Top 5 Dalit news: दलितों की स्थिति पर रोना रोने वालों को कमी नहीं है और खासकर जब राजनीतिक रोटियां सेंकनी हो तो फिर तो दलित ही उनके सर्वेसर्वा हो जाते है, मगर जब उनके साथ घोर अपराध होते है, उन्हें प्रताड़ित किया जाता है फिर यहीं लोग इनकी भलाई का रोना क्यों नहीं रोते। फिर कहां चले जाते है ये दलितों के तथाकथित भला चाहने वाले। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
भीम आर्मी चीफ ने दी सुप्रीम कोर्ट को चुनौती
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जिन्होंने सुप्रीम कॉर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दलितों के लिए आवाज उठाई है। बता दे 11 मई को कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि बंद कमरे में जातिसूचक गालियां देना अपमान नहीं कहलायेगा और न ही वो scst act के तहत अपराध माना जाएगा, जिसे लेकर आखिर आजाद ने भी अपने विचार प्रकट कर दिए है। आजाद ने कहा कि एससी ने सार्वजनिक दृष्टि” की शर्त लगाकर जातिसूचक गाली को अपराध की परिभाषा से बाहर ही कर दिया है। ये फैसला न्याय की मूल भावना के खिलाफ है। इस तरह के फैसले केवल एसीसी एसटी कानून को कमजोर करने के लिए किये जा रहे है जो कि चिंताजनक और दुर्भावनापूर्ण है।
उन्होंने कोर्ट से सवाल किया कि क्या अब दलितों का अपमान “लोकेशन” और किस “माध्यम” से किया गया है, उसे देखकर तय किया जायेगा कि अपमान हुआ है या नहीं… क्या फोन पर या बंद कमरे में किया गया जातिय अपमान अपराध नहीं है, क्या उससे भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचती या उससे मानसिक आघात नहीं होता। आजाद ने ये भी कहा कि वो कोर्ट का पूरा सम्मान करते है लेकिन इस तरह के फैसले दलितो के प्रति न्याय को कमजोर करेंगे, इसलिए वो जल्द ही इस पर पुर्नविचार याचिका दायर करने वाले है। ऐसे में देखना ये होगा कि पहले कोलकाता हाईकोर्ट और फिर अब सुप्रीम कोर्ट.. दोनो ने ही इस तरह का फैसला सुनाया है, ऐसे में क्या आजाद की याचिका से बदलाव होगा।
कैथल में चमार रैजीमेंट स्मारक मे तोड़फोड़
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला हरियाणा के कैथल से है, जहां दलितों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए चमार रेजिमेंट स्मारक को जातिवादी आतंकियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। ये घटना कैथल जिले के पुंडरी उपमंडल के हाबड़ी गांव की है। स्मारक को तोड़ने को लेकर वहां रहने वाले स्थानीय लोगो में काफी रोष है, वहीं भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने वहां पहुंच कर पुलिस की अब तक लचर कार्यवाई के खिलाफ नारे लगाये है।
इतना ही नहीं स्थानीय लोगो ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द कार्यवाई नहीं हुई और आरोपी गिरफ्तार नही हुए तो मरे हुए पशुओ को पुंडरी थाने के सामने डालेंगे और खुद कार्यवाही करेंगे। बता दें कि ये स्मारक 1 अकटूबर 2023 को बनाई गई थी, जो कि वहां के स्थानीय लोगों के लिए उनका सम्मान का प्रतीक है। ऐसे में उन्हें परेशान करने के लिए असमाजिक तत्वो की ये हरकत बताती है कि राज्य में दलितों के लिए रहना कितना मुश्किल है। ऊपक से पुलिस वालें भी कानों में तेल डाल कर बैठे है। ऐसे में देखना ये होगा कि अगर कार्यवाई नहीं हुई तो दलित संगठनो का क्या एक्शन होगा।
बिहार के सहरसा में दलितो के घरों पर चला बुल्डोजर
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के सहरसा ने है, जहां दलितों और महादलितों के घरों और दुकानों को तोड़ने का मामला गरमाने लगा है। इतना ही नहीं दलित समाज के लोगों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि घरों को तोड़ने में भी उनके साथ जातिगत भेदभाव किया गया है। ये घटना सहरसा के सौरभबाजार नगर पंचायत क्षेत्र का है, जहां सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने के लिए वहां पर प्रशासन ने बुल्डोजर चलवा दिया.. हैरानी की बात है केवल दलितो औऱ महादलितों की झोपड़ियों को ही तबाह किया गया जबकि प्रभावशाली लोगों ने जो अवैध कब्जा किया हुआ था, उन पर को कार्यवाई नहीं हुई।
