Top 5 Dalit news: देशभर में दलितों और आदिवासियों से जुड़े 5 अहम मामले

Caste discrimination in India, Top 5 Dalit News
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Top 5 Dalit news: ऐसा लगता है कि जैसे अब ये देश संविधान के कानून से नहीं बल्कि चंद सत्ताधारियों के इशारों पर चलता है, जहां अपने हक के लिए आवाज उठाने वालों का मुंह जबरन बंद करा दिया जाता है, ताकि उनकी करतूतों की खबर नेशनल मीडिया तक न पहुंचे। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो सरकार की इस नाकामी को उजागर करते है, जो दलितों और आदिवादियों के हक की रक्षा करने में मिली असफलता को दर्शाती है।

जंतर मंतर पर होने वाले मार्च पर लगाई रोक

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर पिछले तीन हफ्तों से चल रहे धरना प्रदर्शन को लेकर है। जहां पुलिस द्वारा जबरन प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश के बाद भी छात्रों का हौसला कमजोर नहीं हुआ। 20 जुलाई को शुरू हुए संसद के मानसूत्र सत्र के पहले ही दिन खुद भीम आर्मी चीफ और नगीना सांसद चंद्र शेखर आजाद ने वहां पहुंच कर जंतर मंतर से लेकर संसद तक के मार्च में छात्रों का हौसला बढ़ाया। इसके लिए आजाद 19 जुलाई को ही जंतर मंतर पहुंच गए थे। बता दें कि 15 जुलाई को खुद आजाद दिल्ली आए थे और शिक्षा मंत्री के खिलाफ इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले धरना प्रदर्शन में अपना समर्थन दिया था। इस दौरान उन्होंने वादा किया था कि 20 तारीख को विशाल मार्च होगा, जिसमें केवल महापुरुषों की तस्वीर होंगी, किसी पार्टी का कोई झंडा नहीं। आजाद का साथ मिलने के बाद ये प्रदर्शन बेहद व्यापी हो गया और कई बड़े नेताओं के साथ साथ फिल्मी हस्तियों का भी साथ मिला था। साथ ही मार्च के लिए देश भर से सैकड़ों छात्र दिल्ली पहुंचे थे। लेकिन मार्च से पहले ही जंतर मंतर पर करीब 5000 सुरक्षा कर्मियों को नियुक्त कर दिया गया। ताकि प्रदर्शनकारी संसद तक न पहुंच सकें। वहीं ‘चलो संसद’ मार्च को रोकने के लिए जंतर मंतर के आसपास धारा 163 लागू कर दी गई है। वहीं इसकी जानकारी आसानी से किसी के पास न पहुंचे उसके लिए सैकड़ो जैमर लगा दिये गए। हालांकि छात्रों के हौसले फिर भी बुलंद है। उन्होंने हाथों में तिरंगा लिये पुलिस और RAF का सामना करते हुए मार्च शुरु कर दिया और संसद मार्ग थाने तक पहुंच गए है.. अब आज हुए इस मार्च से साफ हो गया है कि छात्र अब झुकने वाले नहीं हैं, शिक्षा मंत्री को अपनी कमियों को स्वीकार करना पड़ेगा और इस्तीफा देना ही पड़ेगा। अब देखना ये होगा कि एक छोटा सा आंदोलन इतना व्यापक बन गया है ऐसे में क्या सरकार की तरफ से अब कोई प्रतिक्रिया आएगी।

धनवाद में 16 साल के दलित बच्चे के साथ बर्बरता

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के धनवाद से है, जहां एक 16 साल के दलित छात्र को उसके हॉस्टल के कुछ छात्रों ने करीब 4 घंटे तक बंधक बना कर रखा, उसके साथ मारपीट की और उसे  यौन उत्पीड़न की धमकी दी। साथ ही वीडियो बना कर वायरल करने की धमकी भी दी । पीड़ित छात्र ने सबकुछ चुपचाप सह लिया था लेकिन दो दिनों के बस अहसानीय दर्द के कारण उसे सारी आपबीती अपने परिजनों को बतानी पड़ी, जिसे जानने के बाद उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। ये घटना धनवाद जिले के निरसा बेनागोड़िया के जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्रावास में 14 जुलाई को घटित हुई थी। पीड़ित छात्र के परिजनो ने पुलिस को तहरीर दी कि मोबाइल फोन और पैसो की लेन देन को लेकर छात्रो के बीच विवाद हुआ था। जिसके कारण पीड़ित छात्र को उसके हॉस्टल के ही कुछ छात्रो ने बंधक बना लिया औऱ फिर उसे नंगा करके करीब 4 घंटे तक पीटा, उसका मोबाइल छीन लिया गया, उसके जख्मों पर नमक रगड़ा गया, और उसका वीडियो बना कर उसे वायरल करने की धमकी दी गई। पुलिस ने तुरंत 6 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी, हालांकि हॉस्टल या फिर विद्यालय की तरफ से अभी तक कोई बयान सामने नही आया है। देखना ये होगा कि पुलिस कार्यवाई में क्या क्या सामने आता है।

