Dalit Leaders of Bihar: बिहार की धरती को लेकर हमेशा कहा जाता है कि वो आईएएस और आईपीएस की धरती है.. लेकिन क्या आप ये जानते है कि इसी बिहार की धरती ने कई दिग्गत नेता भी दिये…देश के सर्वोच्च पद राष्ट्रपति भी पहली बार बिहार से चुने गये थे.. जी हां, डॉ राजेंद्र प्रसाद। लेकिन 60 के दशक के बाद जब कृष्ण प्रसाद सिन्हा का देहांत हुआ तब बिहार के एक मजबूत स्थिति में था लेकिन उसके बाद से बिहार की राजनीति जातिगत अखाड़ा बन बन गई।
वैसे तो कभी सवर्ण, तो कभी ब्राह्मणों का बोलबाला रहा , लेकिन धीरे धीरे बिहार का समय बदला और दलित भी राजनीति का सक्रिय और मजबूत हिस्सा बन गए। अपने इस वीडियो मं हम 10 दलित नेताओ के बारे में बात करेंगें, जो बिहार का राजनीति में काफी सक्रिय और अहम भूमिका निभा रहे है। जिन्होंने दलितो की पहचान के बदलने में अहम भूमिका निभाई है। जानते है कौन है वर्तमान में वो बिहार के दलित नेता। जो इस वक्त पिछड़ी जातियों के होते हुए भी बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे है।
1, चिराग पासवान – Chirag Paswan
बिहार में पासवानो के उद्धार के लिए जनता दल से अलग होकर दलित नेता रामविलास पासवान ने 28 नवंबर 2000 को लोक जनशक्ति पार्टी यानि कि लोजपा की नींव रखी थी। तब से रामविलास पासवान एक प्रसिद्ध दलित चेहरा बन गए थे, वो हाजीपुर से सांसद के रूप में प्रतिनीधि कर रहे थे, लेकिन 2020 में उनकी मौत के बाद उनके बेटे ने उनके पदभार को संभालने की कोशिश की, मगर तभी चिराग के चाचा पशुपति कुमार पारस ने पार्टी को दो फांको में बांट दिया।
ऐसे समय में भी चिराग ने हार नहीं मानी बल्कि वो पूरी ताकत से लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के साथ लौटे.. एक समय था कि उन्हें एनडीए से अलग होना पड़ा था लेकिन आज खुद एनडीए ने उन्हें आमंत्रित किया। 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी जीत के बाद केंद्र सरकार ने उन्हें केंद्र सरकार में खाद्य प्रसंस्कृत और उद्योग मंत्री बनाया गया है, वो लोजपा-रामविलास के अध्यक्ष है, और शसक्त नेता के रूप में खड़े है।
2, जीतन राम मांझी – Jitan Ram Manjhi
मांझी दरअसल मुसहर जातियों में इस्तेमाल होता है, लेकिन जीतनराम मांझी ने अपनी काबिलियत के दम पर बतौर बिहार के सीएम के तौर पर भी काम किया था। 2014 में वो 10 महीनो के लिए बिहार के सीएम भी रहे थे, लेकिन जब उन्हें इस्तीफा देने के लिए कहा गया तो वो नाराज हो गए औऱ जदयू से अलग होकर उन्होंने 2015 में हिंदुस्तान आवाम मोर्चा-सेक्युलर (HAM-S) की स्थापना की और वो आज एनडीए का हिस्सा है। इतना ही नहीं 2024 लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के केंद्रीय मंत्री बनाया। मांझी बिहार के शसक्त दलित नेता कहलाते है।
3,मीरा कुमार – Meira Kumar
– मीरा कुमार को आपने लोकसभा में स्पीकर के तौर पर देखा होगा जो बेहद शांत स्वाभाव की थी, मीरा कुमार कांग्रेस की वरिष्ठ सदस्यों में से एक है, जो कि पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी है। एक स्पीकर के तौर पर उनका पेशेंस काफी सराहनीय है, इससे पहले वो एक राजनायिक रही थी, जिसके बाद 2004 से 2009 तक सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री रही थी। मीरा कुमार 2009 से 2014 तक लोकसभा की 15वीं अध्यक्ष चुनी गई थी, किसी दलित महिला ने पहली बार ये पद हासिल किया था। इतना ही नहीं 2017 में मीरा कुमार को उनकी काबिलियत के कारण ही यूपीए ने राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया था। इस वक्त वो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के तौर पर केवल सलाहकार की तरह काम कर रही है..लेकिन एक दलित होते हुए भी उन्होंने बिहार वका नाम रोशनकर दिया।
4, श्याम रजक- Shyam Rajak
श्याम रजत जनता दल यूनाइटेड के एक कद्दावर नेता है। उन्होंने 2010-2015 के दौरान JD(U) सरकार में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री के तौर पर काम किया था, श्याम रजक ने फिल्म निर्माता विकास वर्मा की बहन अलका वर्मा से लव मैरिज की थी, और ऐसा पहली बार हुआ था कि एक शादी के लिए विधानसभा का एक निर्धारित सत्र स्थगित कर दिया गया था।। उन्होंने राजनीति में कदम 1974 के JP (जयप्रकाश नारायण) छात्र आंदोलन के लिए शुरु किया था। पहले वो आरजेडी का हिस्सा थे, लेकिन फिर उन्होंने 2009 मेंर जेडूयू का दामन थाम लिया था।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी से लगा सकते है कि 2025 विधानसभा चुनाव में वो फुलवारी शरीफ़ (SC) विधानसभा क्षेत्र से खड़े हुए थे. CPI (ML) लिबरेशन के गोपाल रविदास को 32,657 वोटों के अंतर से हराया। रजाक को 126,470 वोट मिले, जो कुल वोटों का 49.18% था। रजाक अखिल भारतीय धोबी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके है। कभी आर्मी ऑफिसर बनने का ख्बाब रखने वाले रजाक ने परिक्षा क्लियर करने के बाद भी केवल अपने लोगो का भला करने के लिए आर्मी छोड़ राजनीति का रास्ता चुना। जो आज बिहार के एक लोकप्रिय दलित नेता है।
5, रत्नेश सदा – Ratnesh Sada
साल 1987 से पहले एक रिश्ता चालक के तौर पर काम करने वाले एक कर्मठ नेता है रत्नेश सदा। दलितो के संघर्षों को बेहद करीब देखने और झेलने वाले रत्नेश के पिता दिहाड़ी मजदूर थे, उन्होंने रिक्शा चलाने के साथ साथ कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान ही वो जनता दल यूनाइटेड के महादलित विंग के सदस्य बन गए..और आगे जाकर अध्यक्ष भी चुने गए। इसके बाद 2010 में सहरसा जिले के सोनबरसा विधान सभा क्षेत्र से बिहार विधान सभा के सदस्य चुने गए थे… औऱ दो बाद सदस्य चुने गए। 2023 में वो नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में शराब नियंत्रण मंत्रालय के मंत्री बने। आज वो बिहार के एक प्रमुख दलित मंत्री है। इनके अलावा भी कई दलित नेता है जिन्होंने बिहार की राजनीति में अहम भूमिका निभाई हुई है।



