रीय पार्टियों ने इसके विरोध में सदन से वॉकआउट (सदन का बहिष्कार) कर दिया।

विपक्ष ने हवाला दिया कि सरकार इस बिल के जरिए धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना चाहती है, क्योंकि कुछ समुदायों को ‘वंदे मातरम’ की कुछ पंक्तियों पर वैचारिक आपत्तियां हैं, जिस कर वो सार्वजनिक तौर पर वंदे मातरम नहीं गाते,. इसिलए ये कानून नहीं बनना चाहिए। वहीं विपक्ष की Parliamentary Committee चाहती थी कि बिल को डायरेक्ट पास करने के बजाय पहले संसद की स्थायी समिति (Standing Committee) के पास जांच के लिए भेजा जाए, जिसे सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया।

वहीं विपक्ष की हरकतों से सत्ता रूढ़ बीजेपी भी बुरी तरह से तिलमिला गई और सरकार की तरफ से मंत्रियों ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ का विरोध करना देश के स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रीय गौरव का अपमान है। सरकार ने इसे ‘राष्ट्र प्रथम’ की नीति का हिस्सा बताया। सरकार की दलीलो के आगे विपक्ष चारो खानो चित्त हो गई थी.. लेकिन फिर भी वो हार नहीं मानी.. विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ ‘विभाजनकारी राजनीति बंद करो’ के नारे लगाए, जिसके कारण राज्यसभा की कार्यवाही को कुछ समय के लिए स्थगित भी करना पड़ा था।

लेकिन सरकार पूरी तैयार के साथ आई थी.. विपक्ष के सुप्रीम कोर्ट के 1986 में आया मामला ‘बिझोय इमैनुएल बनाम केरल राज्य’ मामले का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि किसी को राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। लेकिन सरकार ने सीधे कहा कि वो वंदे मातरम बिल में किसी को भी मजबूर नहीं कर रहे है, वो तो बस राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा करने का काम कर रहे है।

राज्यसभा में फिलहाल तो ये बिल पास हो गया है लेकिन  उसके कानून बनने से पहले उसे संविधान के तहत निर्धारित अन्य प्रक्रियाओं से भी गुजरते हुए अंतिम हस्ताक्षर राष्टपति से करवाना होगा। जिसके बाद ही ये एक कानून बन सकेगा। जिसका अभी प्रोसेस होने वाला है।

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