भरतपुर में जाटव समाज के लोगो ने गांव छोड़ने की दी चेतावनी

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के भरतपुर से है, जहां जातिवादियों के दुर्व्यवहार से तंग आकर वहा रहने वाले दलितों ने पलायन करने की चेतावनी दी है। ये मामला भरतपुर के सेवर क्षेत्र के नगला हाथीपुरा गांव का है, जहां रहने वाले जाटव बस्ती के लोगों ने जिला परिषद के सीईओ को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने सार्वजनिक पोखर और उसके आसपास की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया और वहां से आने जाने वाले लोगों के लिए गुजरना तक मुहाल हो गया। पीड़ितो ने बताया कि गांव के जाटव समाज के लोगों के लिए वही आने जाने का रास्ता था, लेकिन अब जब वो लोग वहां से गुजरते है तो दबंग गाली गलौच करते है। पीड़ितो ने साफ तौर पर कहा कि अगर उनके लिए कोई जल्द से जल्द उपाय नहीं किया गया तो वो लोग गांव छोड़ने पर मजबूर हो जायेंगे.. प्रशासन के सामने धरना प्रदर्शन और आमरण अनशन करने को मजबूर हो जायेंगे। जाटव समाज की इस अपील के बाद क्या होगा प्रशासन का अगला कदम, क्या वाकई में दलित होने के कारण उन्हें अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ेगा.. या उससे पहले ही की ठोस कदम उठा लिया जायेगा, ये देखने वाली बात होगी।

इलाहाबाद में दलित छात्रों को हॉस्टल से जबरन निकाला

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद से है जहां एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के छात्रों  के लिए नियुक्त छात्रावास को अवैध बता कर जबरन खाली करा दिया गया। ये मामला इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास का है, जहां समाज कल्याण विभाग द्वारा चलाये जा रहे आईएएस-पीसीएस प्री एग्जामिनेशन सेंटर को अवैध बता कर छात्रों के कमरो को तोड़ दिया गया, उनके कमरो में घुस कर उनका सामान तोड़ कर उन्हें बाहर निकाल दिया गया, यहां तक की उनकी बिजली-पानी की व्यवस्था को रोक दी गई है, जबकि 2025 में अब तक छात्रावास में छात्रावास में नए प्रवेश की प्रक्रिया ही नहीं कराई और न ही नए आवेदन लिये गए है वहीं वहां रहने वाले एससी, एसटी एवं ओबीसी छात्रों के पास सितंबर 2026 तक की परमिशन है, बावजूद उसके केवल उन्हें परेशान करने और नीचा दिखाने के लिए मनुवादी मानसिकता के तहत उनकी शिक्षा पर वार किया गया। इसे लेकर भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने यूपी सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में दलितों की दिखावटी चिंता करने वाले मुख्यमंत्री इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पंत छात्रावास में एससी, एसटी एवं ओबीसी छात्रों के साथ जो अन्याय हो रहा है उस पर आंखे बंद करके क्यों बैठे है। उन्होंने कहा कि वो सरकार से मांग करते है कि दलित पिछड़े छात्रों का शोषण बंद कर दें.. उनके लिए फिर से सुविधायें मुहैया कराई जायें। अब देखना ये होगा कि सरकार का क्या रवैया होगा है।

छत्तरपुर में केन-बेतना लिंक के खिलाफ आदिवासियों  का प्रदर्शन

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के छत्तरपुर से है, जहां केन बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना के खिलाफ कई महीनों ने प्रदर्शन कर रहे आदिवासी समाज के लोगो को आखिरकार बाकि बीजेपी शासित राज्यों की तरह ही जबरन पुलिस बल लगा कर हटवा दिया गया। इस घटना का एख वीडियो भी सामने आया है, जहां आप देख सकते है कि कैसे सुरक्षाबल प्रदर्शनकारियों को जबरन गाड़ियों में भर कर हटाने की कोशिश कर रहे है। अभी हाल ही में जंतर मंतर पर भी पुलिस वालो ने ऐसे ही भूख हड़ताल पर बैठे वैज्ञानिक सोनम वांगचुक और छात्रों को जबरन हटा दिया था, इतना ही नहीं विरोध करने पर जमकर लाठी भी बरसाई थी तो वहीं केन–बेतवा लिंक परियोजना के कारण प्रभावित सैकड़ो आदिवासी समाज के लोग अप्रैल महीने से ही चिता सत्याग्रह, जल सत्याग्रह, मिट्टी सत्याग्रह तथा प्रतीकात्मक फांसी सत्याग्रह जैसे आंदोलन करके सरकार का ध्यान अपनी तरफ करने की कोशिश की थी, वो बस उचित मुआवज़े, सम्मानजनक पुनर्वास औऱ संवैधिक अधिकारों की रक्षा की मांग कर रहे है, लेकिन बदले में राज्य सरकार ने दमन की नीति को अपनाते हुए उनका आंदोलन खत्म करने की कोशिश की गई, जो साफ इशारा है कि अब बीजेपी शासिक राज्यों में संविधान का कानून नहीं चलता है, बल्कि चंद ताकतवर लोगो का कानून चलता है, जिनके निशाने पर सबसे ज्यादा दलित औऱ आदिवासी ही है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद नगीना सांसद ने भी आवाज उठाई है.. उन्होंने सरकार के इस कदम को तानशाही भरा बताया है। सवाल  ये है कि किया वाकई में बीजेपी दलितों और आदिवासियों को देश से पलायन करवाने की प्लानिंग कर रहे है।

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