Bihar Politics: हाल ही में, बिहार के पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम को लेकर में एक चौंकाने वाली और दुखद रिपोर्ट सामने आई है, जिससे पता चलता है कि उन्हें भी जातिवाद की मार झेलनी पड़ रही है। इसके अलावा, काफी समय से उन्हें न तो कोई सरकारी बंगला मिला है और न ही सरकार की ओर से कोई अन्य सुविधा या सहूलियत।
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बिहार की बंगला राजनीति गरमाई
आज जातिवाद इस हद तक फैल चुका है कि इसके स्पष्ट प्रमाण बिहार की राजनीति में देखे जा सकते हैं। दरअसल हालिया बिहार (Bihar) की राजधानी पटना से है जहां एक दलित होने के कारण अभी हाल ही में नियुक्त हुए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम (Minister Nandkishore Ram) को जातिगत भेदभाव के कारण ठोकरे खानी पड़ रही है, इससे उनका दर्द छलक पड़ा। दरअसल नियुक्ति के इतने दिन बीत चुके है, दो बार सरकारी बंगला अलॉट किया गया लेकिन उनके दलित होने के कारण वो बंगला खाली ही नहीं किया जा रहा है। जबकि सरकार भी इसमें उनकी मदद नहीं कर रही क्योंकि ये बंगला 10 सर्कुलर रोड (10 Circular Road) पर है जिसमें पूर्व सीएम राबड़ी देवी (Former CM Rabri Devi) रहती है।
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21 हार्डिंग रोड का बंगला मिला
नंदकिशोर राम ने भवन निर्माण विभाग की लापरवाही को उजागर करते हुए कहा कि पिछले 16 दिनों में घर के अलॉटमेंट को लेकर दो ऑर्डर बदल दिये गए, उनके लेकिन अभी तक उन्हें आशियाना नहीं मिला, वजह साफ है उनकी जाति, जिसका अहसास उन्हें अब हो रहा है। मंत्री ने बताया कि उन्हें पहले 21 हार्डिंग रोड (21 Harding Road) का बंगला मिला था फिर क्यों बदला गया, और वो भी रबड़ी देवी का बंगला क्यों अलॉट किया गया, उन्होंने कई बार इस मुद्दे पर अर्जी दे दी है लेकिन बंगला खाली नहीं कराया गया है, वहीं किसी और को ये बंगला मिला होता तो कब का खाली हो गया होता.. वहीं राजद (RJD) ने भी अपना बचाव किया और उल्टा दलित मंत्री पर आरोप लगाया है कि उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
सरकारी बंगला किसी की निजी संपत्ति नहीं
RJD के कार्यकर्ता और नेता यह तर्क दे रहे हैं कि 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास को खाली कराने को लेकर पिछले कई महीनों से संघर्ष चल रहा है, और लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ये बंगला नेता प्रतिपक्ष को अलॉट है तो जबरन क्यों खाली कराया जा रहा है। हैरानी की बात है कि सब कुछ साफ है, बावजूद इसके दलित नेता को अपने ही हक के लिए लड़ना पड़ रहा है, जबकि सरकारी बंगला किसी की निजी संपत्ति नहीं है, तो वहीं भवन निर्माण विभाग ने आखिर क्या सोच कर दलित नेता को वो घर अलॉट किया जो पिछले कई महीनों से विवादित है। आपको क्या लगता है क्या वाकई में जातिगत भेदभाव के कारण ऐसा हुआ है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश है। दलित पिछड़े लड़ते रहे, और बाकियों की राजनीतिक रोटियां सिकंती रहे।



