Top 5 Dalit news: सरकार चाहे दलितों की स्थिति को सुधारने, उनके लिए न्याय के नए नए नियमों को लाने के राग कितने भी अलाप लें, लेकिन जमीनी स्तर पर दलितों और पिछड़ों की स्थिति कितनी दयनीय है वो असल में किसी से छुपा नहीं है। सोशल मीडिया के जरिए सबका काला चिट्ठा सामने आ ही जाता है बावजूद इसके पता नहीं किस बात का क्रेडिट लिया जाता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
कानपुर में दलित बाप बेटे के साथ उत्पीड़न
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से है। यूपी सरकार दलितों के साथ होने वाले अपराधों में कमी के कितने भी दावे कर लें लेकिन आए दिन केवल उत्तर प्रदेश से दलितों के साथ होने वाली बर्बरता की खबरें किसी को भी झकझोर कर रख सकती है। ताजा मामले कानपुर के सच्चेंडी के झखड़ा संभरपुर गांव से है जहां सार्वजनिक नल पर वहां रखे बाल्टी और लोटे से पानी पीने के बदले दलित बाप बेटे के साथ मानवता की सारी हदें पार कर दी गई। 4 जातिवादी आतंकियों ने पहले तो उन्हें बुरी तरह से पीटा, उसके बाद किशोर के कपड़े उतरवा कर मुर्गा बनवाया और फिर जूते पर थूक कर उसे जबरन चटवाया और उसी जूते में पानी भरकर जबरन किशोर कर पिलाया।
13 दिनों के बाद मामला दर्ज किया गया
हैरानी को बात है कि इस बर्बरता के होने के बाद भी पुलिस का रवैया इतना लचर था कि करीब 13 दिनों के बाद मामला दर्ज किया गया। ये घटना 2 मई को घटित हुई थी। पीड़ित पिता ने बताया कि उनका 16 साल का बेटा उनके साथ खेतों में काम करता है, लेकिन 2 मई को रात को करीब 9 बजे उसे प्यास लगी तो वो सार्वजनिक नल से पीने चला गया लेकिन वहां मौजूद संजय राजपूत, दीपक राजपूत और उसके दो साथियों ने पीड़ित पर धर्म भ्रष्ट करने का आरोप लगाया और उसके साथ मारपीट की।
सच्चेंडी थाना प्रभारी दीनानाथ मिश्रा ने बताया कि पीड़ित की मारपीट के कारण पसलिया टूट गई है साथ ही उसका हाथ भी टूटा है, और पुलिस को ऐसी घटना की तहरीर देर से मिली है। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और तलाश शुरू कर दी है। फिलहाल चारों ने से कोई आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है। अब देखना ये होगा कि क्या पुलिस वाकई में जांच कर रही है या केवल समय खींच रही है।
दिल्ली में भी शुरू हुआ जमकर जातिवाद
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली से है जहां जातिगत भेदभाव का रौब दिखाकर दलित युवक के साथ गालीगलौच की गई। इस घटना का एक वीडियो भी काफी वायरल हो रहा है। ये घटना दिल्ली के महरौली इलाके की है, पीड़ित विपिन कुमार दुग्गल ने बताया कि वो 10 मई की शाम 5 बजे के करीब वो घर लौट रहा था तभी सामने से आती तेज बाइक ने जबरन उसे कट मारने की कोशिश की तो पीड़ित ने ऐसा करने से इनकार कर दिया।
बस फिर क्या था आरोपी ने पीड़ित को अपशब्द करने शुरू किया, धीरे धीरे वो जातिसूचक शब्दो से पीड़ित को बुलाने लगा। वीडियो ने आप देखिए कैसे वो शख्स खुद को पंडित और पीड़ित को चूहड़ा बुला रहा है साथ ही उसे ये भी यकीन है कि उसका कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता है यानी कि उसे न तो कानून का डर है और न ही जेल जाने का। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्य में बीजेपी राज के तो जातिगत भेदभाव बढ़ा ही है लेकिन अब तो दिल्ली में बीजेपी का आने के बाद यहां की स्थिति भी ऐसी होने वाली है।
गुजरात में दलित परिवार को किया बहिष्कृत