अगर वाकई में कब्जा हटाने की नियत होती तो सबके घर तोड़े जाते, लेकिन यहां प्रशासन की नियत केवल दलितों को उजाड़ना थी। पीड़ितों ने जिला प्रशासन से वैकल्पिक रहने के लिए जगह देने की अर्जी की है लेकिन याचिका पर अब तक कोई जवाब भी नहीं आया है। जिससे प्रभावित दलित लोग बेघर हो गये है। वहीं सरकारी जमीन पर कुछ भूमाफियाओं ने भी कब्जा कर पक्के मकान बनाये औऱ गैरकानूनी काम कर रहे है लेकिन सरकार उनके खिलाफ कार्यवाई करने के बजाये उन्हें संरक्षण दे रही है। ऐसे में अब देखना ये होगा कि क्या वाकई में अतिक्रमण हटाना था या दलितों को ही रास्ते से हटाने की साजिश है। जवाब आप खुद दीजिये।
मोहाली में दलित महिला के साथ मारपीट
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला पंजाब के मोहाली से है। जहां एक दलित महिला को मामूली कहासुनी होने पर न केवल बुरी तरह से पीटा गया बल्कि उसे जातिसूचक गालियां देकर अपमानित भी किया गया। हैरानी की बात है कि जब पीड़िता ने पुलिस से शिकायत करनी चाही तो आरोपियों के रसूक के चक्कर में पुलिस वालो ने उसे भगा दिया। ये घटना मोहाली के डेराबस्सी क्षेत्र के हंडेसरा थाना क्षेत्र का है। पुलिस वालों के रवैये से तंग आकर पीड़िता ने दलित संगठन से संपर्क साधा, जिन्होंने तुरंत महिला की अर्जी सुनी और पुलिस थाने के बाहर पहुंच कर प्रदर्शन शुरु कर दिया।
पीड़िता ने बताया कि पुराने विवाद को लेकर आरोपियो ने महिला को बीच सड़क पर रोक कर अभद्र व्यवहार किया, लेकिन जब महिला ने इसका विरोध किया तो उसे जातिसूचक गालियां दी और मारपीट भी की। बढ़ता जन आक्रोश देखकर पुलिस भी सकते में आ गई है, उन्होंने भीड़ को शांत कराया और आश्वासन दिया कि जल्द आरोपी जेल की सलाखों के पीछे होंगे, वहीं दलित संगठनों ने फिलहाल के लिए प्रदर्शन रोक दिया है लेकिन उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने जल्द आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो बड़ा आंदोलन करेंगे। ऐसे में देखना ये होगा कि आखिर पुलिस जो अब तक इतनी ढीली थी, क्या वाकई में कार्यवाही कर आरोपियों को गिरफ्तार करेंगी.. या ये केवल बातें ही थी।
झांसी में पानी की बूंद के लिए तरह से दलित
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के झांसी से है, जहां दलितो को अब तक अपराधिक मामलो में न्याया के लिए आंदोलन करना पड़ता था लेकिन अब तो अपने लिए बेसिक सुविधाओ के लिए भी आंदोलन का ही सहारा लेना पड़ रहा है। ताजा मामला झांसी के मसीहागंज थाना क्षेत्र का है, जहां दलित संगठनो ने पेय जल की समस्या के त्रस्त होकर जल निगम के बाहर अर्थी प्रदर्शन किया। कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रदीप जैन भी इस मौके पर दलित समाज के पीड़ितो के साथ मौजूद थे। दलित पुरुषों औऱ महिलाओं ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि कई सालो से इस इलाके में पानी नहीं है, महिलाओ को कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।
जब 2024 में उन लोगो ने प्रदर्शन किया तो अमृत पेयजल योजना के तहत कुछ जगहो पर पानी की लाइन लगाई गई लेकिन अब भी 50 प्रतिशत से ज्यादा लोगो के घरों में पानी नहीं आता है। ये इलाका दलित बहुल इलाका है। जिन्हें अक्सर पानी के लिए जातिगत भेदभाव सहना पड़ता है। इस इलाके में करीब 25 हजार की आबादी है, शिकायत करने के लिए लोग फोन करते है तो कंट्रोल रूम फोन नहीं उठाता है। लोगों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द से जल्द पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो दलित समाज के लोग वहीं पर अपनी जान दें देंगे। हालांकि प्रशासन से आश्वासन दिया है कि 7 दिनों के अंदर इस समस्या को सुलझा दिया जायेगा, ऐसे में देखना ये होगा कि क्या दलितों की ये समस्या का समाधान 7 दिनो में हो जायेगा।



