Top 5 Dalit News: 24 घंटे, 5 घटनाएं और कई सवाल आखिर कब मिलेगा दलितों को न्याय?

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Top 5 Dalit News:  दलितों की स्थिति पर भले ही कितने आंदोलन कर लिए जाए, कितने ही मोर्चे खोले जाएं, लेकिन दोगुने होते हुए भी दलित के बीच एकजुटता न होने का फायदा तो सवर्ण को ही मिलना है। सालों को लड़ाई चंद मुट्ठीभर विरोधियों के आगे आखिर क्यों कमजोर पड़ जाती है। वजह हमें खुद तलाशनी है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बताएंगे, जो सबूत है कि दलितों  के बीच खुद के भेदभाव का फायदा कैसे मनुवादी उठाते रहे है।

बिहार की बंगला राजनीति गरमाई

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला बिहार की राजधानी पटना से है जहां एक दलित होने के कारण अभी हाल ही में नियुक्त हुए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम को जातिगत भेदभाव के कारण ठोकरे खानी पड़ रही है, इससे उनका दर्द छलक पड़ा। दरअसल नियुक्ति के इतने दिन बीत चुके है, दो बार सरकारी बंगला अलॉट किया गया लेकिन उनके दलित होने के कारण वो बंगला खाली ही नहीं किया जा रहा है। जबकि सरकार भी इसमें उनकी मदद नहीं कर रही क्योंकि ये बंगला 10 सर्कुलर रोड पर है जिसमें पूर्व सीएम राबड़ी देवी रहती है।

21 हार्डिंग रोड का बंगला मिला

नंदकिशोर राम ने भवन निर्माण विभाग की लापरवाही को उजागर करते हुए कहा कि पिछले 16 दिनों में घर के अलॉटमेंट को लेकर दो ऑर्डर बदल दिये गए, उनके लेकिन अभी तक उन्हें आशियाना नहीं मिला, वजह साफ है उनकी जाति, जिसका अहसास उन्हें अब हो रहा है। मंत्री ने बताया कि उन्हें पहले 21 हार्डिंग रोड का बंगला मिला था फिर क्यों बदला गया, और वो भी रबड़ी देवी का बंगला क्यों अलॉट किया गया, उन्होंने कई बार इस मुद्दे पर अर्जी दे दी है लेकिन बंगला खाली नहीं कराया गया है, वहीं किसी और को ये बंगला मिला होता तो कब का खाली हो गया होता..  वहीं राजद ने भी अपना बचाव किया और उल्टा दलित मंत्री पर आरोप लगाया है कि उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

ये बंगला नेता प्रतिपक्ष को अलॉट है तो जबरन क्यों खाली कराया जा रहा है। हैरानी की बात है कि सब कुछ साफ है, बावजूद इसके दलित नेता को अपने ही हक के लिए लड़ना पड़ रहा है, जबकि सरकारी बंगला किसी की निजी संपत्ति नहीं है, तो वहीं भवन निर्माण विभाग ने आखिर क्या सोच कर दलित नेता को वो घर अलॉट किया जो पिछले कई महीनों से विवादित है। आपको क्या लगता है क्या वाकई में जातिगत भेदभाव के कारण ऐसा हुआ है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है।। दलित पिछड़े लड़ते रहे, और बाकियों की राजनीतिक रोटियां सिकंती रहे।

राजस्थान के जालौर में मानवता शर्मंसार

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के जालौर से है,  ये खबर आपको सोचने पर मजबूर कर देगी कि आखिर कौन सी सदी में जी रहे है हम, दुनिया मंगल तक पहुंच गई है लेकिन जातिवादियों की सोच गटर तक ही सीमित है। ये मामला जालौर के रानीवाड़ा थाना क्षेत्र के धामसिंन गांव का है। जहां जातिगत दुश्मनी निकालने के लिए एक दलित युवक के साथ मानवता की सारी हदें पार कर दी गई। पहले युवक को जबरन उठाया गया, रात भर उसे बंधक बना कर नंगा करके पीटा गया, उस पर पेशाब किया गया और जबरन पेशाब पिलाने की कोशिश भी की गई। इतना ही नहीं दबंगों का इतने से दिल नहीं भरा तो उन लोगो ने पीड़ित को नंगा ही बीच सड़क पर छोड़ दिया।

पीड़ित किसी तरह से अपने घर पहुंचा और पूरे परिवार को आपबीती सुनायी। पीड़ित के शरीर के चोट के निशान और उसकी हालत बता रही थी कि उसके साथ क्या हुआ है। परिवार वालों ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित को अस्पताल में भर्ती कराया है और अपनी जांच शुरू कर दी है। हैरानी की बात है अभी तक किसी भी आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला है। सोचने वाली बात ये है कि क्या पीड़ित कभी इस हादसे से उबर भी पाएगा। आखिर क्यों है जातिवादियों के हौसले इतने बुलंद।

भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद का बड़ा ऐलान

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने देश की  गरीब और वंचित जनता को रोजगार और हाइयर एजुकेशन देने के लिए बड़ा ऐलान कर दिया है। आजाद ने एक बार फिर से सार्वजनिक तौर पर कहा है कि अगर वो सत्ता पर बैठे तो वो न केवल एजुकेशन मुफ़्त करेंगे बल्कि वो MBBS और इंजीनियरिंग की पढ़ाई को भी मुफ्त करवा देंगे। आजाद के साफ कहा कि जब बिना डोनेशन के एजुकेशन मिलेगी तो कैसे कोई बेरोजगार रहेगा। उत्तर प्रदेश में 40+ से ज़्यादा सरकारी मेडिकल कॉलेज हैं।