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले से है, जहां एक दलित परिवार को सार्वजनिक कुएं से पानी लेने से न केवल रोका गया बल्कि उनके लिए तुगलकी फरमान भी जारी कर दिया गया। ये मामला पाटड़ी तालुका के मेटासर गांव की है, जहां दलित परिवार को गांव वालों ने सामाजिक बहिष्कार करने का फैसला सुनाया है। पीड़ित दिलीपभाई भीखाभाई राठौड़ ने पुलिस को तहरीर दी कि वो और उनका परिवार राजकोट में रहते हैं, लेकिन वो गांव आए थे, मगर इस दौरान परिवार की एक महिला कुंए से पानी भरने गई गई थी लेकिन गांव के कुछ लोगों ने महिला को रोका, ओर उसे जातिसूचक गालियां देते हुए उसके साथ दुर्व्यवहार भी किया।
इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस उपाधीक्षक पार्थ परमार ने बताया कि उन्हें इस मामले में कई सबूत मिले है, और आरोपियों की तलाश शुरू हो चुकी है। राज्य में इस तरह की घटनाओं के बढ़ने से अब वहां दलित और बौद्ध समाज के लोगों को चिंता होने लगी है। ऐसी में देखना ये होगा कि क्या पुलिस की सख्ती से मामले में कमी आएगी।
फिरोजाबाद में दलित छात्र से बर्बरता
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से है जहां एक दलित छात्र ने जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न से तंग आकर आत्महत्या कर ली है। ये मामला शिकोहाबाद थाना क्षेत्र के नंगला विलोटिया गांव का है। मृतक छात्र के पास एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है जिसमें उसने दो युवकों पर उसकी जाति के कारण उससे मारपीट करना,उसे बेइज्जत करना और मानसिक प्रताड़ना देने का आरोप लगाया है।
मृतक के परिजनों ने बताया कि युवक एक युवती का पता पूछने के लिए आरोपियों के घर कर बाहर तक गया था, लेकिन उसी शाम दो युवकों ने इसे जबरन उठा लिया, उसके साथ मारपीट की गई जिससे उसका हाथ टूट गया वहीं मृतक के फोन से कुछ चीजें भी गायब है। इस प्रताड़ना से आहत होकर दलित युवक ने ऐसा कदम उठाया है। वहीं पुलिस ने परिजनों के बयान के आधार पर जांच शुरू कर दी है साथ ही आरोपियों की तलाश भी जारी है। परिजनों के आरोपों से लगता है कि ये मामला जितना छोटा लग रहा है उतना है नहीं। अब देखना ये होगा कि इस मामले में क्या क्या खुलासे होंगे।
भीम आर्मी चीफ की शराब बंदी की घोषणा का असर
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद की लाई उस आंधी को लेकर है जिसमें उन्होंने एक तरफ ये ऐलान किया कि अगर यूपी में इनकी सरकार बनेगी तो वो सबसे पहले सख्ती से शराब बंदी करेंगे, तो वहीं भीम आर्मी ने आजाद की बात का अनुसरण अभी से ही करते हुए मध्यप्रदेश के मुरैना में अवैध शराब विक्री के विरोध में सड़कों पर उतर कर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुरैना की सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में भीम आर्मी के कार्यकर्ता सड़कों पर शराब बिक्री के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आंदोलन कर रहे है।
इसमें महिलाओं ने भी पूरा समर्थन दिया है। क्यों कि शराब की बिक्री के कारण ज्यादातर महिलाएं ही प्रभावित होती है। एक तरफ आजाद का ऐलान और दूसरी तरफ भीम आर्मी का एक्शन, ये सबूत है कि केवल आजाद ही ऐसा नेता है जो इस वक्त वाकई में न केवल दलितों के लिए बल्कि महिलाओं के हित के बारे में भी सोचते है। वरना तो आप बाकी की पार्टियों को मूल मुद्दा छोड़कर केवल एक दूसरे पर कीचड़ उछालना ही आता है।