अगर MBBS की पढ़ाई मुफ़्त होती है, तो हर साल लगभग 5500 से भी ज्यादा छात्रों को फायदा होगा। केवल डोनेशन के कारण मेधावी छात्राओं को मौका नहीं मिलता, वो मौका उन्हें मिलेगा तो बताइए कि कैसे होगी डॉक्टर्स की कमी। आजाद ने कहा कि ये सपना बाबा साहब आंबेडकर का था, जिसे वो सच करके दिखाएंगे, इससे गरीब पिछड़ों वर्गों को भी बराबरी और सम्मान से शिक्षा मिलेगी। आगामी यूपी विधानसभा चुनाव से पहले आजाद की लहर बीजेपी पर भारी पड़ रही है। एक तरफ लगातार दूसरे पार्टी के नेता आसपा में शामिल हो रहे है तो वहीं आजाद का मेनिफेस्टो इतना मजबूत होता जा रहा है कि लोगों का ध्यान इनकी तरफ जाने लगा है , और वो सीएम पद के मजबूत दावेदार बनते जा रहे है। वैसे आपको क्या लगता है क्या आजाद का मेनिफेस्टो सच हो सकता है।

देवरिया में दलित बच्ची को पेड़ से बांध कर पीटा

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के देवरिया से है, जहां अब तक दलित जाति से आने वाले पुरुषों को निशाना बनाया जाता था लेकिन अब तो जातिवादी बच्चियों को भी नहीं छोड़ रहे है.. एक मासूम दलित बच्ची पर सरेआम चोरी का आरोप लगा कर पहले तो आरोपी ने बच्ची को बाल पकड़ कर पूरे गांव में घुमाया और फिर नीम के पेड़ से बांधकर बुरी तरह से पीटा। मानवता को शर्मसार करने वाली ये घटना देवरिया जिले के तरकुलवा थाना क्षेत्र के मिश्रौली गांव की है। हैरानी की बात है केवल चोरी के शक में ये अमानवीय क्रूरता की गई।

इस पूरी घटना का एक वीडियो किसी ने सोशल मीडिया पर डाल दिया जिसे देखने के बाद पुलिस ने तुरंत घटना स्थल पर दबिश दी, और बच्ची को मुक्त कराया, लेकिन तब तक गांव वाले तमाशबीन बन कर देखते रहे मगर किसी ने पुलिस को जानकारी तक नहीं दी। पुलिस ने आरोपी हरिकेश गुप्ता के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी है।

देवरिया सदर थाने के क्षेत्राधिकारी संजय कुमार रेड्डी ने बताया कि आरोपी हरिकेश की मिश्रौली गांव में किराने की दुकान है, आरोपी को शक था कि पीड़िता ने उसकी दुकान में चोरी की है, और केवल शक के आधार पर उसने पीड़िता को पकड़ा, और पूरे गांव में बाल पकड़ कर घसीटा और फिर पेड़ से बांध कर पीटा.. जबकि आरोपी को पास चोरी का कोई सबूत नहीं था.. मगर केवल दलित होने के कारण बच्ची को ही निशाना बनाया गया… ये कैसा तुगलगी कानून है जहां संविधान का कोई सम्मान नहीं.. खुद ही जज बनते है और खुद ही सजा भी सुनाते है। अब देखना ये होगा कि कानून पीड़िता को न्याय देता है या नहीं।

बिहार के मुजफ्फरपुर में टीचर ने किया दलित बच्ची का दुष्कर्म

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के मुजफ्फरपुर से है, जहां एक शिक्षक ने अपनी विकृत मानसिकता के कारण 9 साल की मासूम दलित बच्ची को ट्यूशन पढ़ाने के बहाने से अपनी हवस का शिकार बनाया। ये मामला मुजफ्फरपुर के मणियारी थाना क्षेत्र का है, जहां पीड़िता की मामी ने पुलिस को इस सनसनीखेज घटना की जानकारी दी। पीड़िता के परिजनों के मुताबिक 9 साल की पीड़िता पास में ही शिवम मिश्रा नाम के शख्स के पास ट्यूशन पढ़ने जाती थी, लेकिन 26 मई को पीड़िता की मां ने उसकी मामी को कॉल करके बुलाया और बच्ची के साथ हुई बर्बरता की कहानी बताई। पीड़ित परिवार के अंदर इतनी हिम्मत नहीं बची थी कि वो इसकी जानकारी पुलिस को दें, लेकिन बच्ची की मामी ने हिम्मत दिखाई और आरोपी शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज कराया।

इस घटना की जानकारी जंगल की आग की तरह फैली.. औऱ इस मुद्दे पर पीड़िता के लिए न्याय की मांग को लेकर कांग्रेस नेता आदित्य पासवान ने भी हल्ला बोल दिया है.. उन्होंने मांग की है कि जल्द से जल्द आरोपी को गिरफ्तार किया जाये, अगर 6 दिनों में आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती है तो वो सातवे दिन खुद मणिहारी थाना में मिलेंगे और थाने का घेराव करेंगे। जरा सोचिये, माता पिता के बाद टीचर ही बच्चे के लिए दूसरे अभिभावक होते है, जिनके साथ बच्चे दुनिया के बारे में सीखते है, लेकिन स्थिति ऐसी है कि जो सही रास्ते पर चलना सिखाता है वहीं जब रास्ता भटक जाये तो कैसे आप एक सभ्य समाज की परिकल्पना कर सकते है। क्या दलित डर से अपने बच्चों को शिक्षा के लिए बाहर भेजेंगे, जवाब आप खुद बताइयें।

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